अपने तो अपने होते हैं: संकट में अमेरिका बना स्वार्थी तो दोस्त रूस ने भारत की मदद के लिए खोला दिल
रूस ने भारत को ऑक्सीजन और रेमडेसिवीर देने का ऑफर दिया है जबकि अमेरिका ने वैक्सीन बनाने का कच्चा माल देने पर अभी तक विचार नहीं किया है।
नई दिल्ली/मॉस्को/वॉशिंगटन, अप्रैल 25: कोरोना वायरस ने भारत के चैन-ओ-सुकून को छीन लिया है और इस वक्त भारत को सही में मदद की जरूरत है लेकिन जब भारत को सबसे ज्यादा मदद की जरूरत है, उस वक्त अमेरिका सबसे बड़ा स्वार्थी देश बन गया है। लेकिन, कहते हैं ना अपने तो अपने होते हैं, भले ही पिछले कुछ सालों में भारत और रूस के संबंधों में दूरियां आई हैं, फिर भी रूस दिल खोलकर कोरोना वायरस से निपटने में भारत की मदद कर रहा है। भारत के अस्पतालों में बेड की भारी दिक्कत है और ऑक्सीजन की कमी ने तो हजारों लोगों की जान ही ले ली है। भारत को इस विकराल समय में ऑक्सीजन के साथ साथ कई ऐसी दवाएं चाहिए जिससे क्रिटिकल मरीजों की जिंदगी बचाई जा सके, ऐसे वक्त में रूस ने भारत के लिए एक बार फिर से अपना दिल खोल दिया है।

रूस ने खोला दिल
कोरोना वायरस संक्रमण की रफ्तार को काबू में करने के लिए भारत को वैक्सीनेशन की जरूरत है। लेकिन, अभी जो परिस्थिति है उसमें भारत को भारी मात्रा में दवा और ऑक्सीजन चाहिए, ताकि लोगों की जान बचाई जा सके। भारत में ऑक्सीजन की किल्लत के चलते हाहाकार मचा हुआ है और इन सबके बीच रूस ने भारत को मदद का प्रस्ताव दिया है। रूस ने भारत को ऑक्सीजन कंसंट्रेटर्स और रेमडेसिवीर देने का प्रस्ताव दिया है। सरकारी सूत्रों ने कहा है कि भारत सरकार रूस से ऑक्सीजन कंसंट्रेटर्स और रेमडेसिवीर दवा खरीदने की योजना बना रही है। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक अगले 15 दिनों के अंदर भारत सरकार ऑक्सीजन कंसंट्रेटर्स और रेमडेसिवीर इंजेक्शन की खरीदारी रूस से शुरू कर देगा। रूस ने भारत को कहा है कि वो हर हफ्ते 3 से 4 लाख रेमडेसिवीर इंजेक्शन की सप्लाई भारत को कर सकता है और अगर भारत को और ज्यादा इंजेक्शन की जरूरत होगी तो रूस जरूरत के मुताबिक इंजेक्शन की सप्लाई भी कर सकता है।
जल्द रूस से आएगा ऑक्सीजन
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक भारत सरकार ने रूस से 50 हजार मिट्रिक टन ऑक्सीजन खरीदने की प्लानिंग कर रही है। ये मेडिकल ऑक्सीजन जल्द ही समुन्द्री रास्ते से होते हुए भारत भेजा जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक भारत सरकार के विदेश मंत्री एस. जयशंकर, इंडस्ट्री मिनिस्टर पीयूष गोयल और भारतीय राजनयिकों के बीच हुई बैठक के बाद रूस से ऑक्सीजन कंसंट्रेटर्स खरीदने का फैसला लिया गया है। इस वक्त भारत में कंसंट्रेटेड ऑक्सीजन उत्पादन करने की क्षमता करीब 6000 मिट्रिक टन के करीब है, जिसे 7800 मिट्रिक टन तक बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। रूस ने उस वक्त भारत की मदद करना शुरू किया है, जब मदद के नाम पर अमेरिका ने चुप्पी साध रखी थी। लेकिन जब अमेरिका के ऊपर इंटरनेशनल प्रेशर पड़ना शुरू हुआ है, तब अमेरिका ने भारत को सपोर्ट करने की बात कही है।

अमेरिका ने दिखाया स्वार्थ
अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कहा है कि अमेरिका भारत को कोरोना वायरस से संबंधित मेडिकल सामान और बाकी के दूसरे जरूरी सामान देकर मदद करेगा। एंटनी ब्लिंकन ने ट्वीटर पर कहा है कि अमेरिका अपने पार्टनर्स के साथ कोरोना वायरस के खिलाफ नजदीक से काम कर रहा है, अमेरिका लगातार भारत सरकार से संपर्क में है और जल्द भी भारत को मेडिकल सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। एंटनी ब्लिंकन ने ट्वीटर पर कहा कि 'खतरनाक कोरोना महामारी के वक्त हम दिल से भारतीय लोगों के साथ हैं, हम भारत सरकार के अंदर मौजूद अपने पार्टनर्स से लगातार संपर्क में हैं और हम जल्द ही भारत को मेडिकल सामानों की सप्लाई करेंगे ताकि भारतीय लोग और लोगों की सेवा में लगे मेडिकल हीरोज को मदद मिले।

वैक्सीन बनाने के कच्चे माल पर सवाल
अमेरिका ने भले ही भारत को मेडिकल सामान देने की बात कही हो लेकिन अभी तक अमेरिका ने वैक्सीन बनाने के कच्चे सामान के इम्पोर्ट को लेकर कोई फैसला नहीं किया है। इसी हफ्ते अमेरिका भारत को वैक्सीन बनाने का कच्चा सामान देने से साफ मना कर चुका है। व्हाइट हाउस ने एक सवाल के जबाव में कहा कि अमेरिका पहले अपने लोगों को वैक्सीन लगाएगा और उसके बाद किसी और के बारे में सोचेगा। ये वही अमेरिका है, जिसे पिछसे साल भारत ने भारी तादात में हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दवा की सप्लाई की थी। लेकिन, अमेरिका भारत के अहसानों को भूल गया है। वहीं सवाल ये भी उठ रहे हैं कि अमेरिका भारत को वास्तव में अपना दोस्त मानता है या फिर वो सिर्फ चीन को काउंटर करने के लिए भारत का इस्तेमाल करना चाहता है? 1 मई से भारत में 18 साल से उम्र के सभी लोगों को कोरोना वैक्सीन की डोज दी जाएगी और वैक्सीन बनाने के लिए भारत को कच्चा सामान चाहिए, जिसे भारत को देने पर अमेरिका ने पाबंदी लगा रखी है। सीरम इंस्टीट्यूट के सीईओ अदार पूनावाला ने राष्ट्रपति जो बाइडेन को ट्वीट कर वैक्सीन बनाने का कच्चा माल देने की अपील की थी लेकिन अमेरिका की तरफ से आश्वासन तक नहीं दिया गया।












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