अशरफ गनी की तुलना में काबुल तालिबान के नियंत्रण में ज्यादा सुरक्षित: रूस
काबुल, 17 अगस्त। अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में पिछले दो दिनों से हर तरफ अफरा-तफरी की तस्वीरें सामने आ रही हैं। काबुल एयरपोर्ट पर लोगों की भारी भीड़ और किसी भी तरह से लोग देश छोड़कर जाने लिए आतुर दिख रहे हैं, इसके लिए लोग अपनी जान की परवाह तक नहीं कर रहे हैं। इस बीच रूस ने तालिबान का समर्थन करते हुए कहा कि अशरफ गनी सरकार की तुलना में काबुल तालिबान के नियंत्रण में बेहतर स्थिति में है।

अशरफ गनी की तुलना में तालिबान बेहतर
अफगानिस्तान में रूस के राजदूत दिमित्री जिरनोव ने तालिबान का समर्थन करते हुए कहा कि तालिबान को रूस में अभी भी आधिकारिक तौर पर आतंकी संगठन माना गया है, उसने पिछले 24 घंटों में अशरफ गनी सरकार की तुलना में काबुल को बेहतर सुरक्षा मुहैया कराई है। रूस के राजदूत के इस बयान को तालिबान के साथ रिश्तों को मजबूत करने की दिशा में एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है। रूस चाहता है कि अफगानिस्तान में फैली अस्थिरता सेंट्रल एशिया में नहीं फैले लिहाजा वह तालिबान के साथ अपने रिश्ते बेहतर करना चाहता है।
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तालिबान के व्यवहार से काफी प्रभावित
जिस रफ्तार से तालिबान ने पूरे अफगानिस्तान पर नियंत्रण हासिल किया उससे ना सिर्फ पूरी दुनिया बल्कि रूस भी चकित है। जब अमेरिकी सैनिक अफगानिस्तान से बाहर जाने की कोशिश कर रहे थे उस बीच तालिबान के लड़ाके बिजली की रफ्तार से पूरे अफगानिस्तान को अपने नियंत्रण में लेने की दिशा में आगे बढ़ रहे थे। दिमित्री जिरनोव ने कहा कि वह तालिबान के व्यवहार से काफी प्रभावित हैं, उनका रवैया अच्छा, सकारात्मक और काफी बेहतर है।

काबुल में स्थिति शांतिपूर्ण
रूस के राजदूत ने कहा कि स्थिति शांतिपूर्ण और अच्छी है और शहर में सबकुछ शांत है। काबुल में स्थिति पिछली सरकार की तुलना में बेहतर है। पूर्व सरकार ताश के पत्तों की तरह से गिर गई, लोगों में अव्यवस्था की भावना थी, किसी भी तरह की सत्ता नहीं थी, लुटेरे सड़कों पर आ गए। बता दें कि अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने देश छोड़ दिया है, हालांकि यह साफ नहीं हो सका है कि वह कहां हैं, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार वह ताजिकिस्तान में हैं।
नियंत्रण में ले लिया गया है।

बिना हथियार के ही काबुल पहुंचे थे तालिबान के लड़ाके
दिमित्री जिरनोव ने कहा कि शुरुआत में तालिबान की टुकड़ी बिना हथियार के ही काबुल में पहुंची और सरकार व अमेरिकी सेना से अपने हथियार डालकर आत्मसमर्पण करने को कहा। लेकिन जब अशरफ गनी देश छोड़कर चले गए तो हथियारबंद तालिबानी काबुल में पहुंचे और शहर में कर्फ्यू लगा दिया। तालिबान ने पहले ही रूसी दूतावास पर सुरक्षाबलों पर नियंत्रण हासिल कर लिया था, जहां तकरीबन 100 कर्मचारी हैं, हम 17 अगस्त को उनके साथ मुलाकात करेंगे।

खत्म हो रहा अमेरिका का वर्चस्व
जिरनोव ने कहा कि तालिबान ने वादा किया है कि वह पुराने समझौते का पालन करेगा और रूस के राजनयिकों को सुरक्षा देगा। तालिबान के व्यवहार के डर से पश्चिमी लोग अभी तक बाहर नहीं आ सके हैं। काबुल में स्कूल फिर से चलने लगे हैं, जिन स्कूलों में लड़कियां पढ़ती थीं वहां भी स्कूल फिर से खुल गए हैं। ब्रिटेन में रूसी राजनयिक ने कहा कि अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना का वापस जाना दर्शाता है कि उनका भूराजनीतिक वर्चस्व अब खत्म हो रहा है।

तालिबान से बेहतर रिश्ते स्थापित करने का अभियान
दूतावास की ओर से कहा गया है कि वास्तविक सच्चाई यह है कि रूस और चीन के बीच मजबूत होते रिश्तों के बीच अमेरिका के अधिपत्य की स्थिति अब घट रही है। रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन के विशेष प्रतिनिधि जामिर काबुलोव ने कहा कि तालिबान के साथ बेहतर रिश्ते बनाने की रूस का अभियान अच्छे नतीजे दे रहा है। पिछले सात साल से हम उनके साथ बेहतर रिश्ते बनाने की कोशिश कर रहे थे। हमे अंदाजा था कि अंत में तालिबान अगर पूरी तरह से सत्ता में नहीं भी आया तो अफगानिस्तान के भविष्य में अहम भूमिका निभाने वाला है।












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