कतर के अमीर से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मुलाकात, क्या पूर्व नेवी अफसरों को मिली फांसी की सजा पर हुई बात?
PM Modi meets Qatar Emir: कतर की एक अदालत द्वारा आठ पूर्व भारतीय नौसेना अधिकारियों को फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद पहली बार, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को दुबई में COP28 शिखर सम्मेलन के मौके पर कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल-थानी से मुलाकात की है। इस दौरान पीएम मोदी ने द्विपक्षीय साझेदारी और कतर में रहने वाले "भारतीय समुदाय की भलाई" पर चर्चा की है।
कतर के अमीर और प्रधानमंत्री मोदी के बीच की ये बैठक, भारत सरकार द्वारा 26 अक्टूबर को कतर की एक अदालत द्वारा जासूसी के कथित आरोप में आठ लोगों को दी गई मौत की सजा के खिलाफ अपील करने के कुछ दिनों बाद हुई है।

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "कल दुबई में COP28 शिखर सम्मेलन के मौके पर कतर के अमीर एचएच शेख @TamimBinHamad से मिलने का अवसर मिला।"
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, कि "विपक्षीय साझेदारी की संभावना और कतर में भारतीय समुदाय की भलाई पर हमारी अच्छी बातचीत हुई।''
क्या नेवी अफसरों को लेकर हुई बात?
आपको बता दें, कि पूर्व नेवी अफसरों को जासूसी के आरोप में मिली फांसी की सजा के खिलाफ भारत ने कतर कोर्ट में पिछले महीने अपील दायर की है, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है और फैसले के खिलाफ सुनवाई भी शुरू हो चुकी है।
वहीं, भारत को 7 नवंबर को बंदियों तक कांसुलर पहुंच प्रदान की गई थी। विदेश मंत्रालय के अनुसार, कतर अदालत का फैसला गोपनीय है और इसे कानूनी टीम के साथ साझा किया गया है।
दोहा स्थित दहरा ग्लोबल के सभी पूर्व नौसेना कर्मचारियों, भारतीय नागरिकों को अगस्त 2022 में हिरासत में ले लिया गया था।
हालांकि, अभी तक कतरी अधिकारियों ने भारतीय नागरिकों के खिलाफ आरोपों को सार्वजनिक नहीं किया है। लेकिन सूत्रों ने कहा है, कि भारतीय इतालवी छोटी स्टील्थ पनडुब्बियों U2I2 के प्रेरण की देखरेख के लिए डहरा ग्लोबल के साथ अपनी निजी क्षमता में काम कर रहे थे।
फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, आठ भारतीयों पर इजरायल के लिए जासूसी करने का आरोप लगाया गया था। यह फैसला कतर की प्रथम दृष्टया अदालत ने सुनाया था।
गिरफ्तार किए गए भारतीयों की पहचान कैप्टन नवतेज सिंह गिल, कैप्टन बीरेंद्र कुमार वर्मा, कैप्टन सौरभ वशिष्ठ, कमांडर अमित नागपाल, कमांडर पूर्णेंदु तिवारी, कमांडर सुगुनाकर पकाला, कमांडर संजीव गुप्ता और नाविक रागेश के रूप में की गई है और ये सभी पूर्व भारतीय नौसेना के अधिकारी रह चुके हैं और गिरफ्तारी के वक्त डहरा ग्लोबल में कार्यरत थे।
कतर कोर्ट के फैसले के कुछ दिनों बाद, जिसे भारत ने "बेहद चौंकाने वाला" कहा था, भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने आठ लोगों के परिवार के सदस्यों से मुलाकात की थी और उन्हें आश्वासन दिया था कि सरकार मामले को "सर्वोच्च महत्व" देती है।
सरकारी प्रयासों के अलावा, आठों के परिवारों ने कतर के अमीर को दया याचिका भी सौंपी है, जो रमज़ान और ईद के दौरान माफ़ी देने के लिए जाने जाते हैं।
भारत और कतर के बीच काफी अच्छे संबंध रहे हैं और एक्सपर्ट्स का कहना है, कि अगर कोर्ट से पूर्व नेवी अफसरों को राहत नहीं मिलती है, तो कतर के अमीर के पास दोषियों की सजा को माफ करने का अधिकार होता है और भारत के पास ये आखिरी विकल्प हो सकता है। वहीं, पीएम मोदी और कतर के अमीर के बीच निजी संबंध भी काफी मजबूत हैं, लेकिन, फिलहाल इस बात की जानकारी नहीं है, कि क्या पीएम मोदी ने कतर के अमीर के सामने, नेवी के पूर्व अफसरों का मुद्दा उठाया है या नहीं।












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