चीन की मदद से न्यूक्लियर प्लांट बनाना चाहता है सऊदी अरब, परमाणु बम बनाने के लिए मचला प्रिंस सलमान का मन?
Saudi Arab Nuclear Plant China: वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका से उदासीन होकर अब सऊदी अरब चीन की मदद से परमाणु संयंत्र बनाने पर विचार कर रहा है। अमेरिकी अखबार ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, कि अमेरिका ने सऊदी अरब के सामने परमाणु प्लांट को लेकर काफी कड़ी शर्तें रखी थीं, जिसके बाद अब सऊदी अरब, चीन के साथ परमाणु परियोजना शुरू करने पर विचार कर रहा है।
चीन की सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी, चाइना नेशनल न्यूक्लियर कॉर्पोरेशन (CNNC) ने कतर और संयुक्त अरब अमीरात के साथ लगती सऊदी अरब की सीमा के पास एक परमाणु संयंत्र के निर्माण का प्रस्ताव सऊदी सरकार को दिया है। अमेरिकी अखबार ने गुरुवार को अनाम सऊदी अधिकारियों का हवाला देते हुए ये रिपोर्ट दी है।

परमाणु प्लांट बनाएगा सऊदी अरब
अमेरिकी अखबार ने कहा है, कि सऊदी अधिकारियों को उम्मीद है, कि चीनी कंपनी की बोली मिलने के बाद बाइडेन प्रशासन पर सऊदी अरब को परमाणु इंडस्ट्री स्थापित करने के लिए मदद देने के लिए प्रेशर बनाएगा। क्योंकि अमेरिका ने सऊदी अरब के सामने कड़ी शर्तें रखी हैं, जिसके मुताबिक सऊदी अरब खुद यूरेनियन को समृद्ध नहीं कर सकता है और ना ही यूरेनियम भंडार का खनन कर सकता है।
अमेरिका को डर है, कि सऊदी अरब भी परमाणु बम बनाने की रेस में शामिल हो सकता है। पिछले कुछ सालों में आई कई रिपोर्ट्स में कहा गया है, कि पाकिस्तान को अरबों डॉलर का बार बार कर्ज देने के पीछे सऊदी अरब का परमाणु बम प्रेम भी है।
वहीं, अमेरिकी अखबार ने कहा है, कि चीन ने सऊदी अरब के सामने इस तरह की कोई शर्तें नहीं रखी है, लिहाजा चीनी कंपनी के ऑफर से नहीं लगता है, कि चीन का मकसद परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकना है।
हालांकि, चीनी कंपनी सीएनएनसी, चीन और सऊदी अरब के विदेश मंत्रालयों ने रॉयटर्स समाचार एजेंसी के इस बाबत पूछे गये सवालों का तुरंत जवाब नहीं दिया है।
सऊदी अरब और चीन ने हाल के वर्षों में अपने संबंधों को गहरा किया है, जिससे वाशिंगटन में चिंता बढ़ गई है।
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पिछले साल दिसंबर में सऊदी अरब का दौरा किया था और इस साल जून में दोनों देशों ने रियाद में दो दिवसीय अरब-चीन व्यापार शिखर सम्मेलन के दौरान 10 अरब डॉलर के निवेश सौदों की घोषणा की है।
शी जिनपिंग, जिनका देश दुनिया का सबसे बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता है, उसने खाड़ी देशों के साथ "बहुआयामी ऊर्जा सहयोग के पैटर्न" को आगे बढ़ाने का वादा किया है।
चीन ने हाल के वर्षों में अपने परमाणु ऊर्जा उद्योग को विदेशों में बेचने की भी कोशिश करनी शुरू कर दी है।
साल 2019 में, एक वरिष्ठ चीनी अधिकारी ने कहा था, कि बीजिंग अगले दशक में अपने "बेल्ट एंड रोड" बुनियादी ढांचे के माध्यम से 30 विदेशी परमाणु रिएक्टरों का निर्माण कर सकता है।
वहीं, बीजिंग ने मध्य-पूर्व क्षेत्र में अपनी राजनयिक उपस्थिति को काफी बढ़ा दिया है, जिसमें इस साल की शुरुआत में एक समझौता शामिल है, जिसने वर्षों की शत्रुता के बाद सऊदी अरब और ईरान के बीच संबंधों को सामान्य कर दिया है।
वहीं, दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादकों में से एक, सऊदी अरब, जीवाश्म ईंधन पर अपनी निर्भरता को कम करने के लिए वर्षों से घरेलू परमाणु ऊर्जा उद्योग के विकास की खोज कर रहा है।
अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन के अनुसार, सऊदी अरब अपनी लगभग सभी बिजली की ज़रूरतें, तेल और प्राकृतिक गैस से उत्पन्न करता है।












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