युद्ध के मुहाने पर रूस-यूक्रेन, राष्ट्रपति बाइडेन ने की आपात बैठक, ब्लैक सागर में वारशिप भेजेगा अमेरिका
यूक्रेन और रसिया के बीच बॉर्डर विवाद कभी भी लड़ाई का रूप ले सकता है। ऐसे में अमेरिका ने ब्लैक सी में वारशिप भेजने का फैसला लिया है।
वाशिंगटन: रूस और यूक्रेन के बीच बॉर्डर विवाद कभी भी युद्ध का रूप धारण कर सकता है और रूस कभी भी यूक्रेन पर हमला कर सकता है। रूस ने यूक्रेन बॉर्डर पर भारी तादाद में घातक हथियार, टैंक्स और 4 हजार से ज्यादा जवान यूक्रेन की सीमा पर भेज दिए हैं और आशंका है की यूक्रेन पर कभी भी रूस हमला कर सकता है। वहीं, रूस के स्वतंत्र रक्षा विशेषज्ञों ने कहा है कि अगर फौरन युद्ध के इस खतरे को नहीं टाला गया तो ये पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लेगा और ऐसा होता हुआ दिख भी रहा है क्योंकि रूस के खिलाफ यूक्रेन की मदद करने के लिए अमेरिका ने वारशिप भेजने का फैसला लिया है।

यूक्रेन की मदद करेगा अमेरिका
अमेरिकी न्यूज चैनल सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक रूस को यूक्रेन पर हमला करने से रोकने के लिए अमेरिका ब्लैक सी में वारशिप भेजने पर विचार कर रहा है और माना जा रहा है कि बहुत जल्द अमेरिका अपना वारशिप ब्लैकशिप में तैनात कर देगा। रिपोर्ट के मुताबिक यूक्रेन बॉर्डर पर रूस लगातार अपने घातक हथियारों की तैनाती कर रहा है और पिछले हफ्ते आई एक वीडियो में देखा गया था कि रूस के सैकड़ों टैंक्स यूक्रेन बॉर्डर की तरफ बढ़ रहे हैं। अगर अमेरिका ब्लैक सी में वारशिप भेजता है तो ये रूस को अमेरिका का दिया हुआ सीधा मैसेज होगा। ऐसे में आशंका इस बात की है कि दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ सकता है। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

रूस के खिलाफ अमेरिका
रूस और अमेरिका पुराने दुश्मन रहे हैं और दोनों एक दूसरे के खिलाफ खड़ा होने का कोई मौका नहीं छोड़ना चाहते हैं। सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकन नेवी पहले से भी रूटीन के मुताबिक ब्लैक सी में अभ्यास करती रहती है लेकिन अभी तक वारशिप नहीं भेजा गया है। ऐसे में अगर यूएस नेवी वारशिफ को ब्लैक सी में डिप्लॉय करती है तो ये मॉस्को को सीधा जबाव माना जाएगा। वहीं, अमेरिकी रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक यूएस नेवी लगातार अपने एयरक्राफ्ट के साथ ब्लैक सी के इंटरनेशनल एयर स्पेस में सैन्य अभ्यास कर रही है और माना जा रहा है कि यूएस नेवी सैन्य अभ्यास की आड़ में क्रीमिया में रसियन नेवी और रूस की सैन्य गतिविधियों पर नजर रखे हुई है। (बॉर्डर पर यूक्रेन की सेना)

अमेरिका है तैयार
अगर अमेरिकन नेवी ब्लैक सी में एयरक्राफ्ट भेजना चाहती है तो इसके लिए उसे 14 दिन पहले नोटिस देकर इजाजत लेनी होगी। 1936 की इंटरनेशनल संधि के हिसाब से इस ब्लैक सी के एक रास्ते पर तुर्की का अधिकार है, लिहाजा अमेरिका को तुर्की से इजाजत लेनी होगी। ऐसे में अभी तक इसका खुलासा नहीं हो पाया है कि क्या अमेरिकन नेवी ने नोटिस भेजा है या नहीं। लेकिन, रिपोर्ट के मुताबिक इस बुधवार को यूएस नेवी ने यूएस बी-1 बॉम्बर्स के साथ एजियन सागर में युद्धाभ्यास किया है। हालांकि, अमेरिका को अभी भी लग रहा है कि रूस सिर्फ अपने सैनिकों को जमा कर रहा है और वो यूक्रेन पर हमला नहीं करेगा लेकिन अमेरिका किसी तरह का रिस्क नहीं लेना चाहता है और अमेरिका को लगता है कि परिस्थितियां किसी भी पल पूरी तरह से बदल सकती है। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

रूस ने हमले से किया इनकार
कई रक्षा विशेषज्ञों ने अगले कुछ हफ्तों में विश्व युद्ध की आशंका जताई है। हालांकि रूस ने कहा है कि वो यूक्रेन पर हमला नहीं करेगा। लेकिन, रूस अभी भी सीमा पर विध्वंसक हथियारों की तैनाती कर रहा है और लगातार टैंक्स यूक्रेन की सीमा पर भेजे जा रहे हैं। इसके साथ ही यूक्रेन की सीमा पर रूसी सैनिकों ने मिलिट्री ट्रेनिंग भी शुरू कर दी है, जिसको लेकर कई रक्षा जानकारों का कहना है कि रूस अचानक यूक्रेन पर हमला कर उसे बर्बाद कर सकता है और दुनिया देखती रह जाएगी। वहीं, जो बाइडेन प्रशासन और इंटरनेशनल कम्यूनिटी ने यूक्रेन और रूस के बीच चरम पर पहुंच चुके विवाद को लेकर चिंता जताई है। (रूस ने S-400 मिसाइल यूक्रेन बॉर्डर पर भेजा)

अमेरिका में आपात बैठक
यूक्रेन-रूस के बीच खतरनाक स्तर पर पहुंच चुके तनाव को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन, विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन, ज्वाइंट चीफ आर्मी के चेयरमैन मार्क मिली और नेशनल सिक्योरिटी एडवाइडजर जैक सुलीवन के साथ आपात बैठक की है। जिसमें यूक्रेन के शीर्ष अधिकारियों से भी बात की गई है। बैठक के बाद जारी बयान में अमेरिका की तरफ से कहा गया है कि ‘यूक्रेन के पूर्वी हिस्से में रूस की आक्रामक नीति की वजह से हम चिंता में हैं, वहीं कई विश्वसनीय रिपोर्ट में रूसी सैनिकों की यूक्रेन बॉर्डर पर मूवमेंट का जानकारी है और हमें जानकारी है कि रूस ने क्रीमिया को अपने कब्जे में ले लिया है'। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि ‘हमने यूक्रेन सीमा पर रूसी आक्रामकता और युद्ध के लिए उकसाने वाले कामों को लेकर रूस से जबाव मांगा है लेकिन सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण ये है कि हमने यूक्रेन का साथ देने का फैसला किया है'। इससे पहले जर्मनी की चांसलर एंजला मर्केल ने भी रूसी राष्ट्रपति से अपली की थी कि वो यूक्रेन बॉर्डर से अपनी सेना को पीछे कर कर लें और बॉर्डर पर तनाव कम कर लें। लेकिन अभी तक रूस सेना कम करने की बजाए बॉर्डर पर सेना की तादाद लगातार बढ़ाने में लगा हुआ है।












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