इन 3 शर्तों पर इजराइल को मान्यता दे सकता है सऊदी अरब, दोनों देशों की दोस्ती कराने में जुटा अमेरिका
ईरान से बढ़ते खतरों के देखते हुए इजरायल ने सऊदी अरब से दोस्ती का प्रयास शुरू कर दिया है। हालिया समय में चीन से सऊदी अरब की नजदीकी बढ़ती देख अमेरिका ने भी इन दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध स्थापित कराने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है।
बीते हफ्ते, न्यूयॉर्क टाइम्स के स्तंभकार थॉमस फ्रीडमैन ने कहा था कि जो बाइडेन इजरायल-सऊदी समझौते को मजबूत बनाने का प्रयास कर रहे हैं। इसमें सऊदी अरब को नाटो जैसी सुरक्षा गारंटी देना और नागरिक परमाणु कार्यक्रम शुरू करने में मदद करना शामिल है।

हालांकि फ्रीडमैन ने बताया कि इसमें फिलिस्तीनियों को सीधे तौर पर शामिल नहीं किया जाएगा, लेकिन इसमें उनके लिए कुछ रियायतें शामिल होंगी। इससे पहले बीते साल सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस सलमान ने कहा था कि वे इजरायल को एक संभावित सहयोगी के रूप में देखते हैं।
इसके साथ ही उन्होंने इजरायल को फिलिस्तीन के साथ संबंध सुधारने पर जोर देने की बात कही। इस बीच इजरायली मीडिया ने दावा किया है कि इजराइल की इंटेलिजेंस एजेंसी मोसाद के चीफ डेविन बार्निया ने पिछले हफ्ते वॉशिंगटन की सीक्रेट विजिट की थी, जहां सऊदी अरब के शीर्ष अधिकारी भी मौजूद थे।
1948 में अपनी स्थापना के बाद से कुछ अरब राज्यों ने इजरायल को मान्यता दी है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रयास से 2020 में संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और मोरक्को ने इजरायल को मान्यता दी थी। ट्रम्प के दबाव के तहत सूडान भी इजरायल के साथ संबंधों को सामान्य बनाने पर सहमत हुआ था।
इन चारों देशों के इजरायल संग हुए समझौते को अब्राहम अकॉर्ड कहा जाता है। इसी समझौते के तहत इन देशों को इजराइल की तरफ से बेहतरीन टेक्नोलॉजी और हथियार तक मिल रहे हैं। इतना ही नहीं, इन देशों के बीच ट्रेड रिलेशन भी काफी मजबूत हुए हैं।
अब बाइडेन चाहते हैं कि इजरायल भी अब्राहम अकॉर्ड में शामिल हो। हालांकि इसके लिए सऊदी अरब ने इजरालय और अमेरिका के समक्ष कुछ शर्तें रख दी हैं। इनमें अमेरिका की एडवांस्ड टेक्नोलॉजी जैसे THAAD मिसालइल सिस्टम हासिल करना, रक्षा सहयोग स्थापित करना और नागरिक उद्येश्य के लिए परमाणु शक्ति हासिल करना भी शामिल है। सऊदी चाहता है कि इजरायल फिलिस्तीन को पूर्ण राज्य का दर्जा भी दे हालांकि यहूदी देश इससे साफ इनकार कर चुका है।












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