अंतरिक्ष के 'खलनायक' ब्लैक होल के पास होती है मेमोरी, तारों को निगलने के बाद जानकारी को करता है एन्कोड
नई दिल्ली, 18 मार्च: आपने कभी ना कभी अंतरिक्ष के ब्लैक होल का नाम तो जरूर सुना होगा। आमतौर लोगों के मन में ये धारणा रहती है कि ये अंतरिक्ष के 'खलनायक' हैं, जो ग्रहों और तारों को निगल जाते हैं। इसके बाद उस ग्रह या तारे का नामोनिशान नहीं मिलता, लेकिन फिजिक्स की दुनिया में ये काफी अहम है। इस पर बड़ी संख्या में वैज्ञानिक शोध कर रहे, जिस वजह से रोजाना नई-नई जानकारियां सामने आती हैं।

क्यों नहीं दिखता ब्लैक होल?
वैज्ञानिकों के मुताबिक ब्लैक होल से जुड़ी चीजें काफी जटिल हैं, जिस वजह से उसकी जानकारी समझ में नहीं आती है। ब्लैक होल में एक गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र होता है, जो क्वांटम स्तर पर जानकारी को एन्कोड करता है कि वे कैसे बने थे। एक ब्लैक होल इतने उच्च गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र वाले तारे के खात्मे से बनता है कि ये मृत तारे के प्रकाश को फंसाते हुए उसके नीचे की छोटी सी जगह में समा जाता है। इसमें से कोई प्रकाश नहीं निकल सकता, जिस वजह से लोग ब्लैक होल नहीं देख सकते हैं। ऐसे में वे अदृश्य माने जाते हैं।

गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में छोड़ता है छाप
एक दशक से ज्यादा लंबे शोध के बाद वैज्ञानिकों ने पाया कि ब्लैक होल में गिरने वाला पदार्थ ब्लैक होल के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में एक छाप छोड़ता है। फिजिक्स लेटर्स बी जर्नल में प्रकाशित एक पेपर में ससेक्स विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जेवियर कैलमेट ने इस छाप को 'क्वांटम हेयर' नाम दिया है। एक और पेपर फिजिकल रिव्यू लेटर्स में प्रकाशित होने वाला है।

पृथ्वी के करीब मिला था ब्लैक होल
वहीं करीब दो साल पहले पृथ्वी के करीब 1000 प्रकाश वर्ष दूर एक ब्लैक होल की खोज की गई थी। शुरू में वैज्ञानिक इसे बड़ी कामयाबी मान रहे थे, लेकिन बाद में इससे अजीबो-गरीब सिग्नल आने लगे। जब जांच की गई तो पता चला कि ये मामला कुछ दूसरा है। जिसे काफी वक्त तक वैज्ञानिक ब्लैक होल मान रहे थे, वो वैंपायर तारा निकला। ये वैंपायर तारा अपने आसपास के तारों को ही निगल जा रहा है।












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