Russia-North Korea: आज उत्तर कोरिया के दुर्लभ दौरे पर जा रहे पुतिन, दो दुश्मनों के महामिलन से US की नींद उड़ी
Vladimir Putin North Korea Visit: रूस के व्लादिमीर पुतिन आज उत्तर कोरिया का दुर्लभ दौरा करने वाला हैं और 24 सालों के बाद ये पहली बार है, जब कोई रूसी राष्ट्रपति उत्तर कोरिया की दौरा कर रहा है। पुतिन उत्तर कोरिया का दौरा उस वक्त कर रहे हैं, जब पिछले साल मॉस्को की यात्रा के दौरान किम जोंग उन ने पुतिन को उत्तर कोरिया आने का न्योता दिया था।
रूसी राष्ट्रपति भवन क्रेमलिन ने कहा है, कि "डीपीआरके के राज्य मामलों के अध्यक्ष किम जोंग उन के निमंत्रण पर व्लादिमीर पुतिन 18-19 जून को डेमोक्रेटिक पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया की एक मैत्रीपूर्ण राजकीय यात्रा करेंगे।"

उत्तर कोरिया के दुर्लभ दौरे पर पुतिन
यह व्लादिमीर पुतिन की उत्तर कोरिया की दूसरी यात्रा होगी। उन्होंने पहली बार जुलाई 2000 में राष्ट्रपति बनने के बाद पहले वर्ष में इस गुप्त राष्ट्र का दौरा किया था, जहां उन्होंने किम जोंग-उन के पिता किम जोंग-इल से मुलाकात की थी। यह मुलाकात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई विश्व नेताओं के इटली में जी7 शिखर सम्मेलन में जुटने के कुछ दिनों बाद हो ही है। मई में पुतिन ने चीन की राजकीय यात्रा की थी।
लेकिन, व्लादिमीर पुतिन उत्तर कोरिया की अपनी इस यात्रा से दुनिया को क्या संदेश देना चाहते हैं, इस यात्रा से हम क्या उम्मीद कर सकते हैं, आइये जानते हैं।
उत्तर कोरिया-रूस का रिश्ता कैसा है?
कम्युनिस्ट उत्तर कोरिया का गठन शीत युद्ध के शुरुआती दिनों में सोवियत संघ के समर्थन से हुआ था। उत्तर कोरिया ने बाद में चीन और सोवियत संघ की व्यापक सहायता से 1950-1953 के कोरियाई युद्ध में दक्षिण कोरिया और उसके अमेरिकी और संयुक्त राष्ट्र सहयोगियों के साथ मजबूत लड़ाई लड़ी थी।
उत्तर कोरिया दशकों तक सोवियत संघ की सहायता पर बहुत ज्यादा निर्भर था, और 1990 के दशक में सोवियत संघ के पतन ने उत्तर कोरिया को बुरी स्थिति में धकेल दिया और उस दौरान आए अकाल में वो अकेला पड़ गया, जिससे लाखों लोगों की मौत हुई थी।
प्योंगयांग के नेताओं ने अक्सर बीजिंग और मॉस्को का इस्तेमाल एक-दूसरे को संतुलित करने के लिए करने की कोशिश की है। 2011 में सत्ता में आए किम के शुरू में रूस और चीन के साथ अपेक्षाकृत अच्छे संबंध थे, जो दोनों संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ उत्तर कोरिया पर उसके परमाणु परीक्षणों को लेकर सख्त प्रतिबंध लगाने में शामिल हो गए थे।
लेकिन, अब रूस ने उत्तर कोरिया पर नए प्रतिबंधों का विरोध करने में चीन का साथ दिया है, और यूएनएससी में अमेरिका के प्रस्ताव को वीटो कर रोक दिया है। साल 2006 में उत्तर कोरिया पर पहली बार यूएनएससी ने एक साथ होकर उसके खिलाफ प्रतिबंध लगाए थे, लेकिन मौजूदा जियो-पॉलिटिक्स ने सारे समीकरण बदल दिए हैं और अब चीन, खासकर रूस उत्तर कोरिया की खुलकर मदद करने लगा है।
2017 में उत्तर कोरिया ने परमाण बम का आखिरी परीक्षण किया था और उसके बाद किम जोंग उन ने रूस के साथ संबंध सुधारने के लिए काफी काशिशें की हैं और उन्होंने 2019 में रूसी शहर व्लादिवोस्तोक में पहली बार पुतिन से मुलाकात की थी।
