अगले हफ्ते यूरोप के दौरे पर जाएंगे पीएम मोदी, 'अकड़' दिखाने वाले जर्मन चांसलर खुद करेंगे अगवानी
जर्मनी में नई सरकार के गठन के बाद भारतीय प्रधानमंत्री का ये पहला जर्मनी का दौरा होगा और पहली बार जर्मनी के नये चांसलर ओलाफ स्कोल्ज के साथ पीएम मोदी द्विपक्षीय बैठक के साथ साथ आईजीसी की बैठक में शामिल होंगे।
नई दिल्ली, अप्रैल 27: भारतीय विदेश मंत्रालय ने बुधवार को कहा है कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2 से 4 मई के बीच यूरोप का दौरा करेंगे और इस दौरान पीएम मोदी तीन यूरोपीय देशों, जर्मनी, डेनमार्क और फ्रांस की आधिकारिक यात्रा करेंगे। फ्रांस में राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे इसी हफ्ते निकले हैं और इमैनुएलन मैंक्रों के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद पीएम मोदी की ये पहली फ्रांस यात्रा होगी।

पीएम मोदी का यूरोप दौरा
भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा है कि, साल 2022 में प्रधानमंत्री की यह पहली विदेश यात्रा होगी। आपको बता दें कि, पीएम मोदी जर्मनी का यात्रा उस वक्त कर रहे हैं, जब खबरें आई थी, कि जर्मनी इस साल होने वाले जी-20 की बैठक में भारत को नहीं बुलाएगा, क्योंकि यूक्रेन मुद्दे पर भारत ने अभी तक रूस की निंदा नहीं की है। लेकिन, अब जर्मनी की राजधानी बर्लिन में खुद जर्मनी के चांसलर ओलाफ स्कोल्ज पीएम मोदी की अगवानी करेंगे और इस दौरान दोनों नेता द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इस दौरान दोनों नेता भारत-जर्मनी इंटर गवर्नमेंट कंसल्टेशन (आईजीसी) के छठे संस्करण की सह-अध्यक्षता करेंगे। आईजीसी का आयोजन हर दो सालों पर किया जाता है और ये एक अनूठा संवाद है, जिसमें जिसमें दोनों पक्षों के कई मंत्रियों की भागीदारी भी देखी जाती है।

जर्मनी में सरकार गठन के बाद पहला दौरा
आपको बता दें कि, जर्मनी में नई सरकार के गठन के बाद भारतीय प्रधानमंत्री का ये पहला जर्मनी का दौरा होगा और पहली बार जर्मनी के नये चांसलर ओलाफ स्कोल्ज के साथ पीएम मोदी द्विपक्षीय बैठक के साथ साथ आईजीसी की बैठक में शामिल होंगे। ओलाफ स्कोल्ज ने दिसंबर 2021 में पदभार ग्रहण किया था। रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय पीएम मोदी और जर्मन चांसलर स्कोल्ज संयुक्त रूप से एक व्यावसायिक कार्यक्रम को भी संबोधित करेंगे। इसके साथ ही भारतीय प्रधानमंत्री जर्मनी में भारतीय समुदाय को संबोधित करेंगे और उनके साथ बातचीत करेंगे।
ऐतिहासिक संबंध के 70 साल पूरे
आपको बता दें कि, साल 2021 में भारत और जर्मनी ने राजनयिक संबंधों की स्थापना के 70 साल पूरे होने का जश्न मनाया गया था और साल 2000 में दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदार की स्थापना हुई थी। वहीं, पीएम मोदी की जर्मनी यात्रा को दोनों देशों के बीच व्यापक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने और दोनों सरकारों के लिए क्षेत्रीय मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करने का एक अवसर होगा, जिसमें आपसी हित और वैश्विक मामले शामिल हैं। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी डेनमार्क के प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसेन के निमंत्रण पर आधिकारिक यात्रा पर कोपेनहेगन जाएंगे। वह डेनमार्क द्वारा आयोजित किए जा रहे दूसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में भी भाग लेंगे। वहीं, जर्मनी सरकार के राज्यमंत्री डॉ. लिंडनर ने कहा कि, हम भारत के साथ तकनीक, शिक्षा, सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन पर सहयोग करना चाहते हैं और भारत के बिना कोई भी बड़ी समस्या हल नहीं हो सकती है। उन्होंने कहा कि, भारत जर्मनी के लिए काफी महत्वपूर्ण भागीदार है और हम जर्मनी-भारत संबंधों को गहरा करने की आशा रखते हैं।

पीएम मोदी का डेनमार्क दौरा
भारत और डेनमार्क के बीच काफी अच्छे संबंध रहे हैं और डेनमार्क यात्रा के दौरान पीएम मोदी, डेनमार्क की प्रधानमंत्री फ्रेडरिकसेन के साथ-साथ महामहिम रानी मार्ग्रेथ- द्वितीय के साथ कार्यक्रम में शामिल होंगे। आपको बता दें कि, ग्रीन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप भारत और डेनमार्क के बीच अपनी तरह की पहली व्यवस्था थी। इससे पहले पिछले साल 9 अक्टूबर को डेनमार्क की प्रधानमंत्री फ्रेडरिकसेन ने भारत की यात्रा की थी, जिसमें दोनों देशों के बीच कई अहम समझौते किए गये थे। विदेश मंत्रालय की विज्ञप्ति के अनुसार, यह यात्रा दोनों पक्षों को अपने संबंधों में प्रगति की समीक्षा करने के साथ-साथ हमारे बहुआयामी सहयोग को और विस्तारित करने के तरीकों की जांच करने का अवसर प्रदान करेगी। यात्रा के दौरान, प्रधानमंत्री 'वन भारत-डेनमार्क व्यापार मंच' में भाग लेंगे और भारतीय डायस्पोरा के सदस्यों को भी संबोधित करेंगे।

भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन
इसके साथ ही पीएम मोदी दूसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में भी हिस्सा लेंगे, जिसमें भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अन्य नॉर्डिक नेताओं, जैसे आइसलैंड के प्रधानमंत्री कैटरीन जैकब्सडॉटिर, नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर, स्वीडन की प्रधानमंत्री मैग्डेलेना एंडरसन और फिनलैंड की प्रधानमंत्री सना मारिन के साथ भी बातचीत करेंगे। आपको बता दें कि, फिनलैंड और स्वीडन की प्रधानमंत्री से पीएम मोदी की मुलाकात काफी अहम इसलिए भी होगी, क्योंकि यूक्रेन के बाद रूस ने इन दोनों नॉर्डिक देशों के खिलाफ सैन्य अभियान चलाने की धमकी दे रखी है, क्योंकि इन दोनो देशों ने भी नाटो गठबंधन में शामिल होने की इच्छा जताई है।

नॉर्डिक शिखर सम्मेलन काफी अहम
नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में कोविड महामारी के बाद आर्थिक सुधार, जलवायु परिवर्तन, इनोवेशन और टेक्नोलॉजी, नवीकरणीय ऊर्जा, विकसित वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य और आर्कटिक क्षेत्र में भारत-नॉर्डिक सहयोग जैसे विषयों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। MEA ने कहा कि पहला भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन 2018 में स्टॉकहोम में हुआ था। 4 मई को अपनी वापसी यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी कुछ समय के लिए पेरिस में रुकेंगे और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से मुलाकात करेंगे। भारत और फ्रांस इस वर्ष अपने राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष मना रहे हैं और दोनों नेताओं के बीच बैठक सामरिक साझेदारी का एक अधिक महत्वाकांक्षी एजेंडा निर्धारित करेगी।












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