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पहली बार ब्रिटेन पर राज करेगा ‘हिंदुस्तानी, ऋषि सुनक बने ब्रिटेन के पहले भारतीय मूल के प्रधानमंत्री

ब्रिटेन से भारतीयों के लिए बड़ी खबर आ रही है। ऋषि सुनक ब्रिटेन के पहले गैर-श्वेत, भारतीय मूल के प्रधानमंत्री बन गए हैं।

ब्रिटेन से भारतीयों के लिए बड़ी खबर आ रही है। ऋषि सुनक ब्रिटेन के पहले गैर-श्वेत, भारतीय मूल के प्रधानमंत्री बन गए हैं।पूर्व वित्त मंत्री ऋषि सुनक ब्रिटेन के 57वें प्रधानमंत्री होंगे। सोमवार शाम उनके नाम का आधिकारिक एलान कर दिया गया है। इससे पहले कंजर्वेटिव पार्टी का नेता बनने की दौड़ से पूर्व प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने अपना नाम वापस ले लिया था। इसके बाद से ही सुनक का नाम लगभग तय हो गया था। अंतिम समय में हाउस ऑफ कामंस की नेता पेनी मोरडौंट ने भी अपना नाम वापस ले लिया और उसके बाद इस रेस में अकेले सुनक बच गए थे। इसके बाद सुनक के नाम पर अंतिम मुहर लगी। वे ब्रिटेन के पहले भारतीय मूल के और पहले गैर-श्वेत प्रधानमंत्री बनेंगे।

सुनक को 200 सांसदों का मिला समर्थन

सुनक को 200 सांसदों का मिला समर्थन

सुनक को करीब 200 सांसदों का समर्थन मिला। पेनी के पास यह आंकड़ा बस 25 था हालांकि पेनी ने अंतिम वक्त तक इसका खुलासा नहीं किया और पेनी की टीम लगभग 90 सांसदों के समर्थन का दावा करती रही। ऋषि सनुक 28 अक्टूबर को पीएम पद के लिए शपथ ग्रहण करेंगे। इसके बाद 29 अक्टूबर को कैबिनेट का ऐलान किया जाएगा। ऋषि के पूर्वज गुंजरावाला से संबंध रखते हैं और उनकी पत्नी अक्षता मूर्ति भारत के जाने-माने उद्योगपति और इन्फोसिस के सह-संस्थापक नारायण मूर्ति की बेटी है। इंग्लैंड में ऋषि सुनक का राजनीतिक करियर बेहद शानदार रहा है। पिछली बार भी सुनक प्रधानमंत्री बनने की दौड़ में सबसे आगे थे, लेकिन अंतिम समय लिज ट्रस को पीएम चुन लिया गया। आइये ऋषि सुनक के जीवन को करीब से जानते हैं...

ऋषि सुनक का भारत से गहरा नाता

ऋषि सुनक का भारत से गहरा नाता

सुनक का भारत से गहरा नाता रहा है। ऋषि के दादा-दादी भारत से जाकर अफ्रीका में बस गए थे। इसके बाद ऋषि के पिता अफ्रीका से ब्रिटेन में जाकर बसे। वहीं ऋषि सुनक के नाना पंजाब से तंजानिया शिफ्ट हो गए। वहीं, ऋषि की मां का परिवार भी तंजानिया से ब्रिटेन में जाकर रहने लगा। ब्रिटेन में ही इनके माता-पिता की शादी हुई। ऋषि का जन्म 12 मई 1980 को इंग्लैंड के साउथम्पैटन में हुआ था। ऋषि सुनक की पढ़ाई ब्रिटेन के विंचेस्‍टर कॉलेज से स्‍कूल से हुई है। यह देश के सबसे प्रतिष्ठित स्‍कूलों में शामिल है।

स्टैनफोर्ड में अक्षिता से हुई मुलाकात

स्टैनफोर्ड में अक्षिता से हुई मुलाकात

स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद ऋषि ऑक्‍सफोर्ड यूनिवर्सिटी पहुंचे जहां उन्होंने लिंकन कॉलेज से फिलोसॉफी और इकॉनोमिक्स की पढ़ाई की। इसके बाद ऋषि अमेरिका की स्‍टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी पहुंचे और उन्होंने एमबीए की पढ़ाई पूरी की। जब सुनक स्टैनफोर्ड में एमबीए की पढ़ाई कर रहे थे तभी उनकी मुलाकात अक्षता से हुई थी। अक्षिता, इंफोसिस के को-फाउंडर नारायण मूर्ति की बेटी हैं। दोनों में प्यार हुआ और फिर दोनों ने साल 2009 में शादी कर ली। 42 साल के ऋषि सुनक की दो बेटियां हैं कृष्णा और अनुष्का।