फरवरी 2022 में जब रूस ने यूक्रेन पर आक्रमण किया, तो उत्तर कोरिया ने सार्वजनिक तौर पर रूस का साथ दिया। उत्तर कोरिया वो पहला देश है, जिसने यूक्रेनी क्षेत्र को अलग राज्य बनाने की रूसी घोषणा का ना सिर्फ समर्थन किया था, बल्कि उसे मान्यता भी दी थी।
किम जोंग उन ने किया था उत्तर कोरिया का दौरा
पिछले साल सितंबर में जब किम जोंग उन ने रूस की यात्रा की थी, उस वक्त पुतिन ने रूस के सुदूर पूर्व में वोस्तोचनी अंतरिक्ष केन्द्र में किम जोंग का स्वागत किया था और सहयोग और समर्थन को लेकर दोनों देशों में कई अहम समझौते हुए थे।
गहरे होते संबंधों पर जोर देते हुए तत्कालीन रूसी रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु ने जुलाई 2023 में प्योंगयांग का दौरा किया और हथियारों की एक प्रदर्शनी को देखा था, जिसमें उत्तर की प्रतिबंधित बैलिस्टिक मिसाइलें शामिल थीं। बाद में वह किम के बगल में खड़े हुए और सैन्य परेड के दौरान मिसाइलों को सलामी दी। पिछले साल किम और पुतिन की मुलाकात के बाद से दोनों देशों के बीच कई समझौते हो चुके हैं।

पुतिन की उत्तर कोरिया दौरे से क्या हैं उम्मीदें?
सीएनएन ने रूसी सरकारी मीडिया के हवाले से कहा है, कि क्रेमलिन ने कहा है, कि वह उत्तर कोरिया के साथ "सभी संभावित क्षेत्रों में" साझेदारी बनाने की उम्मीद करता है। इस बीच, किम ने पिछले हफ्ते रूस के राष्ट्रीय दिवस पर पुतिन को दिए संदेश में देशों के "सार्थक संबंधों और करीबी दोस्ती" की कामना की थी।
रोडोंग सिनमुन अखबार के मुताबिक, किम ने कहा था, कि "हमारे लोग रूसी सेना और लोगों के सफल काम को पूरा समर्थन और एकजुटता देते हैं।"
किम ने कहा था, कि दोनों देशों के बीच "एक-दूसरे के साथ अटूट संबंध" हैं।
पुतिन के इस दौरे में सबसे ज्यादा हथियारों को लेकर बातचीत होने की संभावना है।
अमेरिका और यूरोपीय देशों ने उत्तर कोरिया पर यूक्रेन के खिलाफ इस्तेमाल के लिए रूस को हथियार ट्रांसफर करने के आरोप लगाए हैं।
2 जनवरी को यूक्रेनी शहर खार्किव में गिरी एक मिसाइल का मलबा उत्तर उत्तर कोरियाई ह्वासोंग-11 सीरिज की मिसाइल का था, जिसे रूसी क्षेत्र से लॉंच किया गया था। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, यूनाइटेड नेशंस सेंक्शन कमेटी के ऑब्जर्वर्स ने सुरक्षा परिषद समिति को इसकी रिपोर्ट दी थी।
द इकोनॉमिस्ट ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से दावा किया है, कि उत्तर कोरिया ने सितंबर से रूस को लगभग 11,000 हथियारों से भरे कंटेनर भेजे थे। इनमें 50 लाख राउंड आर्टिलरी शेल और ह्वासोंग-11 सीरिज की बैलिस्टिक मिसाइलें शामिल हैं।
उस समय किम जोंग उन ने व्लादिवोस्तोक में पुतिन से मुलाकात की थी।
दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है, कि प्योंगयांग ने अगस्त से फरवरी तक करीब 6,700 कंटेनर रूस भेजे हैं, जिनमें 152 मिमी आर्टिलरी शेल के 30 लाख राउंड और 122 मिमी मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर के 500,000 राउंड हैं। यूक्रेन के एक अधिकारी ने कहा, कि हथियार अच्छी क्वालिटी के नहीं हैं, लेकिन जब तक रूस अपना उत्पादन बढ़ा रहा है, उस वक्त तक उत्तर कोरिया के हथियार काम आ रहे हैं।
बदले में मास्को ने भी सितम्बर से अब तक प्योंगयांग को लगभग 9,000 कंटेनर भेजे हैं।
