पाकिस्तान में पेट्रोल-डीज़ल के 130 के पार पहुँचने की वजह क्या है?
पाकिस्तान में तेल की क़ीमतों में लगातार बढ़ोतरी जारी है. एक बार फिर शनिवार को पेट्रोल और डीज़ल के दामों में बदलाव हुआ और इस बार पेट्रोल के दामों में 10.49 रुपये प्रति लीटर और डीज़ल के दामों में 12.44 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई.
वित्त मंत्रालय ने अधिसूचना जारी कर बताया है कि नए दाम 16 अक्तूबर से लागू हो गए हैं. इसके बाद पाकिस्तान में पेट्रोल के दाम 137.79 रुपये प्रति लीटर और डीज़ल के दाम 134.48 रुपये प्रति लीटर हो गए हैं.
इसी तरह से केरोसिन के दामों में भी 10.95 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है जिसके बाद इसके दाम अब 110.26 रुपये प्रति लीटर हो गए हैं.
पाकिस्तान में पेट्रोलियम ईंधन के रेट लगातार बढ़ रहे हैं और इस समय पेट्रोल, डीज़ल और केरोसिन 100 रुपये प्रति लीटर से ऊपर बिक रहा है.
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इमरान सरकार ने क्या बताई वजह
मंत्रालय ने अपनी अधिसूचना में ईंधन के दामों के बढ़ने के लिए अंतरराष्ट्रीय बाज़ार का हवाला दिया है. इसमें कहा गया है कि अक्तूबर 2018 के मुक़ाबले इस समय अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल के दाम 85 डॉलर प्रति बैरल से अधिक हो चुके हैं. ख़ासतौर से बीते कुछ महीनों में ऊर्जा की मांग तेज़ी से बढ़ी है, जिसके बाद सप्लाई में काफ़ी मुश्किलें आ रही हैं.
सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते दामों के दबाव के बीच उसने पेट्रोलियम लेवी और सेल्स टैक्स को सबसे कम रखते हुए जनता को 'भारी राहत' दी है.
हालांकि, पाकिस्तान की सरकार ने इस महीने की शुरुआत में पेट्रोल के दामों में चार रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी. पाकिस्तान में रोज़ाना के इस्तेमाल की चीज़ों के दामों में भी लगातार बढ़ोतरी जारी है, जिनमें जीवन रक्षक दवाएं और बिजली भी शामिल है.
अब ईंधन के दामों में बढ़ोतरी के बाद आम आदमी पर महंगाई की और भारी पड़ रही है.
सूचना राज्य मंत्री फ़र्रुख़ हबीब ने तेल के दामों में बढ़ोतरी का बचाव करते हुए कहा है कि अंतरराष्ट्रीय तेल के दामों से अगर तुलना की जाए तो पाकिस्तान में यह बहुत कम हैं. उन्होंने तेल के दामों में बढ़ोतरी के लिए कोविड-19 महामारी के कारण पैदा हुई महंगाई को ज़िम्मेदार ठहराया.
मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि बीते 15 दिनों में पेट्रोल के दाम पूरी दुनिया में 13.5 फ़ीसदी तक बढ़े हैं लेकिन पाकिस्तान में इनमें सिर्फ़ 8 फ़ीसदी की वृद्धि की गई है.
"इस घाटे को सरकार सह रही है. हमने अपने राजस्व पर पड़ने वाले अरबों रुपये के असर को चुना है लेकिन यह सुनिश्चित किया है कि लोगों को दाम बढ़ने का कम से कम दबाव सहना पड़े."
"कोयले से बिजली बनती है और बहुत से उद्योगों में इसका इस्तेमाल होता है और कोयले के दामों में 50 से 250 डॉलर की बढ़ोतरी हुई है. हम खाद्य तेल आयात करते हैं. इसके दामों में भी 500 से 1200-1300 डॉलर की बढ़ोतरी हुई है. यह एक अभूतपूर्व महंगाई है जो पूरी दुनिया में जारी है."
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"कोरोना वायरस के कारण परिस्थितियां बदली हैं और पूरी दुनिया में इसी वजह से दाम ऊपर जा रहे हैं."
हबीब ने संयुक्त राष्ट्र के फ़ूड एंड एग्रीकल्चरल ऑर्गनाइज़ेशन की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि 1970 के बाद महंगाई में यह सबसे बड़ी बढ़ोतरी है.
उन्होंने महंगाई नियंत्रित करने की सरकार की योजनाओं के बारे में बताते हुए कहा कि वर्तमान ऊर्जा संकट के लिए पिछली सरकार ज़िम्मेदार है.
आईएमएफ़ है ईंधन के दाम बढ़ने की वजह?
तेल और बिजली के दामों में बढ़ोतरी के लिए दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) को भी ज़िम्मेदार ठहराया जा रहा है. दरअसल IMF ने व्यापक आर्थिक ढांचे को लागू न करने को लेकर पाकिस्तान का आर्थिक पैकेज रोक लिया है.
जुलाई 2019 में IMF ने 39 महीनों की व्यवस्था के तहत एक एक्सटेंडेड फ़ंड फ़ैसिलिटी (EFF) की व्यवस्था पाकिस्तान के लिए की थी. इसमें पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए 6 अरब डॉलर का आर्थिक सहयोग पाकिस्तान को दिया जाना था.
