G20 Kashmir: जी20 कश्मीर बैठक का सऊदी अरब क्यों कर रहा बहिष्कार?

सऊदी अरब और भारत के संबंध पिछले कुछ सालों में काफी मजबूत हुए हैं। लेकिन चीन और सऊदी अरब भी अब काफी नजदीक आ चुके हैं।

Saudi Arabia boycott G20 meet

G20 Kashmir: भारत ने जी20 टूरिज्म वर्किंग कमेटी की बैठक कश्मीर में कराने का जैसे ही फैसला लिया, ठीक वैसे ही पाकिस्तान हो-हल्ला करने लगा। हालांकि, भारत ने पाकिस्तान की हुल्लड़बाजी पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

लेकिन, बाद में चीन ने कश्मीर को विवादित क्षेत्र बताकर बैठक का बहिष्कार करने का फैसला किया, जिसपर भारत ने साफ शब्दों में कहा, कि भारत अपने देश के अंदर किसी भी हिस्से में कोई भी कार्यक्रम करा सकता है।

यानि, भारत ने बिना कहे, चीन को साफ कह दिया, कि उसकी मर्जी, वो बैठक में आए या नहीं आए। अगस्त 2019 में भारत ने कश्मीर से अनुच्छेद 370 को खत्म कर दिया था, जिसके बाद कश्मीर में इस तरह की पहली सभा हो रही है।

कितने प्रतिनिधि कर रहे हैं शिरकत?

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में हो रही इस बैठक में 29 देशों के 61 प्रतिनिध भाग ले रहे हैं।

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस बैठक को लेकर भारतीय अधिकारियों को उम्मीद है, कि इस बैठक भारत दुनिया को संदेश देने में कामयाब रहेगा, कि भारत ने अनुच्छेद 370 हटाने का जो फैसला किया था, वो एक सही फैसला था और भारत ने कश्मीर की भौगोलिक स्थिति में जो परिवर्तन किया है, उससे क्षेत्र में "शांति और समृद्धि" आई है और यह पर्यटकों के लिए एक सुरक्षित स्थान है।

लिहाजा, 29 देशों के 61 प्रतिनिधियों के पहुंचने के बाद भारत अपना संदेश दुनिया तक पहुंचाने में कामयाब हो गया, क्योंकि ये पहले से ही पता था, कि चीन, तुर्की और कुछ इस्लामिक देश, जो अभी भी पाकिस्तान की तरफ झुके हुए हैं, वो इस बैठक को 'विवादित' बताकर बैठक में आने से इनकार कर सकते हैं।

Saudi Arabia boycott G20 meet

भारत के लिए पश्चिमी देशों का रूख परखना सबसे ज्यादा जरूरी था और अमेरिका समेत तमाम पश्चिमी देशों के प्रतिनिधि ना सिर्फ इस बैठक में पहुंचे हैं, बल्कि वो लगातार ट्वीट करते हुए कश्मीर की तुलना स्वर्ग से कर रहे हैं।

हालांकि, कश्मीरी नेता अभी भी मोदी सरकार पर निशाना साध रहे हैं। जम्मू और कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने दावा किया, कि भारत ने केवल पर्यटन पर एक बैठक आयोजित करने के लिए, इस क्षेत्र को ग्वांतनामो बे जेल के बराबर बना दिया। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की पार्टी पर अपने प्रचार उद्देश्यों के लिए G20 को हाईजैक करने का भी आरोप लगाया।

सऊदी अरब क्यों नहीं हुआ शामिल?

जी20 की कश्मीर बैठक में चीन, तुर्की, इंडोनेशिया जैसे देश शामिल नहीं होंगे, इसका अंदाजा पहले से ही था, लेकिन सऊदी अरब का नहीं आना थोड़ा हैरान करने वाला है।

हालांकि, एक और प्रभावशाली मुस्लिम देश संयुक्त अरब अमीरात इस बैठक में शामिल हो रहा है, जबकि अरब देश के कई निजी कारोबारी और इंन्फ्लुएंसर भी इस बैठक में शिरकत करने पहुंचे हैं, जो लगातार वीडियो ब्लॉग बनाकर कश्मीर की खूबसूरती की तारीफ कर रहे हैं और कश्मीर को भारत का हिस्सा बता रहे हैं।

लेकिन, पिछले कुछ सालों में लगातार भारत के करीब आ रहे सऊदी अरब का इस बैठक में शामिल नहीं होना बताता है, कि सऊदी अरब अभी भी पाकिस्तान की तरफ झुका हुआ है। हालांकि, सऊदी अरब ने पिछले कम से कम पांच सालों से कश्मीर पर अपने रूख में परिवर्तन किया है।

और जब भारत ने कश्मीर से अनुच्छेद 370 को खत्म किया था, उस वक्त भी सऊदी अरब शांत ही रहा था। वहीं, इन सालों में सऊदी अरब ने भारतीय परंपरा योगा को अपनाया है और सऊदी में दर्जनों योगा केन्द्र भी खोले गये हैं। वहीं, सऊदी अरब की स्कूली किताबों में हिन्दू धर्म के बारे में पढ़ाया जाना भी शुरू किया गया है, लेकिन कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है, कि कुछ सालों के बाद सऊदी अरब भी इस तरह के सम्मेलनों में शिरकत करने लगेगा, क्योंकि भारत और सऊदी अरब में संबंध मजबूत हुए हैं।

भारत सऊदी अरब संबंध

साल 2019 में सऊदी अरब ने भारत में अगले कुछ सालों में 100 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की थी, जिसको लेकर काम भी किए जा रहे हैं। सऊदी अरब, भारत में कृषि क्षेत्र, ऊर्जा, टेक्नोलॉजी एंड कम्युनिकेशन और इंडस्ट्री में निवेश कर रहा है।

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    इसके अलावा पीएम मोदी ने जब साल 2019 में सऊदी अरब का दौरा किया था, उसवक्त दोनों देशों के बीच सामरिक भागीदारी परिषद की भी स्थापना की गई थी। हालांकि, भारत ने सऊदी अरब से तेल खरीदना लगातार कम किया और जो सऊदी अरब तेल सप्लाई करने में दूसरे नंबर पर था, वो काफी नीचे जा चुका है।

    हालांकि, सऊदी अरब इसके बाद भी भारत का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार बना हुआ है, जबकि साल 2021 में दोनों देशों ने 'अल-मोहद अल-हिंदी अभ्यास' नाम से पहला नौसेना संयुक्त अभ्यास शुरू किया है, जो दोनों देशों के बीच बनने वाली रणनीतिक साझेदारी को दर्शाता है। लेकिन, जी20 की बैठक में सऊदी का नहीं आना, थोड़ा हैरान करने वाला तो है, लेकिन उम्मीद है, कि आने वाले वक्त में सऊदी अरब भी इस तरह के कार्यक्रमों में शिरकत करेगा।

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