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जर्मनी से 77 साल बाद हर्जाना मांगेगा पोलैंड, इतनी रकम में 25 बार श्रीलंका के कर्जे माफ हो जाएंगे

वॉरसॉ, 01 सितंबरः दूसरे विश्वयुद्ध के समाप्त होने के 77 साल बीत जाने के बाद पोलैंड अब जर्मनी से हर्जाना मांगने जा रहा है। यह हर्जाना द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नाजियों के हमले और कब्जे के बाद हुए नुकसान के मद्देनजर मांगा जाएगा। इस युद्ध के दौरान पोलैंड के लाखों लोग मारे गए थे। इसके एवज में पोलैंड अब जर्मनी से 1300 अरब अमेरिकी डॉलर की राशि की मांगने जा रहा है। यह राशि इतनी है कि इसमें श्रीलंका के 25 से अधिक बार कर्जे माफ हो जाएंगे।

पोलैंड पर आक्रमण के बाद शुरू हुआ युद्ध

पोलैंड पर आक्रमण के बाद शुरू हुआ युद्ध

दूसरा विश्व युद्ध 1 सितंबर 1939 से 2 सितंबर 1945 तक कुल 6 सालों तक लड़ा गया था। हिटलर के नेतृत्व वाले नाजी जर्मनी ने पोलैंड पर आक्रमण कर कब्जा कर लिया था, जिसके बाद ये युद्ध शुरू हुआ। पोलैंड के शीर्ष राजनेता जारोस्लाव काजिंस्की ने गुरुवार को कहा कि उनकी सरकार नाजियों द्वारा द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान उनके देश पर कब्जा करने के लिए जर्मनी से हर्जाना मांगेगी। सत्तारूढ़ दल के मुख्य नेता जारोस्लाव काजिंस्की ने कहा कि ऐसा करना पोलैंड का "दायित्व" है। काजिंस्की पोलैंड के मुख्य पॉलिसी मेकर हैं।

पोलैंड ने जर्मनी से मांगा 1.32 ट्रिलियन डॉलर हर्जाना

पोलैंड ने जर्मनी से मांगा 1.32 ट्रिलियन डॉलर हर्जाना

बता दें कि गुरुवार को नाजी अटैक की बरसी पर पोलैंड ने एक रिपोर्ट जारी की है जिसमें नाजी जर्मनी द्वारा किए गए आक्रमण के बाद नुकसान का खुलासा किया गया है। रिपोर्ट में पोलैंड ने अपने नुकसान का अनुमान लगाया है। पोलैंड का कहना है कि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जब नाजी जर्मनी ने उनके देश पर आक्रमण किया था तब उससे 6.2 ट्रिलियन ज्लॉटी (1.32 ट्रिलियन डॉलर) का नुकसान हुआ था। देश के सत्तारूढ़ राष्ट्रवादी नेताओं ने गुरुवार को कहा कि पोलैंड आधिकारिक तौर पर इस नुकसान के भरपाई की मांग करेगा। बतादें कि श्रीलंका पर कुल कर्ज 51 बिलियन डॉलर है।

पोलैंड था युद्ध का पहला शिकार

पोलैंड था युद्ध का पहला शिकार

पोलैंड की दक्षिणपंथी सरकार का तर्क है कि उनका देश युद्ध का पहला शिकार था। लेकिन पड़ोसी देश जर्मनी ने उन्हें पूरी तरह से मुआवजा नहीं दिया। पोलैंड का कहना है कि जर्मनी अब यूरोपीय संघ के भीतर उसके प्रमुख भागीदारों में से एक है। 1 सितंबर, 1939 को नाजी जर्मनी ने बमबारी के साथ पोलैंड पर हमला किया था। जब तक हिटलर दूसरा विश्व युद्ध हार नहीं गया तब तक पौलैंड पूरे 5 साल तक नाजी जर्मनी के कब्जे में रहा था। इस युद्ध में हुए भीषण नुकसान को लेकर पोलैंड पिछले काफी समय से विचार कर रहा था। लगभग 30 अर्थशास्त्रियों, इतिहासकारों और अन्य विशेषज्ञों की एक टीम ने 2017 से इस रिपोर्ट पर काम किया है।

पहली बार जर्मनी से की जाएगी आधिकारिक मांग

पहली बार जर्मनी से की जाएगी आधिकारिक मांग

पोलैंड के राष्ट्रपति आंद्रेजेज डूडा ने वेस्टरप्लाटे प्रायद्वीप में कहा कि विश्वयुद्ध "हमारे इतिहास की सबसे भयानक त्रासदियों में से एक" था। वेस्टरप्लाटे प्रायद्वीप वही जगह है जहां सबसे पहली बार नाजी सेना ने आक्रमण किया था। पोलैंड ने इससे पहले भी अपने नुकसान का अनुमान लगाया था। 2019 से सत्ताधारी पार्टी के सांसद ने कहा था कि पोलौंड को 850 अरब डॉलर का नुकसान हुआ था। हालांकि अब ये बढ़कर 1300 अरब डॉलर बताया जा रहा है। सत्तारूढ़ पार्टी लॉ एंड जस्टिस ने 2015 में सत्ता संभालने के बाद से कई बार मुआवजे की मांग की है, लेकिन अब तक पोलैंड ने आधिकारिक तौर पर ये नहीं कहा कि उसे कितने डॉलर चाहिए।

जर्मनी से पोलैंड के संबंध हो सकते हैं खराब

जर्मनी से पोलैंड के संबंध हो सकते हैं खराब

मुआवजा राशि के बढ़ने के पीछे की वजह बताते हुए काजिंस्की ने एक समाचार सम्मेलन में कहा, "जो राशि पहले पेश की गई थी, उसे सबसे सीमित व पुराने तरीकों का इस्तेमाल करके अपनाया गया था, इसलिए इसका बढ़ना संभव था।" बतादें कि पोलैंड की सत्तारूढ़ पार्टी लॉ एंड जस्टिस, जर्मनी विरोधी मत रखती है और इस देश के विरूद्ध प्रचार कर वोट हासिल करती रही है। लेकिन अब इस पार्टी ने मुआवजे की राशि मांगकर बर्लिन के साथ संबंधों को और तनावपूर्ण बना दिया है।

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