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जिन दो मरीजों में नहीं बची थी जान, उनमें डॉक्टरों ने लगा दिया सुअर का दिल, आखिर क्या निकला नतीजा?

नई दिल्ली: इंसान का कोई भी महत्वपूर्ण अंग अगर खराब होता है, तो दूसरे इंसान के अंग को लगाकर उसे बचाया जा सकता है, लेकिन ज्यादातर मामलों में डोनर नहीं मिलता, जिस वजह से मरीजों की जान जाती है। ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए वैज्ञानिक और डॉक्टर अब जानवरों के अंग इंसानों में लगाने का ट्रायल कर रहे हैं। जिसमें अमेरिका के डॉक्टरों को बड़ी सफलता मिली है। (तस्वीरें-सांकेतिक)

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    New York: दो ब्रेन डेड लोगों के शरीर में लगाया गया सुअर का दिल | वनइंडिया हिंदी *International
    जेनेटिकली मॉडिफाइड रहता है दिल

    जेनेटिकली मॉडिफाइड रहता है दिल

    हाल ही में न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी (एनवाईयू) के सर्जनों ने दो ब्रेन डेड लोगों में जेनेटिकली मॉडिफाइड सुअर के दिल का ट्रांसप्लांट कर इतिहास रचा। ये एक तरह का ट्रायल है, जिसके जरिए जानवरों की मदद से इंसानों की जान बचाई जाएगी। डॉक्टरों ने बताया कि जून के महीने में उन्होंने लॉरेंस केली में एक ट्रांसप्लाट किया, जहां एक ब्रेन डेड इंसान के शरीर में सुअर का दिल लगाया गया। इसके बाद इसी तरह का ट्रांसप्लांट 6 जुलाई को भी हुआ।

    वायरस की हुई जांच

    वायरस की हुई जांच

    मामले में एनवाईयू लैंगोन हेल्थ में ऑपरेशन का नेतृत्व करने वाले डॉ. नादर मोआजमी ने कहा कि हमने इस ट्रांसप्लांट के दौरान बहुत कुछ सीखा है। ये बहुत ही बेहतर विकल्प है। जब मानव शरीर में सुअर का दिल धड़क रहा था, तो हम काफी खौफ में थे। उन्होंने ट्रांसप्लांट के पहले सुअर में पाए जाने वाले सभी वायरस की जांच की थी। इसके अलावा उसके अंग की बायोप्सी भी की गई।

    10 जेनेटिकली मॉडिफिकेशन

    10 जेनेटिकली मॉडिफिकेशन

    वहीं जिन दो सुअरों का दिल इंसानों में लगाया गया उसमें 10 जेनेटिकली मॉडिफिकेशन किए गए थे, ताकि वो इंसान के शरीर के साथ अच्छे से काम कर सकें। इसके अलावा इस अध्ययन के लिए उपयोग किए जाने वाले ऑपरेटिंग रूम को केवल भविष्य के एक्सनोट्रांसप्लांटेशन अनुसंधान के लिए लिया गया है।

    तीन दिन तक धड़कता रहा दिल

    तीन दिन तक धड़कता रहा दिल

    डॉक्टरों ने आगे कहा कि उन्होंने ट्रांसप्लांट के बाद मरीज को वेंटिलेटर पर रखा था, लेकिन बाद में उन्होंने टेस्ट के लिए उसे हटा दिया। जांच में उन्होंने पाया कि दोनों मरीजों का दिल तीन दिन तक सही से धड़कता रहा। वहीं कुछ महीनों पहले अमेरिका में डेविड बेनेट के शख्स में भी सुअर का दिल लगाया गया था, लेकिन दो महीने बाद उनकी मौत हो गई। उस दौरान जांच में पता चला था कि सुअर का एक वायरस डेविड के शरीर में आ गया था, जिससे उनकी जान गई। इसी वजह से इस बार हर वायरस की सही से जांच की गई थी।

    ट्रांसप्लांट के लिए 1 लाख लोगों की वेटिंग

    ट्रांसप्लांट के लिए 1 लाख लोगों की वेटिंग

    वैज्ञानिकों के मुताबिक सुअर के शरीर को जेनेटिकली मॉडिफाइड किया जा रहा है, ताकि उनके अंग को इंसानों में ट्रांसप्लाट किया जा सके। सिर्फ अमेरिका की बात करें तो वहां पर एक लाख से ज्यादा लोगों की वेटिंग ऑर्गन ट्रांसप्लांट के लिए है। इसमें सबसे ज्यादा लोग किडनी के हैं। एक डेटा के मुताबिक वेटिंग लिस्ट के ज्यादातर लोग नंबर आने से पहले जान गंवा देते हैं। ऐसे में सुअर का दिल और किडनी चिकित्सा जगत में नई क्रांति ला सकती है।

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