अक्टूबर 2023 में द हिंदू ने सैटेलाइट इमेज के हवाले से बताया था, कि उत्तर कोरिया-रूस सीमा के पास तुमांगंग रेल सुविधा पर मालवाहक रेलगाड़ी यातायात में भारी उछाल आया है।
उत्तर कोरिया परमाणु हथियारों के डिजाइन, इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलों के लिए वाहन और उपग्रहों, पनडुब्बियों और हाइपरसोनिक हथियारों से संबंधित तकनीक चाहता है। ऐसा माना जा रहा है, कि रूस ने जहाजों से बैलिस्टिक मिसाइलों के लिए स्पेयर पार्ट्स उत्तर कोरिया को भेज सकता है। हालांकि, अभी कहा जा रहा है, कि रूस ने उत्तर कोरिया को भोजन और ईंधन की सप्लाई कर रहा है।
द इकोनॉमिस्ट के अनुसार, पुतिन ने किम जोंग उन को एक रूसी लग्जरी लिमो भी गिफ्ट में दी थी।
द हिंदू ने बताया है, कि उत्तर कोरिया और रूस संवेदनशील क्षेत्रों में सहयोग करने के बारे में बातचीत कर रहे हैं।
पुतिन ने उत्तर कोरिया को जासूसी उपग्रह विकसित करने में मदद करने की पेशकश की है।
ऐसी अटकलें भी हैं, कि रूस, चीन और उत्तर कोरिया त्रिपक्षीय नौसैनिक अभ्यास कर सकते हैं।
हालांकि, मॉस्को और प्योंगयांग ने भोजन के बदले हथियारों की सप्लाई के आरोपों से इनकार किया है, लेकिन पिछले साल दोनों देशों ने सैन्य संबंधों को गहरा करने की कसम खाई थी।
शोइगु ने पिछले साल रूसी मीडिया को बताया था, कि मॉस्को उत्तर कोरिया के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास करने पर चर्चा कर रहा है। उन्होंने इंटरफैक्स समाचार एजेंसी से कहा था, कि "क्यों नहीं.. वो हमारे पड़ोसी हैं और रूस में एक पुरानी कहावत है, कि आप अपने पड़ोसियों को नहीं चुनते हैं और अपने पड़ोसियों के साथ शांति और सद्भावना से रहना बेहतर है।"
रूस-उत्तर कोरिया संबंधों पर क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?
एक्सपर्ट्स का मानना है, रूस और उत्तर कोरिया के बीच बढ़ते संबंधों को हल्के में लेना एक बड़ी गलती होगी।
अमेरिकी थिंक-टैंक स्टिमसन सेंटर की जेनी टाउन ने द इकोनॉमिस्ट से कहा, कि "इसे केवल हथियारों के सौदे के रूप में सोचना एक गलती है।"
लेख में तर्क दिया गया है, कि प्योंगयांग, पश्चिम के साथ रूस की बड़ी लड़ाई में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कुछ लोगों का तर्क है, कि बुराई की एक नई धुरी चीन, उत्तर कोरिया और रूस के तौर पर ऊभर रही है।
भले ही ऐसा न हो, लेकिन उत्तर कोरिया निश्चित तौर पर पश्चिम और चीन और रूस के बीच के टकराव का फायदा उठाने की कोशिश कर रहा है। अमेरिकी थिंक-टैंक कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस के अंकित पांडा ने द इकोनॉमिस्ट से कहा, कि "यह शीत युद्ध की समाप्ति के बाद से उत्तर कोरिया के लिए सबसे बड़ा रणनीतिक अवसर है।"
द हिंदू में लिखते हुए हर्ष वी पंत ने भी तर्क दिया है, कि प्योंगयांग मास्को के लिए बेहद मूल्यवान हो सकता है।
पंत ने लिखा है, कि "आर्थिक चुनौतियों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से जूझ रहे उत्तर कोरिया के लिए, रूस ऊर्जा और परिवहन जैसे क्षेत्रों में विकास के लिए एक संभावित रक्षक के रूप में उभरा है, और यहां तक कि प्योंगयांग की भोजन की संकट को भी दूर कर रहा है।"
पंत ने भविष्यवाणी की है, कि 2024 में दोनों देशों के बीच संबंध और मजबूत होंगे।












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