क्या तेल खत्म होने के डर से इतनी विशाल इमारतें बना रहा है सऊदी अरब?
सऊदी अरब देश के ज्यादातर हिस्से में दुनिया की सबसे बड़ी इमारत बनाने की योजना पर काम कर रहा है। 500 बिलियन डॉलर के इस प्रोजेक्ट का नाम NEOM दिया गया है।
रियाद, 01 जूनः सऊदी अरब देश के ज्यादातर हिस्से में दुनिया की सबसे बड़ी इमारत बनाने की योजना पर काम कर रहा है। 500 बिलियन डॉलर के इस प्रोजेक्ट का नाम NEOM दिया गया है। यह NEOM परियोजना सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के दिमाग की उपज है जिसका लक्ष्य करीब 500 मीटर लंबा जुड़वां गगनचुंबी इमारतों का निर्माण करना है जो दर्जनों मीलों तक फैली हो।

सबसे बड़ी इमारतें बनाने का प्लान
इन गगनचुंबी इमारतों में लाल सागर तट से रेगिस्तान में चलने वाले आवासीय मकानों के साथ ही रिटेल और ऑफिस स्पेस भी होगा। NEOM के मौजूदा और पूर्व कर्मचारियों ने बताया है कि डिजाइनरों को आधा मील लंबे प्रोटोटाइप पर काम करने का निर्देश दिया गया था। यदि यह पूरी तरह से आगे बढ़ता है, तो यह संरचना दुनिया की मौजूदा सबसे बड़ी इमारतों से भी बड़ी होगी।

आएगी 500 बिलियन डॉलर तक की लागत
2017 में घोषित NEOM के जरिए सऊदी अरब देश के एक दूरस्थ क्षेत्र को एक हाई-टेक सेमी ऑटोनोमस राज्य में बदलने की प्रिंस मोहम्मद की योजना है जो टॉप क्लास शहरी जीवन की कल्पना करता है। यह विदेशी निवेश को आकर्षित करने और सऊदी अर्थव्यवस्था को तेल की बिक्री पर निर्भरता से दूर करने में मदद करने की उनकी योजनाओं का हिस्सा है। इसके निर्माण के लिए 500 बिलियन डॉलर तक की लागत आ सकती है।

170 किमी फैला होगा प्रोजक्ट
इस नए शहर का क्षेत्रफल करीब 170 किलोमीटर में फैला निओम प्रोजेक्ट के तहत बनने वाले इस शहर का नाम 'द लाइन' होगा। 'द लाइन' शहर की सबसे खास बात ये है कि यहां निजी कारों का उपयोग प्रतिबंधित रहेगा। इस अनोखे शहर में केवल सार्वजनिक वाहनों को इस्तेमाल में लाया जाएगा। इस नए शहर में करीब 10 लाख लोग रहेंगे, वहीं साल 2030 तक इस खास शहर में 3 लाख 80 हजार रोजगार भी पैदा होंगे।

कार्बन उत्सर्जन न के बराबर
जानकारी के मुताबिक आने वाले समय में इस शहर में कार्बन उत्सर्जन न के बराबर होगा। 'द लाइन' शहर को कुछ इस तरह से बनाया जाएगा कि किसी भी जरूरी जगह पर पहुंचने में 20 मिनट से अधिक का समय नहीं लगेगा। इस शहर को बनाने में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस की अहम भूमिका होगी। इससे जुड़ी एक और अनोखी बात ये है कि यहां पर सऊदी अरब की न्यायिक प्रणाली काम नहीं करेगी, बल्कि इस प्रोजेक्ट में निवेश करने वाले इसके लिए इसके लिए अलग कानून तैयार कर सकेंगे।












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