COP28 WCAS: पीएम मोदी की इजरायली राष्ट्रपति से मुलाकात, हमास से संघर्ष के बीच 'स्थाई समाधान' पर चर्चा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इजरायल- हमास के बीच जारी युद्ध के बीच इजरायली राष्ट्रपति इसाक हर्जोग से मुलाकात की है। इस दौरान उन्होंने हाल ही में बंधकों की रिहाई का स्वागत किया। पीएम ने कहा कि बातचीत और कूटनीति के माध्यम से इजराइल-फिलिस्तीन मुद्दे पर स्थायी समाधान के लिए भारत का समर्थन व्यक्त किया। इसके अलावा पीएम ने मोदी ने दो-राज्य समाधान के मुद्दे को फिर से दोहराया। नेतन्याहू से मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री ने भारत- इजरायल के बीच द्विपक्षीय संबंधों के मजबूती पर भी जोर दिया।
पीएम मोदी दुबई में COP28 WCAS (World Climate Action Summit of the Conference Of Parties-28) के मौके पर दुबई पहुंचे। जहां उन्होंने इजरायल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं ने क्षेत्र में चल रहे इजराइल-हमास संघर्ष पर विचारों का आदान-प्रदान किया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने एक्स पर लिखा, पीएम मोदी ने 07 अक्टूबर के आतंकवादी हमलों में लोगों की मौत पर संवेदना व्यक्त की और बंधकों की रिहाई का स्वागत किया।

उन्होंने आगे कहा कि पीएम मोदी ने दो-राज्य समाधान के लिए भारत के समर्थन को दोहराया। पीएम के इजरायली राष्ट्रपति से मुलाकात को लेकर विदेश मंत्रायल के एक बयान में कहा गया, "पीएम ने प्रभावित आबादी के लिए मानवीय सहायता की निरंतर और सुरक्षित डिलीवरी की आवश्यकता दोहराई। उन्होंने दो राज्य समाधान और बातचीत और कूटनीति के माध्यम से इज़राइल-फिलिस्तीन मुद्दे के शीघ्र और टिकाऊ समाधान के लिए भारत के समर्थन पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को दुबई में COP28 वर्ल्ड क्लाइमेट एक्शन समिट के ग्रीन क्रेडिट्स प्रोग्राम में स्वास्थ्य और पर्यावरण को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जिस तरह हेल्थ कार्ड के बारे में सोचते हैं, उसी तरह हमें पर्यावरण के बारे में भी सोचना चाहिए। पीएम ने कहा कि सभी को पृथ्वी के हेल्थ कार्ड में भी पॉजिटिव पॉइंट्स लाने होंगे, सही मायनों में यही ग्रीन क्रेडिट होगा।
वहीं समिट के मॉर्निंग सेशन में पीएम ने पर्यावरणीय नियमों को अनदेखी पर कुछ अमीर देशों को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि सदियों पहले चंद देशों के किए की कीमत पूरी दुनिया को चुकानी पड़ रही है। जो भी देश ज्यादा कार्बन उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार हैं उन्हें क्लाइमेट चेंज का सामना करने के लिए विकासशील और गरीब देशों को निस्वार्थ होकर टेक्नोलॉजी ट्रांसफर करनी चाहिए।
पीएम ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर भारत के प्रयासों को वैश्विक पटल पर रखते हुए कहा कि इकोलॉजी और इकोनॉमी के संतुलन का उदाहरण भारत ने दुनिया के सामने पेश किया। 17 फीसदी आबादी के बावजूद कार्बन उत्सर्जन में हमारी हिस्सेदार सिर्फ 4 फीसदी है। हमारा लक्ष्य 2030 तक कार्बन उत्सर्जन 45 फीसदी तक घटाना है।












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