15 वर्ष की मेहनत के बाद तैयार हुई रूस की खतरनाक परमाणु मिसाइल गायब, अब शुरू होगा सर्च ऑपरेशन!
मॉस्को। अमेरिकी इंटेलीजेंस सूत्रों की ओर से दावा किया गया है कि रूस अपनी एक परमाणु मिसाइल की तलाश के लिए बड़े स्तर पर सर्च ऑपरेशन लॉन्च करने वाला है जो कई माह तक चले टेस्ट्स के बाद गायब हो गई है। बताया जा रहा है कि यह गायब हुई मिसाइल रूस के उस नए सिस्टम का हिस्सा है जिसका जिक्र राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने इस वर्ष की शुरुआत में किया था। एक मार्च को पुतिन ने देश के नाम वार्षिक संदेश दिया था। इसी संदेश में उन्होंने कहा था कि रूस ने एक नए तरह की परमाणु ताकत से लैस मिसाइल डेवलप की है जिसकी रेंज असीमित है।

इंटरसेप्ट नहीं की जा सकती है मिसाइल
व्लादिमिर पुतिन के मुताबिक यह नए तरह का हथियार अनिश्चितकाल तक आसमान में रह सकता है और इसी वजह से यह दुनिया के किसी भी हिस्से में मौजूद टारगेट को निशाना लगा सकता है। इसके अलावा पुतिन ने यह दावा भी किया था इस नए सिस्टम को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह किसी भी मिसाइल डिफेंस सिस्टम से बच सकती है। इसलिए इसे कभी भी इंटरसेप्ट नहीं किया जा सकता है। विशेषज्ञों की मानें तो रूस इस नए सिस्टम पर 15 वर्षों से भी ज्यादा समय से काम कर रहा था। यह नया मिसाइल सिस्टम गैस से चलने वाले इंजन पर आधारित है और इन्हीं इंजन के प्रयोग से मिसाइन टेक ऑफ करती है। लेकिन इसके तुरंत बाद ही परमाणु ताकत से चलने वाले इंजन इस मिसाइल को इसके लक्ष्य तक पहुंचने के लिए गाइड करते हैं।

चार बार की गई थी टेस्ट
पुतिन के दावों से अलग अमेरिकी इंटेलीजेंस सूत्रों की ओर से दावा किया गया था कि रूस ने कभी इस तरह की कोई मिसाइल टेस्ट ही नहीं की है। अमेरिकी दावों के मुताबिक रूस की मिलिट्री ने इस तरह की मिसाइलों को नवंबर 2017 से इस वर्ष फरवरी में चार बार टेस्ट किया था। सभी चारों मिसाइलें अपने तय लक्ष्य पर पहुंचने से पहले ही क्रैश हो गई थीं। ऐसे में पुतिन का इस तरह की मिसाइलों के परीक्षण के बारे में दावा भी पूरी तरह से निराधार साबित हुआ, ऐसा अमेरिकी सूत्रों का कहना है। वहीं रूस की ओर से इस बात से पूरी तरह से इनकार कर दिया गया था उसकी मिसाइलें क्रैश हो गई थी।

कैसा होगा रूस का यह सर्च ऑपरेशन
अब अमेरिकी न्यूज नेटवर्क सीएनबीसी की ओर से कहा गया है कि रूस इन मिसाइलों में से एक मिसाइल की तलाश के लिए सर्च ऑपरेशन लॉन्च करने वाला है। कहा गया है कि यह मिसाइन नवंबर 2017 में आर्कटिक महासागर में गायब हो गई थी। माना जा रहा है कि मिसाइल बारेंट्स सी में क्रैश हो गई है जो नॉर्वे और रूस के बीच स्थित है। सीएनबीसी ने अमेरिकी इंटेलीजेंस रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा है कि रूस के सर्च मिशन में तीन जहाज शामिल होंगे। एक जहाज उन उपकरणों से लैस होगा जो मिसाइल में इंस्टॉल रेडियोक्टिव मैटेरियल को हैंडल कर सकेंगे। अमेरिकी मीडिया की मानें तो इस सर्च ऑपरेशन की समयसीमा निर्धारित नहीं है। वहीं रूस की ओर से इस पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है।












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