'अमेरिका-कनाडा के मुद्दे एक नहीं', संयुक्त राष्ट्र पर भी बोले एस जयशंकर, कहा- विफल हो रहा संगठन
विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने रविवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की तुलना एक पुराने क्लब से करते हुए कहा कि सुरक्षा परिषद अधिक सदस्य देशों को शामिल करने का इच्छुक नहीं है और वे अपना नियंत्रण छोड़ना नहीं चाहते हैं।
बंगलूरू स्थित एक कार्यक्रम में बोलते हुए एस जयशंकर ने कहा, "सुरक्षा परिषद एक पुराने क्लब की तरह है, जहां ऐसे सेट सदस्य हैं जो पकड़ छोड़ना नहीं चाहते हैं। वे क्लब पर नियंत्रण रखना चाहते हैं। अधिक सदस्यों को शामिल करने के लिए बहुत उत्सुक नहीं हैं, उनकी प्रथाओं पर सवाल उठाने के लिए उत्सुक नहीं हैं।''

विफल हो रहा संयुक्त राष्ट्र
आगे परिषद पर कटाक्ष करते हुए, जयशंकर ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र विफल हो रहा है और कम प्रभावी हो रहा है क्योंकि इजराइल-हमास युद्ध सहित कई प्रमुख मुद्दों पर यह कोई आम सहमति हासिल करने में विफल रहा है।
दुनिया को हो रहा नुकसान
कार्यक्रम में सवालों का जवाब देते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि एक तरह से, यह मानवीय विफलता है लेकिन मुझे लगता है संयुक्त राष्ट्र के व्यवहार से दुनिया को नुकसान हो रहा है। साफतौर पर यह विश्व के लिए नुकसान भरा है। विश्व के सामने आने वाले प्रमुख मुद्दों पर संयुक्त राष्ट्र का प्रभाव बेहद कम होता जा रहा है।
अधिकांश देश सुधार के समर्थक
जयशंकर ने कहा कि मैं वैश्विक भावनाओं को भी बता सकता है हूं। मेरे कहने का मतलब है कि अगर आज ही आप 200 देशों से पूछें कि क्या वह संयुक्ता राष्ट्र में सुधार का समर्थन करते हैं या नहीं, तो मैं आपको आश्वस्त करता हूं कि बड़ी संख्या में सदस्य राष्ट्र इसमें सुधार की वकालत करते हैं।
पाकिस्तान के साथ रिश्ता अपवाद
कार्यक्रम में भारत के पड़ोसी देशों सहित चीन से संबंधित मुद्दों पर जयशंकर ने कहा कि मैं अच्छी तरह से जानता हूं कि कुछ पड़ोसी रिश्तों में एक समस्या है। लेकिन मैं आपको राय दूंगा कि पाकिस्तान के साथ रिश्ता वास्तव में एक अपवाद है।
हर बात पर सहमत नहीं हो सकते पड़ोसी
जयशंकर ने कहा कि आज हमारे पड़ोसियों में से एक के पास वास्तव में भारत के बारे में बोलने के लिए कई अच्छे अनुभव हैं। पड़ोंसियों के साथ स्वाभाविक है कि मतभेद के मुद्दे होंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि हमें ये भी ध्यान में रखना होगा कि पड़ोसी हमारी हर बात पर सहमत नहीं होंगे।
चीन के साथ कुछ मुद्दों पर मतभेद
चीन के साथ संबंधों पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि हमारे रिश्ते आज की तुलना में चीन के साथ बेहतर हों। लेकिन पिछले तीन वर्षों से कुछ चीजें अधिक कठिन हो गई है। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि उन्होंने सीमा पर समझौतों का पालन नहीं करने का फैसला किया है।
इसके साथ ही जयशंकर ने कूटनीति पर बोलते हुए कहा कि कूटनीति यह कहती है कि आपके पडो़सी चाहे कितने भी जिद्दी क्यों न हो, वे कितनी भी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियां ही क्यों न बना दें, आप कभी कभी हार नहीं मानते हैं।
भारत-कनाडा पर भी बोले जयशंकर
संयुक्त राज्य अमेरिका और कनाडा में खालिस्तान समर्थक तत्वों की हत्या की साजिश के हालिया आरोपों का जिक्र करते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रविवार को कहा कि दोनों मुद्दे एक जैसे नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिकियों ने "हमें कुछ विशिष्ट बातें बताईं"।
आरोपों के बीच अंतर बताते हुए उन्होंने कहा कि भारत अन्य देशों द्वारा उठाए गए विशिष्ट मुद्दों पर गौर करने के लिए हमेशा तैयार है। उन्होंने कहा, "केवल कनाडा ही नहीं, अगर किसी भी देश को कोई चिंता है और वह हमें उस चिंता के लिए कुछ इनपुट या कुछ आधार देता है, तो हम उस पर विचार करने के लिए हमेशा तैयार हैं। सभी देश यही करते हैं।"












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