डॉनेस्क और लुहांस को रूस ने दी मान्यता, पूर्वी यूक्रेन में भेजी सेना
मॉस्को, 22 फरवरी। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने डॉनेस्क और लुहांस को स्वतंत्र क्षेत्र के तौर पर मान्यता दे दी है। साथ ही पूर्वी यूक्रेन के इस हिस्से में अपनी सेना को भी भेज दिया है। यहां पर रूस द्वारा समर्थिक विद्रोही 2014 से यूक्रेन की सेना से लड़ रहे हैं। लेकिन जिस तरह से रूसी राष्ट्रपति ने उन्हें मान्यता दी है उससे यूक्रेन के साथ शांति वार्ता को एक तरह से खत्म माना जा रहा है। यही नहीं रूसी सेना को इन दोनों क्षेत्रों में शांति स्थापित करने के भी निर्देश दिए गए हैं। रूस के इस फैसले से पश्चिमी देशों को इस बात का डर है कि अब रूस इन क्षेत्रों से यूक्रेन में प्रवेश करने की कोशिश करेगा। रूस के इस फैसले के बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमर जेलेंस्की ने अपने संबोधन में कहा कि रूस द्वारा उठाया गया यह कदम यूक्रेन की संप्रभुता का उल्लंघन है। रूस के फैसले से यूक्रेन की सीमा पर कोई असर नहीं पड़ेगा और अंतरराष्ट्रीय सीमा पहले की ही तरह रहेगी।
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हालांकि अभी तक यह साफ नहीं है कि रूसी सेना किस तरह से यहां विद्रोही गुटों का समर्थन करेगी, लेकिन अगर रूसी सेना बॉर्डर पार करती है तो यह पहली बार होगा जब रूस की सेना ने आधिकारिक रूप से इस क्षेत्र में प्रवेश किया होगा। रूसी संसद भी विद्रोही संगठनों के साथ हुए समझौते का समर्थन कर सकती है, जिससे मास्को को डोनेस्क और लुहांस में सैन्य बेस स्थापित करने का अधिकार मिल जाएगा।
हाल के सालों की बात करें तो इन दोनों ही क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोगों को रुसी पासपोर्ट दिया गया है। ऐसे में पश्चिमी देशों को इस बात का भी डर है कि रूस अपने नागरिकों की रक्षा के नाम पर इस क्षेत्र में प्रवेश करेगा। दोनों ही क्षेत्रों की स्वतंत्रता को मान्यता देने के बाद राष्ट्रपति पुतिन ने अपने संबोधन में कहा कि आधुनिक यूक्रेन को सोवियत रूस ने बनाया था। पुतिन ने इस क्षेत्र को प्राचीन रूसी जमीन करार दिया। पुतिन ने कहा कि सोवित यूनियन जब 1991 में टूटा तो रूस के साथ लूटपाट की गई। उन्होंने यूक्रेन को अमेरिका का उपनिवेश तक कहा, जहां अमेरिका कठपुतली सरकार चला रहा है। लोग मौजूदा नेतृत्व में काफी संघर्ष कर रहे हैं।












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