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PM Modi के चीन दौरे से दोनों देशों के रिश्तों में आएगा सुधार? जानें SCO समिट में मोदी की मौजूदगी क्यों है खास?

PM Modi China visit 2025: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सात साल बाद शनिवार, 30 अगस्त को चीन पहुंचे, जहां वह शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन (SCO) शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिका ने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाकर दोनों देशों के रिश्तों में तनाव गहरा दिया है।

SCO समिट में पीएम मोदी का यह हिस्सा लेना बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि यहां न सिर्फ भारत-चीन रिश्तों (India China Relations) को सामान्य बनाने की कोशिश होगी, बल्कि बदलते वैश्विक भू-राजनीतिक हालात और आर्थिक चुनौतियों पर भी चर्चा होने की संभावना है।

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जापान से सीधे पहुंचे चीन

पीएम मोदी जापान की यात्रा समाप्त करने के बाद तियानजिन पहुंचे। जापान में उन्होंने परिवहन, अंतरिक्ष और व्यापार सहयोग को बढ़ावा दिया। अब चीन में 1 सितंबर तक ठहराव के दौरान उनकी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से अहम द्विपक्षीय बैठक होगी, जिसमें भारत-चीन आर्थिक रिश्तों की समीक्षा और रिश्तों को सामान्य करने के उपायों पर चर्चा होगी।

SCO Summit 2025: SCO शिखर सम्मेलन पर सबकी नजर

31 अगस्त और 1 सितंबर को तियानजिन में आयोजित होने वाले SCO समिट में पीएम मोदी हिस्सा लेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सम्मेलन न केवल भारत-चीन संबंधों बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिहाज से भी अहम साबित हो सकता है। माना जा रहा है कि सम्मेलन के बाद एक संयुक्त घोषणा पत्र जारी किया जाएगा, जिसमें सुरक्षा और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने की रणनीति शामिल होगी।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में भारतीय सामान पर 50% टैरिफ लगा दिया है। इससे भारत-अमेरिका रिश्तों में खटास आई है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यह फैसला अमेरिका के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। अमेरिकी प्रोफेसर रिचर्ड वूल्फ का कहना है कि यह कदम वैश्विक शक्ति संतुलन को ब्रिक्स देशों की ओर मोड़ रहा है।

India China relations: भारत-चीन रिश्तों में नरमी की कोशिश

पिछले पांच सालों से भारत और चीन के रिश्ते तनावपूर्ण रहे हैं। हालांकि, चीन लगातार रिश्तों को सामान्य करने की कोशिश कर रहा है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, जब ट्रंप ने चीन पर व्यापार युद्ध शुरू किया था, तभी चीन ने भारत के साथ शांति और सहयोग की पहल शुरू कर दी थी।

ट्रंप टैरिफ का तोड़ बनेगा SCO?

न्यूज एजेंसियों की रिपोर्ट की मानें तो SCO समिट के दौरान सदस्य देश अमेरिका की टैरिफ नीति का सामूहिक रूप से जवाब देने की रणनीति बना सकते हैं। यह सम्मेलन भारत के लिए एक बड़ा कूटनीतिक मंच साबित हो सकता है, जहां वह चीन, रूस और मध्य एशियाई देशों के साथ आर्थिक और सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने पर जोर देगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा भारत के लिए कूटनीतिक संतुलन साधने और वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति मजबूत करने का अवसर साबित हो सकती है। दुनिया भर की निगाहें अब इस मुलाकात और SCO शिखर सम्मेलन से निकलने वाले संदेशों पर टिकी हैं।

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