देश ही नहीं, विदेशों में भी भोजपुरी समाज को नया मान दे रहे हैं प्रधानमंत्री मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि वह सिर्फ भारत के नहीं, बल्कि प्रवासी भारतीयों और उनकी सांस्कृतिक जड़ों के भी सच्चे प्रतिनिधि हैं। त्रिनिदाद और टोबैगो की यात्रा के दौरान उन्होंने भोजपुरी समाज और संस्कृति को जिस तरह से वैश्विक मंच पर प्रतिष्ठा दिलाई, वह अभूतपूर्व है।
भोजपुरी भाषा, जिसकी जड़ें भारत की मिट्टी में गहरी धंसी हैं, फिजी, मॉरिशस, सूरीनाम, त्रिनिदाद जैसे देशों में आज भी जीवंत है। इन देशों में वर्षों पहले मजदूरी के लिए गए भारतीयों ने अपनी मातृभाषा और संस्कृति को जिंदा रखा। लेकिन यह पहली बार है जब किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने इस सांस्कृतिक धरोहर को राजनयिक मंच से उतनी ही गरिमा के साथ प्रस्तुत किया, जितनी यह हकदार है।

प्रधानमंत्री मोदी ने त्रिनिदाद में अपने संबोधन में भोजपुरी भाषियों की संघर्षगाथा और उनकी सांस्कृतिक दृढ़ता को सलाम करते हुए कहा, "भोजपुरी समाज ने दुनिया को दिखाया है कि संस्कृति केवल भाषा या पोशाक नहीं, बल्कि आत्मा की अभिव्यक्ति है।" उन्होंने यह भी कहा कि भारत सरकार अब भोजपुरी भाषा और संस्कृति को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के लिए प्रयास तेज करेगी।
जिस प्रकार से प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर भी भोजपुरी में पोस्ट करते हुए लिखा कि एगो अनमोल सांस्कृतिक जुड़ाव ! बहुत खुशी भइल कि पोर्ट ऑफ स्पेन में हम भोजपुरी चौताल प्रस्तुति के प्रदर्शन देखनी. त्रिनिदाद एंड टोबैगो आ भारत, खास करके पूर्वी यूपी आ बिहार के बीच के जुड़ाव उल्लेखनीय बा।
यह अनायास नहीं है। यह प्रधानमंत्री जी की भोजपुरी अस्मिता के प्रति श्रद्धा भाव है। प्रधानमंत्री की यह पहल सिर्फ भावनात्मक नहीं, बल्कि रणनीतिक भी है। यह संस्कृति आधारित कूटनीति की एक सशक्त मिसाल है, जिसमें भारत अपने ऐतिहासिक और भाषाई संबंधों को वैश्विक सहयोग का आधार बना रहा है। इससे भारत को न केवल सांस्कृतिक नेतृत्व हासिल होगा, बल्कि वह प्रवासी भारतीयों से जुड़कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावशाली संवाद भी स्थापित कर सकेगा।
आज जब देश 'वसुधैव कुटुम्बकम्' की भावना को लेकर आगे बढ़ रहा है, तब भोजपुरी समाज की वैश्विक पहचान को पुनः स्थापित करना न केवल गौरव की बात है, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विविधता की असली शक्ति को भी दिखाता है। प्रधानमंत्री मोदी की यह पहल भाषाओं के संरक्षण और प्रवासी समाज की भावनाओं से जुड़ाव का प्रतीक है।
भोजपुरी समाज को जो सम्मान प्रधानमंत्री मोदी ने त्रिनिदाद में दिलाया, वह केवल भाषिक समुदाय की जीत नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक आत्मा की जीत है। यह भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण की वह लहर है, जो अब केवल देश की सीमाओं में नहीं, बल्कि सात समंदर पार भी लहराने लगी है। भोजपुरी अब सिर्फ एक बोली नहीं, वैश्विक संस्कृति का प्रतीक बन रही है - और इस बदलाव के अगुवा हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।












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