बुरे फंसे ऋषि सुनक! पत्नी अक्षता मूर्ति को फायदा पहुंचाने के मामले में जांच शुरू
ऋषि सुनक की वाइफ अक्षता मूर्ति एक चाइल्ड केयर फर्म में इनवेस्टर हैं। अब इस बात की जांच की जाएगी कि क्या सुनक ने चाइल्डकेयर कंपनी में अपनी पत्नी की हिस्सेदारी को ठीक से घोषित किया है या नहीं।

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक पर संसदीय निगरानी जांच का सामना कर रहे हैं। सुनक पर आरोप है कि उन्होंने जानबूझकर अपनी पत्नी की फर्म को फायदा पहुंचाने के लिए नियम बनाए और उसकी जानकारी को छुपाया है। विपक्ष लंबे वक्त से जांच की मांग करता रहा है।
दरअसल ऋषि सुनक की वाइफ अक्षता मूर्ति एक चाइल्ड केयर फर्म में इनवेस्टर हैं। ऐसी आशंका जताई जा रही है कि चाइल्ड केयर की नई स्कीम बताते वक्त ऋषि ने जो डिक्लेरेशन ऑफ इंट्रेस्ट्स दिया है उसमें नियमों का उल्लंघन किया।पिछले हफ्ते गुरुवार को कमिश्नर डेनियल ग्रीनबर्ग ने ये जांच शुरू की है।
आयुक्त की वेबसाइट पर अपडेट में कहा गया है कि यह जांच कोड ऑफ कंडक्ट के पेराग्राफ 6 से संबंधित है, जो कि सांसदों के लिए अपडेट किया गया है। इस कोड ऑफ कंडक्ट के अंतर्गत कहा गया है कि पीएम सुनक को सदन या इसकी समितियों की किसी भी कार्यवाही में किसी भी प्रासंगिक हित की घोषणा करने में हमेशा खुला और स्पष्ट होना चाहिए।
सुनक की पत्नी, अक्षता मूर्ति, कोरू किड्स में शेयरधारक के रूप में लिस्टेड हैं, यह 6 निजी चाइल्डकेयर प्रदाताओं में से एक है। सुनक पर आरोप है कि उन्होंने अपने बजट में घोषित नीति से पारिवारिक सदस्य के लाभान्वित होने पर पूरी जानकारी नहीं दी।
बता दें कि सुनक की पायलट योजना के तहत चाइल्ड माइंडर्स बनने के लिए लोगों को इंसेटिव्ज दिए जाएंगे। यह 1,200 पाउंड उन लोगों को दिए जाएंगे जो कि एजेंसी के जरिए इस स्कीम में काम करेंगे।
इससे पहले 28 मार्च को ऋषि सुनक ने संपर्क समिति के सामने चाइल्डकेयर में बदलाव के बारे में बोलते समय अपनी पत्नी के हितों का उल्लेख नहीं किया था। उनसे लेबर पार्टी की सांसद कैथरीन मैककिनेल ने पूछा था कि क्या उनके पास घोषित करने के लिए कुछ है।
इसके जवाब में सुनक ने कहा था कि नहीं, उन्होंने अपने सारी बात कह दी हैं। इसके बाद मैकनेल ने इस मामले को कमिश्नर के सामने उठाया। सुनक ने अपनी पत्नी के शेयरहोल्डिंग वाली बात रजिस्टर ऑफ इंट्रेस्ट के दौरान जारी नहीं की, जो कि बतौर सांसद उन्हें करनी चाहिए थी।
हालांकि डाउनिंग स्ट्रीट ने तर्क दिया है कि यह जरूरी नहीं है, क्योंकि पीएम सुनक ने मंत्रिस्तरीय हितों के एक अलग रजिस्टर में इसका हवाला दिया था।
यदि जांच में सुनक दोषी पाए जाते हैं तो उन्हें मांफी मांगना पड़ सकता है। इसके साथ ही उनके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। उन्हें पद से निलंबित या निष्कासित भी किया जा सकता है।












Click it and Unblock the Notifications