लेकिन IMF ने नीतियों में तब्दीली न करने को लेकर पाकिस्तान का छठा और अंतिम आर्थिक पैकेज रोक लिया था. इस पैकेज को जारी कराने के लिए इस समय पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय का प्रतिनिधिमंडल अमेरिका में जमा है.
वित्त मंत्री शौकत तरीन ने शुक्रवार को कहा था कि वित्त सचिव वॉशिंगटन में हैं जहां वो IMF से बात करेंगे और अगले कुछ दिनों में पाकिस्तान और IMF साथ मिलकर एक संयुक्त बयान जारी करेंगे और क़र्ज़ को जारी करने की घोषणा करेंगे.
वित्त मंत्री ने यह भी जानकारी दी है कि पाकिस्तान ने IMF के साथ ऊर्जा, गैस टैरिफ़ और टैक्स कलेक्शन को लेकर आंकड़े साझा किए हैं.
पाकिस्तान की सरकार ने हाल ही में बिजली के टैरिफ़ में 1.39 रुपये प्रति यूनिट की बढ़ोतरी की और तेल के दामों में भी 10.49 रुपये प्रति लीटर और डीज़ल के दामों में 12.44 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है. यह माना जा रहा है कि IMF को आर्थिक आंकड़े दिखाने के लिए ऐसा किया गया है.
हालांकि ऊर्जा मंत्री हम्माद अज़हर ने शनिवार को इन आरोपों को ख़ारिज करते हुए कहा कि पेट्रोल के दामों में बढ़ोतरी IMF की वजह से नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में बढ़ती तेल की मांग की वजह से है.
उन्होंने कहा कि पेट्रोलियम उत्पादों के बढ़ते दाम सरकार के लिए सबसे मुश्किल काम है.
उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार ने पेट्रोलियम लेवी को 30 फीसदी से घटाकर 5.5 फीसदी कर दिया है.
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तेल के दामों में बढ़ोतरी की और क्या वजहें हैं?
पाकिस्तान सरकार एक ओर जहां तेल के दामों में बढ़ोतरी की वजह अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल के बढ़ते दामों को बता रहा है. वहीं दूसरी ओर आर्थिक आंकड़े इसके लिए पाकिस्तान की ख़स्ता अर्थव्यवस्था को ज़िम्मेदार बता रहे हैं.
चालू वित्त वर्ष के शुरुआती तीन महीनों में पाकिस्तान का तेल आयात बिल 97 फ़ीसदी तक बढ़ गया है.
पिछले वर्ष की तुलना में यह जहां 2.32 अरब डॉलर था वहीं यह अब 4.59 अरब डॉलर हो गया है और इसके लिए अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में बढ़ते तेल के दाम और पाकिस्तानी रुपये की गिरावट को ज़िम्मेदार बताया जा रहा है.
पाकिस्तान के सांख्यिकी ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल की तुलना में पाकिस्तान आयात होने वाले पेट्रोलियम पदार्थों के दामों में 93.21 फ़ीसदी की बढ़ोतरी हुई है जबकि इसकी मात्रा में सिर्फ़ 10.86 फ़ीसदी की ही वृद्धि हुई है.
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वहीं, कच्चे तेल के दामों में 81.15 फ़ीसदी की वृद्धि हुई है जबकि मात्रा में 2.35 फ़ीसदी की गिरावट हुई है और इन्हीं महीनों में लिक्विफ़ाइड नैचुरल गैस के दामों में 144.02 फ़ीसदी की बढ़ोतरी हुई है. वित्त वर्ष 2022 के जुलाई से सितंबर की तिमाही में लिक्विफ़ाइड नैचुरल गैस के आयात में 53.95 फ़ीसदी की बढ़ोतरी हुई है.
इसके अलावा पाकिस्तान के आगे खाद्य वस्तुओं के आयात बिल की भी चुनौती है. चालू वित्त वर्ष के शुरुआती तीन महीनों में पिछले साल की तुलना में 38.03 फ़ीसदी का इज़ाफ़ा हुआ है. जहां पिछले साल यह 1.71 अरब डॉलर था वो इस साल 2.36 अरब डॉलर हो गया है.
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लगातार खाद्य वस्तुओं का बढ़ता आयात बिल और बढ़ता घाटा भी पाकिस्तान की इमरान ख़ान सरकार के लिए चिंता का विषय है. पिछले वित्त वर्ष में पाकिस्तान ने 8 अरब डॉलर की खाद्य वस्तुएं आयात की थीं.
अगले कुछ महीनों में पाकिस्तान का खाद्य वस्तुओं का आयात बिल और भी बढ़ने वाला है क्योंकि सरकार ने 6 लाख टन चीनी और 40 लाख टन गेहूं आयात करने का फ़ैसला लिया है.
बढ़ते आयात बिल को देखते हुए लग रहा है कि पाकिस्तान में महंगाई की मार आम जनता पर और पड़ सकती है. इसके अलावा इमरान ख़ान सरकार को देश की ख़स्ता अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए बड़े आर्थिक फ़ैसले लेने होंगे.
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