रानिल विक्रमसिंघे बने श्रीलंका के नए प्रधानमंत्री, जानिए इन्हें क्यों कहा जाता है भारत समर्थक
भारत समर्थक के रूप में चर्चित रानिल विक्रमसिंघे श्रीलंका ने नए प्रधानमंत्री बन गए हैं।
कोलंबो, 12 मईः आजादी के बाद सबसे बड़े राजनीतिक-आर्थिक संकट का सामना कर रहे श्रीलंका में एक अहम बदलाव हुआ है। भारत समर्थक के रूप में चर्चित रानिल विक्रमसिंघे श्रीलंका ने नए प्रधानमंत्री बन गए हैं। श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे और रानिल विक्रमसिंघे के बीच कल शाम को हुई लंबी बातचीत के बाद यह फैसला किया गया। रानिल विक्रमसिंघे ने आज शाम 6ः30 बजे प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। महिंदा राजपक्षे के इस्तीफे के बाद पीएम का पद खाली था।
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5 बार पीएम रहे हैं रानिल विक्रमसिंघे
रानिल विक्रमसिंघे 1994 से यूनाइटेड नेशनल पार्टी के प्रमुख रहे हैं। वह अब तक 5 बार श्रीलंका के PM रह चुके हैं। 73 साल के रानिल ने वकालत की पढ़ाई की है। 70 के दशक में रानिल ने राजनीति में कदम रखा और पहली बार 1977 में सांसद चुने गए थे। 1993 में पहली बार PM बनने से पहले रानिल उप विदेश मंत्री, युवा और रोजगार मंत्री सहित कई और मंत्रालय संभाल चुके हैं। वह संसद में दो बार विपक्षी नेता की भूमिका निभा चुके हैं।

पक्ष-विपक्ष के बीच बनी सहमति
पीएम पद से महिंदा का इस्तीफा होने के बाद यह उम्मीद जताई जा रही थी कि राष्ट्रपति गोताबाया राजपक्षे शीघ्र ही नए पीएम के नाम की घोषणा करेंगे। पीएम पद के लिए रानिल के नाम को सत्ता एवं विपक्ष के बीच एक स्वीकार्य सहमति के रूप में देखा जा रहा है। रानिल विक्रमसिंघे की पार्टी यूएनपी के अध्यक्ष वजीया अभयवर्धने ने कहा कि उनकी पार्टी संसद में बहुमत हासिल करने में सफल साबित होगी।

नई कैबिनेट की भी होगी नियुक्त
विक्रमसिंघे को बर्बाद हो चुकी श्रीलंका की अर्थव्यवस्था को फिर से बेहतर करने दूरदर्शी नीतियों के साथ अर्थव्यवस्था का कुशल प्रबंधन करना होगा। पहले कल शाम राष्ट्रपति गोताबाया ने कहा था कि वह नई सरकार के गठन के लिए पार्टी नेताओं के साथ बातचीत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह नए प्रधानमंत्री की नियुक्ति करेंगे और नए मंत्रिमंडल में कोई राजपक्षे नहीं होगा। मैं मंत्रियों की नई कैबिनेट भी नियुक्त करूंगा। इसके साथ ही उन्होंने लोगों से नफरत फैलाने से बचने की अपील की।

क्यों माना जाता है भारत समर्थक
लगभग दो दशकों से श्रीलंका की राजनीति में मजबूत आधार बने रहे महिंदा राजपक्षे चीन समर्थक माने जाते रहे हैं। राजपक्षे के शासनकाल में चीन को श्रीलंका में कई बड़ी परियोजनाएं हाथ लगी। यह राजपक्षे का ही दौर था जिसमें भारत के संबंध श्रीलंका से खराब होते चले गए। वही, रानिल विक्रमसिंघे को भारत समर्थक माना जाता है। वह वे भारत के साथ संबंध प्रगाढ़ करने के प्रबल हिमायती रहे हैं। पड़ोसी देश भारत के प्रति किसी तरह का पूर्वग्रह नहीं रखते।












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