'रूस के खिलाफ असली युद्ध छेड़ा गया', विक्ट्री डे पर पुतिन ने पश्चिमी देशों को ललकारा, दिखाए विनाशक हथियार
रूस हर साल 9 मई को विजय दिवस मनाता है। 8 मई 1945 को यूरोप ने द्वितीय विश्वयुद्ध खत्म होने की घोषणा की थी, जिसमें रूस को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ था।

Russia Victory Day: रूस आज विक्ट्री डे मना रहा है और इस मौके पर राजधानी मॉस्को में परेड का आयोजन किया गया, जिसमें रूस ने अपने एक से बढ़कर एक घातक और विध्वंसक हथियारों का प्रदर्शन किया है। माना जा रहा है, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पश्चिमी देशों को सामने अपने शक्ति का प्रदर्शन किया है।
वहीं, विक्ट्री डे परेड को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने मंगलवार को कहा, कि रूस के खिलाफ एक "वास्तविक युद्ध" फिर से छेड़ा जा रहा है। द्वितीय विश्व युद्ध में सोवियत संघ की जीत का जश्न मनाने वाले इस कार्यक्रम के दौरान, रूस राष्ट्रपति ने कहा, कि पश्चिम उनके देश को नष्ट करने की कोशिश कर रहा है।
रूस अपना विजय दिवस समारोह रेड स्क्वायर पर मना रहा है, और इस दौरान राष्ट्रपति पुतिन ने आक्रामक भाषण दिया है और कहा, कि "रूस एक शांतिपूर्ण भविष्य देखना चाहता है, और यूक्रेन में रूस के सैन्य अभियान के पीछे पूरा देश खड़ा है।"
अपने भाषण में पुतिन ने कहा, कि पश्चिम 1945 में नाज़ी जर्मनी पर सोवियत संघ की जीत को भूल गया है।
Victory Day : A long column of military equipment headed for Red Square pic.twitter.com/4evZoMP2JC
— Spriter (@Spriter99880) May 9, 2023
खतरनाक हथियारों का प्रदर्शन
विक्ट्री डे के मौके पर रूस में जो परेड निकाला गया है, उसमें विध्वंसक यार्स मिसाइल का प्रदर्शन किया गया है, जिसमें 12 हजार किलोमीटर तक तबाही मचाने की क्षमता है। इसके अलावा, यार्स मिसाइल की सबसे बड़ी खासियत ये है, कि ये एक साथ कई परमाणु बमों को अपने साथ ले जा सकता है।
आपको बता दें, कि रूस में हर साल 9 मई को विजय दिवस मनाया जाता है, जो 1945 में नाज़ी जर्मनी पर सोवियत संघ की विजय की याद दिलाता है, जिसका उपयोग पुतिन ने यूक्रेन पर अपने आक्रमण को सही ठहराने के लिए किया है।
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विजय दिवस पहली बार सोवियत संघ में 9 मई 1945 को मॉस्को के रेड स्क्वायर में विजय परेड के साथ मनाया गया था। और उसके बाद ये रूस की एक वार्षिक परंपरा बन गई। विजय दिवस रूस, बेलारूस, कजाकिस्तान और कई अन्य पूर्व सोवियत राज्यों में एक प्रमुख अवकाश का दिन होता है। यह आमतौर पर सैन्य परेड, आतिशबाजी और अन्य समारोहों द्वारा चिह्नित किया जाता है।
आपको बता दें, किसी दूसरे देशों की तुलना में सोवियत संघ को दूसरे विश्वयुद्ध में सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा था और अनुमान के मुताबिक, सोवियत संघ के करीब 2 करोड़ 70 लाख सैनिक और आम नागरिक मारे गये थे।












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