2014 में राजनीति में सुनक की एंट्री

2014 में राजनीति में सुनक की एंट्री


राजनी‍ति में आने से पहले उन्‍होंने गोल्‍डमैन शैक्‍स जैसी कुछ बहुचर्चित कंपनियों में काम किया था। ऋषि सुनक के पास इनवेस्टमेंट फर्म, एनालिस्ट का अनुभव भी है। राजनीति में सुनक की एंट्री साल 2014 में हुई। 2015 में उन्होंने रिचमंड से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। ब्रिटेन की पीएम रही थेरेसा मे की कैबिनेट में ऋषि ने कनिष्ठ मंत्री के पद पर काम किया। कंजर्वेटिव पार्टी में रहकर सुनक ने ब्रेक्जिट का पुरजोर समर्थन कर जल्दी ही टोरी पार्टी में जगह बना ली। उन्होंने यूरोपीय संघ से ब्रिटेन के बाहर होने की बोरिस जॉनसन की रणनीति का समर्थन किया था।

कोरोना काल में आर्थिक मंदी से ब्रिटेन को उबारा

कोरोना काल में आर्थिक मंदी से ब्रिटेन को उबारा


2017 में उन्होंने एक बार फिर जीत मिली। साल 2018 में सुनक पहली बार थेरेसा मे की सरकार में मंत्री बने। इसके बाद वे 2019 से 2020 तक सुनक ट्रेजरी के मुख्य सचिव रहे। कोरोना काल में देश को आर्थिक मंदी से सफलतापूर्वक उबारने के कारण सुनक का खूब नाम हुआ। आप यदि थोडी भी विश्व राजनीति की समझ रखते होंगे तो आपको बताने की जरूरत नहीं है कि ब्रिटेन की राजनीति में सुनक का सिक्का चलता है। सुनक यूके के सबसे अमीर सांसदों में शुमार हैं और उनकी संपत्ति 7300 करोड़ रुपये से भी ज्यादा की है। वहीं उनकी पत्नी अक्षता तो अपने पति सुनक से भी कहीं ज्यादा रईस हैं।

पंजाबी खत्री समुदाय से हैं ऋषि सुनक

पंजाबी खत्री समुदाय से हैं ऋषि सुनक


ऋषि सुनक का परिवार पंजाबी खत्री समुदाय से संबंध रखता है। ऋषि के दादा रामदास सुनक गुंजरावाला में रहते थे जो अभी पाकिस्तान का हिस्सा है। गुंजरावाला हिंदू-मुस्लिम के बीच संघर्ष चरम पर था ऐसे में रामदास ने सन् 1935 में गुंजरावाला छोड़ दिया और वो बेहतर जीवन की तलाश में केन्या की वर्तमान राजधानी नैरोबी आ गए। वहीं उनकी पत्नी सुहाग रानी सुनक, गुंजरावाला से दिल्‍ली आ गई थीं और उनके साथ उनकी सास भी थी। रामदास जब नैरोबी में कुछ जम गए तो उन्होंने अपने परिवार को वहां बुला लिया।

नैरोबी में हुआ ऋषि के पिता का जन्म

नैरोबी में हुआ ऋषि के पिता का जन्म

रामदास नैरोबी में क्लर्क का काम करते थे। अपनी प्रतिभा के बलबूते वह वहां एडमिनिस्‍ट्रेटिव ऑफिसर के पद पर भी पहुंचे। रामदास और सुहाग रानी के छह बच्‍चे थे जिसमें तीन बेटे और तीन बेटियां थीं। ऋषि के पिता यशवीर सुनक इनमें से ही एक थे। यशवीर सुनक का जन्‍म नैरोबी में सन् 1949 में हुआ था। साल 1966 में यशवीर नैरोबी से लिवरपूल आ गए। उन्होंने यहां लिवरपूल यूनिवर्सिटी से मेडिसिन की पढ़ाई की। फिलहाल वो साउथ हैंपटन में रहते हैं। वहीं रामदास सुनक की तीनों बेटियों ने भारत में ही पढ़ाई की है।

हिन्दू धर्म में गहरी आस्था

हिन्दू धर्म में गहरी आस्था


सुनक को जब 2020 में ट्रेजरी का मुख्य सचिव बनाया गया, तब एक सांसद के रूप में अपनी शपथ के दौरान सुनक ने भगवत गीता पर हाथ रखकर शपथ ली थी। इस दौरान उन्होंने साबित किया वह अपनी विरासत को अपनाने से कतराते नहीं हैं। इस पर एक ब्रिटिश अखबार ने उनसे भगवत गीता पर हाथ रख शपथ लेने का कारण पूछा तो उन्‍होंने अपने ही अंदाज में इसका जवाब दिया। ऋषि ने कहा, 'मैं अब ब्रिटेन का नागरिक हूं लेकिन मेरा धर्म हिंदू है। भारत मेरी धार्मिक और सांस्‍कृतिक विरासत है। मैं गर्व से कह सकता हूं कि मैं एक हिंदू हूं और हिंदू होना ही मेरी पहचान है।' अपनी डेस्‍क पर भगवान गणेश की प्रतिमा रखने वाले सुनक धार्मिक आधार पर बीफ त्‍यागने की अपील भी कर चुके हैं। वो खुद भी बीफ नहीं खाते हैं।


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