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तानाशाही के खिलाफ पहले सम्मेलन पर लोकतंत्र बचाने की अपील

Provided by Deutsche Welle

वॉशिंगटन, 10 दिसंबर। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने दुनिया के सौ से अधिक देशों के नेताओं से अपील की है कि लोकतंत्र को मजबूत करें, मानवाधिकारों और स्वतंत्रताओं की रक्षा करें क्योंकि मौजूदा दौर में एकाधिकारवादी सरकारें लोकतंत्र को बड़ी चुनौती दे रही हैं.

अपनी तरह के इस पहले सम्मेलन में बाइडेन ने कहा, "हम इतिहास में एक दोराहे पर खड़े हैं. क्या हम अधिकारों और लोकतंत्र को पीछे खिसक जाने देंगे? या हम मिलकर एक सोच और हौसले के साथ इंसान और इंसानी अधिकारों को आगे की ओर ले जाएंगे?"

पहला ऐसा सम्मेलन

अमेरिका ने पहली बार 'समिट ऑफ डेमोक्रेसी' नाम से इस सम्मेलन का आयोजित किया है जिसमें दुनियाभर से सौ से ज्यादा नेताओं को बुलाया गया है. इस सम्मेलन को बाइडेन के फरवरी में किए एक ऐलान से जोड़कर देखा जा रहा है जिसमें उन्होंने कहा था कि वह अमेरिका को दुनिया के नेतृत्व की भूमिका में फिर से ले जाएंगे और तानाशाही शासकों को करारा जवाब देंगे.

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111 देशों के नेताओं को संबोधित करते हुए बाइडेन ने कहा, "लोकतंत्र कोई हादसा नहीं है. हमें इसे हर पीढ़ी के साथ बदलना होता है. मेरे विचार से यही हमारे वक्त की सबसे बड़ी चुनौती है." बाइडेन ने चीन या रूस जैसे देशों की ओर सीधे कोई उंगली नहीं उठाई, लेकिन कई विशेषज्ञों का मानना है कि यह सम्मेलन ऐसी ही ताकतों के खिलाफ जनमत बनाने का एक जरिया है. इस समझ की वजह यह भी है कि रूस और चीन के नेताओं को इस सम्मेलन में नहीं बुलाया गया है.

यह बात कई मंचों से कही जा चुकी है कि दुनिया इस वक्त सबसे ज्यादा देशों में लोकतंत्र पर खतरा मंडरा रहा है. हाल ही में इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर डेमोक्रेसी ऐंड इलेक्टोरल असिस्टेंस ने एक रिपोर्ट में कहा था कि म्यांमार, अफगानिस्ता और माली में हुए तख्तापलट ने तो लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाया ही है, हंगरी, ब्राजील और भारत भी उन देशों में शामिल हैं जहां लोकतंत्र की जड़ें कमजोर हुई हैं.

कमजोर होते लोकतंत्र

लोकतांत्रिक मूल्यों पर काम करने वाली संस्था आइडिया के मुताबिक ऐसे देशों की संख्या जिनमें लोकतांत्रिक मूल्य खतरे में हैं इस वक्त जितनी अधिक है उतनी कभी नहीं रही. इसकी एक रिपोर्ट के मुताबिक लोक-लुभावन राजनीति, आलोचकों को चुप करवाने के लिए कोविड-19 महामारी का इस्तेमाल, अन्य देशों के अलोकतांत्रिक तौर-तरीकों को अपनाने का चलन और समाज को बांटने के लिए फर्जी सूचनाओं का प्रयोग जैसे कारकों के चलते लोकतंत्र खतरे में है.

आइडिया ने 1975 से अब तक जमा किए गए आंकड़ों के आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की है. रिपोर्ट कहती है, "पहले से कहीं ज्यादा देशों में अब लोकतंत्र अवसान पर है. ऐसे देशों की संख्या इतनी अधिक पहले कभी नहीं रही, जिनमें लोकतंत्र में गिरावट हो रही हो."

रिपोर्ट में ब्राजील, भारत और अमेरिका जैसे स्थापित लोकतंत्रों को लेकर भी चिंता जताई गई है. रिपोर्ट कहती है कि ब्राजील और अमेरिका में राष्ट्रपतियों ने ही देश के चुनावी नतीजों पर सवाल खड़े किए जबकि भारत में सरकार की नीतियों की आलोचना करने वालों को प्रताड़ित किया जा रहा है.

अमेरिका ने कहा है कि दुनिया में लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए सरकार कांग्रेस के साथ मिलकर काम कर रही है ताकि 42.44 करोड़ डॉलर की राशि उपलब्ध करवाई जा सके. इस राशि का इस्तेमाल कई कदमों के लिए किया जाएगा जिनमें स्वतंत्र न्यू मीडिया को मजबूत करना भी शामिल है.

वीके/एए (रॉयटर्स, एएफपी)

Source: DW

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