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PM Modi की पुतिन तक पहुंच से यूक्रेन पर 'परमाणु हमले' का खतरा टला, अमेरिकी रिपोर्ट में दावा

Russia-Ukraine Conflict: रूस और यूक्रेन के बीच दो साल से भयानक जंग चल रही है। रूस ने फरवरी 2022 में शुरू हुई जंग में हिंसक शुरुआत करते हुए यूक्रेन पर जमकर कहर बरपाया था। इस दौरान दुनिया भर के देश रूस के खिलाफ खड़े हो गए थे, हालांकि इस बीच जो भारत ने किया उसका खुलासा अब हुआ है, जिसके बाद देश का कोई भी नागरिक यह कह सकता है कि भारत 'विश्वगुरु' बनने की राह पर है।

दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन के प्रशासन में शामिल दो टॉप अधिकारियों के हवाले से सीएनएन ने अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन तक पहुंच से यूक्रेन पर 'परमाणु हमला' टालने में मदद मिली है।

Russia Ukraine conflict

सीएनएन की एक रिपोर्ट में शनिवार को कहा गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहुंच और विभिन्न देशों के कूटनीतिक प्रयासों ने रूस को यूक्रेन पर "संभावित परमाणु हमले" से रोकने में अहम भूमिका निभाई है।

पुतिन की सेना युद्ध का था प्लान

दो वरिष्ठ अधिकारियों के हवाला से छपि खबर के अनुसार रूस यूक्रेन पर परमाणु हमले के लिए "कड़ी तैयारी" कर रहा था, जब राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की सेना युद्ध के मैदान में 'एक के बाद एक झटके' का सामना कर रही थी।

परमाणु युद्ध को टाला गया

अमेरिकी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पीएम मोदी और कई वैश्विक नेताओं की सक्रियता के कारण परमाणु युद्ध को टाला जा सका। अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पीएम मोदी और चीन जैसे देशों के हस्तक्षेप के कारण पुतिन ने 2022 में यूक्रेन पर परमाणु मिसाइल से हमला करने की अपनी योजना छोड़ दी।

सीएनएन की रिपोर्ट में कहा गया है, "अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि चीनी नेता शी जिनपिंग और भारतीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के आउटरीच और सार्वजनिक बयानों ने संकट को टालने में मदद की।"

खेरसन के बाद हो सकता था बड़ा खतरा

रिपोर्ट में रूस के इस कदम के बारे में 2022 के अंत में पता चला था। जब यूक्रेनी सेनाएं दक्षिण में रूस के कब्जे वाले खेरसन पर आगे बढ़ रही थीं और उन्होंने पूरी रूसी सेना को घेर लिया था, तब अमेरिकी प्रशासन के अंदर यह धारण पैदा हुई कि यह स्थिति परमाणु हथियारों के इस्तेमाल के लिए संभावित ट्रिगर हो सकती है। इसके बाद अमेरिका ने भारत सहित अन्य ग्लोबल साउथ के देशों की मदद मांगी।

वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ने कहा, अमेरिका की गुहार के बाद भारत-चीन सहित अन्य देशों ने रूस से संपर्क किया और दबाव बढ़ाया। सीनियर ऑफिसर ने सीएनएन को बताया, "हमने जो चीजें कीं उनमें से एक न सिर्फ उन्हें सीधे संदेश देना था, बल्कि दृढ़ता से आग्रह करना, दबाव डालना, अन्य देशों को भी ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित करना था, जिनके प्रति वे अधिक ध्यान दे सकते थे।"

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