चीन के साथ तनाव भड़काने के लिए भारत को प्रस्ताव दे रहा NATO, पश्चिम पर भड़के रूसी विदेश मंत्री

नाटो को रूस और चीन अपने लिए सैन्य खतरा मानते हैं, क्योंकि नाटो के सिद्धांत के मुताबिक, अगर किसी भी नाटो देश पर हमला होता है, तो वो पूरे नाटो पर हमला माना जाएगा और नाटो के 30 देश एक शक्तिशाली गठबंधन बनाते हैं।

Russia on India-China NATO

Russia on India-China NATO: रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भारत और चीन के बीच बढ़ने वाले तनाव को लेकर नाटो को जिम्मेदार ठहराया है और उन्होंने कहा है, कि चीन के साथ भारत के संबंधों में अतिरक्त समस्याएं पैदा करने के लिए नाटो भारत को प्रस्ताव देने का प्रयास कर रहा है। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने बुधवार को राजधानी मास्को में 2022 में रूसी कूटनीति को लेकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की है, जिसमें उन्होंने नाटो और पश्चिमी देशों पर बड़े आरोप लगाए हैं। वहीं, ये एक दुर्लभ मौका है, जब रूस ने चीन और भारत के तनाव को लेकर सीधा बयान दिया है।

रूसी विदेश मंत्री के बड़े आरोप

रूसी विदेश मंत्री के बड़े आरोप

आपको बता दें, कि ये कोई पहला मौका नहीं है, जब रूस ने भारत और चीन के बीच बढ़े तनाव को लेकर नाटो को जिम्मेदार ठहराया है, बल्कि पिछले महीने भी उन्होंने नाटो पर ही आरोप लगाए थे। हालांकि, इस बार रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोह ने इंडो-पैसिफिक में भी भड़कने वाले तनाव को लेकर नाटो को जिम्मेदार ठहराया है। रूसी विदेश मंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा है, कि "नोटा सिर्फ यूरोपीय महाद्वीप तक की सीमित नहीं है, बल्कि वो नाटो ने जून 2022 के मैड्रिड शिखर सम्मेलन में घोषणा की थी, कि वो इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भी उसकी सैन्य ब्लॉक बनाने की वैश्विक प्रतिबद्धता है।" उन्होंने कहा, कि 'नाटो ने खास तौर पर एशिया प्रशांत का जिक्र किया था और इससे ये साफ हो जाता है, कि वो नाटो ही है, जो भारत और चीन के बीच के संबंध में अतिरिक्त समस्याएं पैदा करने की कोशिश कर रहा है।'

पश्चिमी देशों पर बरसे रूसी विदेश मंत्री

पश्चिमी देशों पर बरसे रूसी विदेश मंत्री

रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान चीन और भारत को रूस का रणनीतिक साझेदार बताया है और उन्होंने कहा, कि तुर्की, ब्राजील, अर्जेंटीना, मिस्र और कई अफ्रीकी देशों का आर्थिक विकास हो रहा है। उन्होंने कहा, कि "उनके विशाल प्राकृतिक संसाधनों को देखते हुए, उनकी विकास करने की क्षमता बहुत बड़ी है। आर्थिक विकास के नए केंद्र उभर रहे हैं। लेकिन, पश्चिम इसे रोकने की कोशिश कर रहा है।" उन्होंने आगे कहा, कि इस काम के लिए डॉलर की भूमिका इस लिहाज से काफी ज्यादा अहम हो जाती है। उन्होंने साफ तौर पर इस बात का जिक्र किया, कि इसी वजह से "हम एससीओ, ब्रिक्स, सीआईएस और ईएईयू के माध्यम से हमारे संपर्कों में, और एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका की सरकारों के साथ हम डॉलर पर निर्भरता से बचने रके लिए बातचीत के नये तरीके बनाने का प्रयास कर रहे हैं"।

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    चीन और रूस को रोकने की कोशिश

    चीन और रूस को रोकने की कोशिश

    रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा, कि "तथाकथित हिंद-प्रशांत क्षेत्र में, पश्चिमी देश रूस और चीन के खिलाफ ब्लॉक बनाने की कोशिश कर रहे है और इसका मकसद असल में समानता, आम सहमति और हितों के संतुलन के आधार पर आसियान के आसपास बनाए गए दशकों पुराने तंत्र और सहयोग के तरीकों को नष्ट करना है" । उन्होंने कहा कि, हालांकि वे इस बारे में चुप रहना पसंद करते हैं और सैन्य गुट का सहारा लेते हैं। उन्होंने कहा, कि साल 1990 से ही रूस-नाटो परिषद और ऑर्गेनाइजेशन फॉर सिक्योरिटी एंड को-ऑपरेशन (OSCE) की अविभाजित सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और इसका मकसद सभी देशों के लिए एक समान सुरक्षा है, ना कि अपनी सुरक्षा के लिए किसी दूसरे देश को आधार बनाया जाए। लिहाजा, अब नाटो का एक अलह ही सिद्धांत बन गया है, जिसके दायरे में अब इंडो-पैसिफिक क्षेत्र भी आ गया है।

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