वैक्सीन फॉर्मूले चोरी के दावों को रूस ने नकारा, बताया निराधार

नई दिल्ली, अक्टूबर 12: ब्रिटेन की प्रेस ने दावा किया है कि रूस के जासूसों ने ऑक्सफोर्ड- एस्ट्राजेनेका का फॉर्मूला चुराकर स्पुतनिक-V वैक्सीन तैयार की थी। ब्रिटेन के गृह मंत्रालय ने इसकी पुष्टि तो नहीं की है। अब इस मामले पर रूसी विदेश मंत्री की प्रतिक्रिया आई है। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि ब्रिटिश प्रेस में यह दावा कि रूसी जासूसों ने ब्रिटिश निर्मित ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका वैक्सीन का ब्लूप्रिंट चुरा लिया है, यह एक दम निराधार दावा हैं।

 Russia slams allegation Russian spies stole AstraZeneca formula

ब्रिटिश अखबार 'द सन' ने 10 अक्टूबर छापे गए एक आर्टिकल में आरोप लगाया कि रूस ने ऑक्‍सफर्ड/ एस्‍ट्राजेनेका की कोविशील्‍ड वैक्‍सीन का ब्‍लूप्रिंट चुराया और इसके बाद अपनी स्‍पुतनिक कोरोना वैक्‍सीन का निर्माण किया। यही नहीं एक रूसी एजेंट वैक्‍सीन के विकास के दौरान मौजूद था। उसी ने ऑक्‍सफर्ड की वैक्‍सीन का डिजाइन रूस को दे दिया। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन चाहते थे कि दुनियाभर में फैली इस खतरनाक महामारी का मुकाबला करने की रेस में मॉस्को का नाम सबसे आगे हो।

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    मंगलवार को कज़ाख की राजधानी नूर-सुल्तान में एक संवाददाता सम्मेलन में बोलते हुए लावरोव ने कहा, जहां तक हमारे ब्रिटिश और अन्य पश्चिमी सहयोगियों का सवाल है, मुझे नहीं लगता कि कोई इन निराधार बयानों को गंभीरता से लेगा। पहले भी कई बेबुनियाद आरोप लग चुके हैं। रूस की TASS समाचार एजेंसी के अनुसार, लावरोव ने कहा, एस्ट्राजेनेका के शॉट्स के साथ दुर्लभ साइड-इफेक्ट्स की खबरें आई हैं, वैक्सीन प्राप्त करने के बाद रक्त के थक्के जमने की खबरें सामने आई थीं। जबकि स्पुतनिक वी के साथ ऐसा कोई मामला नहीं हुआ है।

    लावरोव ने कहा कि, मुझे लगता है कि दिलचस्पी रखने वाला हर कोई अपने लिए निष्कर्ष निकालेगा। यह विवाद तब सामने आया है कि, जब यूनाइटेड किंगडम और रूस अपने टीकाकरण अभियानों के विपरीत छोर पर हैं। 12 वर्ष से अधिक आयु के लगभग 85 प्रतिशत लोगों को यूके में कोरोना वैक्सीन की पहली खुराक मिल चुकी है, जबकि लगभग 80 प्रतिशत लोगों को दोनों शॉट मिल चुके हैं। जबकि रूस में सिर्फ 33 प्रतिशत लोगों को वैक्सीन की दोनों डोज दिया जा चुका है।

    दरअसल, सितंबर महीने में रूस ने प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल द लैसेंट में स्पुतनिक वैक्सीन को लेकर शुरूआत में किए गये क्लिनिकल ट्रायल को लेकर रिपोर्ट प्रकाशित की थी, जिसमें बताया गया था कि रूसी वैज्ञानिकों ने आखिर किस तरह से स्पुतनिक वैक्सीन बनाई है, लेकिन मेडिकल जर्नल द लैसेंट में प्रकाशित रिपोर्ट ने ब्रिटिश वैज्ञानिकों को चौंका दिया। क्योंकि, स्पुतनिक वैक्सीन बनाने में जिस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया था, वही टेक्नोलॉजी ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने इस्तेमाल किया था। रिसर्च में शामिल रूसी वैज्ञानिकों ने कहा कि वैक्सीन ने टीका लेने वाले सभी लोगों में एंटीबॉडी का निर्माण किया और किसी को भी स्वास्थ्य संबंधी कोई नुकसान नहीं हुआ। रूसी वैक्सीन को लेकर लिखा गया था कि, वैक्सीन लेने से शरीर में एंटीबॉडी का निर्माण होता है और रूसी वैक्सीन कोरोना वायरस के ऊपर काफी प्रभावी है। हालांकि, इस रिसर्च में सिर्फ 76 लोगों को ही शामिल किया गया था और ज्यादातर स्वयंसेवकों की उम्र 20 से 30 साल के बीच थी।

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