पृथ्वी से टकराया रिकॉर्ड संख्या में रहस्यमयी तरंगों का गुच्छा, ब्रह्मांड का रहस्य सुलझाने के करीब वैज्ञानिक?

वैज्ञानिकों ने रिकॉर्ड संख्या में गुरुत्वाकर्षण बलों को पृथ्वी से टकराते हुए रिकॉर्ड किया है। क्या वैज्ञैानिकों ने लगा लिया है रहस्यमयी ब्रह्मांड का पता?

नई दिल्ली, नवंबर 09: हमारी वैज्ञानिक क्षमता जैसे-जैसे बढ रही है, वैसे वैसे हम ब्रह्मांड के रहस्यों को भी सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं तो दूसरी तरह हमारा ब्रह्मांड हमारे लिए रहस्यमयी पहेलियों के जाल भी सामने ला दे रहा है। वैज्ञानिकों ने इस बार रिकॉर्ड संख्या में रहस्यमयी गुरुत्वाकर्षण की तरंगों को रिकॉर्ड किया है, लेकिन ये तरंगे इतनी रहस्यमयी हैं, कि इसने वैज्ञानिकों को उलझा कर रख दिया है।

आइंस्टीन ने की थी गुरुत्वाकर्षण की खोज

आइंस्टीन ने की थी गुरुत्वाकर्षण की खोज

साल1916 वो साथ था, जब अल्बर्ट आइंस्टीन ने पहली बार गुरुत्वाकर्षण तरंगों के अस्तित्व की भविष्यवाणी की थी और थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी के जरिए गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत को साबित किया था। उस घटना के एक सौ साल से ज्यादा बीत चुके हैं और एक बार फिर से गुरुत्वाकर्षण की पहेली ने वैज्ञानिकों को चकार दिया है। वैज्ञानिकों ने पहली बार इन तरंगों के सबसे बड़े समूह में से एक का पता लगाया है जो पृथ्वी से टकराकर गुजरे हैं।

2015 में पहली बार चला था पता

2015 में पहली बार चला था पता

साल 2015 में वैज्ञानिकों ने पहली बार अंतरिक्ष से आने वाली तरंगों के बारे में पता लगाया था, जो पृथ्वी से टकराकर गुजरीं थी, लेकिन इस बार वैज्ञानिकों ने एक साथ 35 अलग अलग गुरुत्वाकर्षण तरंकों को पृथ्वी से टकराते हुए रिकॉर्ड किया है, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड भी है। इसके साथ ही 2015 से लेकर अब तक 90 गुरुत्वाकर्षण तरंक पृथ्वी से टकरा चुके हैं। वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि, इन 35 तरंगों में से 32 तरंक ब्लैक होल के के विलय के बाद निकले हैं, जबकि बाकी के तीन तरंग न्यूट्रॉन तारे और ब्लैक होल के टकराने से उत्पन्न हुई हैं।

ऑस्ट्रेलियाई वैज्ञानिकों ने लगाया पता

ऑस्ट्रेलियाई वैज्ञानिकों ने लगाया पता

एआरसी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर ग्रेविटेशनल वेव डिस्कवरी (ओजग्राव) के ऑस्ट्रेलियाई रिसर्चर्स और वैज्ञानिकों की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने इन तरंगों के बारे में पता लगाया है। पता चला है कि नवंबर 2019 से मार्च 2020 के बीच ये तरंक पृथ्वी से टकराए हैं। इन तरंगों को लेकर रिसर्च लिखने वाले को- राइटर डॉ. हन्ना मिडलटन ने कहा कि, "हर नया रिसर्च हमें आश्चर्य में घेर रहा है और हम नया नया आश्चर्यजनक खोज कर पा रहे हैं। तीसरे ऑब्जर्वेशन में गुरुत्वाकर्षण तरंग का पता लगाना एक रोजमर्रा की बात बन गई, लेकिन मुझे अभी भी लगता है कि प्रत्येक पहचान रोमांचक है!"

गुरुत्वाकर्षण तरंगें क्या हैं?

गुरुत्वाकर्षण तरंगें क्या हैं?

गुरुत्वाकर्षण तरंगें अंतरिक्ष में उत्पन्न होने वाली अदृश्य तरंगें होती हैं, जिसे पहली बार अल्बर्ट आइंस्टीन ने 100 साल पहले खोजा था। आइंस्टीन ने भविष्यवाणी की थी, कि जब दो पिंड-जैसे ग्रह या तारे-एक दूसरे की परिक्रमा करते हैं तो कुछ खास होता है। उनका मानना था कि इस तरह की हलचल से अंतरिक्ष में लहरें उठ सकती हैं। ये तरंगें तालाब की लहरों की तरह फैलती हैं, जब किसी तालाब में पत्थर को फेंका जाता है। LIGO के अनुसार, सबसे मजबूत गुरुत्वाकर्षण तरंगें प्रलयकारी घटनाओं जैसे ब्लैक होल के टकराने, सुपरनोवा (अपने जीवनकाल के अंत में बड़े पैमाने पर विस्फोट होने वाले तारे) और न्यूट्रॉन सितारों के टकराने से उत्पन्न होती हैं। अन्य तरंगों की भविष्यवाणी न्यूट्रॉन सितारों के घूमने के कारण होती है जो पूर्ण क्षेत्र नहीं हैं, और संभवतः बिग बैंग द्वारा बनाए गए गुरुत्वाकर्षण विकिरण के अवशेष भी होती हैं।

लहरों के सबसे बड़े जत्थे का पता चला

लहरों के सबसे बड़े जत्थे का पता चला

वैज्ञानिकों ने संभावित न्यूट्रॉन स्टार-ब्लैक होल जोड़े या ब्लैक होल और एक अज्ञात वस्तु के बीच विलय से निकलने वाली तरंगों के वर्तमान बैच का पता लगाया है, जो या तो एक हल्का ब्लैक होल या एक भारी न्यूट्रॉन स्टार हो सकता है। जबकि अन्य तरंगे ब्लैक होल की एक विशाल जोड़ी से निकले थे, जो एक दूसरे की परिक्रमा कर रहे थे, जिसका संयुक्त द्रव्यमान सूर्य से 145 गुना भारी था। वहीं कुछ तरंगें ब्लैक होल की एक जोड़ी से एक-दूसरे की परिक्रमा करने से आईं, जिनका संयुक्त द्रव्यमान सूर्य से 112 गुना भारी है, जो उल्टा घूमता हुआ प्रतीत होता है।

वैश्विक स्तर पर रिसर्च

वैश्विक स्तर पर रिसर्च

ब्लैक होल की एक 'प्रकाश' जोड़ी, जिनका वजन एक साथ सूरज से केवल 18 गुना है। ये तरंगें ब्लैक होल और न्यूट्रॉन सितारों के विभिन्न गुण दिखाती हैं जो कुछ मामलों में आकाशगंगाओं को शक्ति प्रदान कर सकती हैं। वैज्ञानिकों ने लेजर इंटरफेरोमीटर ग्रेविटेशनल-वेव ऑब्जर्वेटरी (LIGO), इटली में विरोग और जापान की KAGRA वेधशालाओं में डिटेक्टरों के माध्यम से पृथ्वी पर आने वाली तरंगों के इस बड़े हिस्से का पता लगाने में कामयाबी हासिल की है।

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