‘भारत रूस से हथियार खरीदे, ये अमेरिका को मंजूर नहीं’, पेंटागन ने फिर दी भारत को नसीहत
रूस से एस-400 मिसाइल रक्षा प्रणालियों के एक बैच की खरीद के लिए अमेरिका पहले ही काउंटरिंग अमेरिकाज एडवर्सरीज थ्रू सेंक्शंस एक्ट (सीएएटीएसए) के तहत तुर्की पर प्रतिबंध लगा चुका है।
वॉशिंगटन, अप्रैल 23: रूस को लेकर अमेरिका और भारत बार बार आमने-सामने आ रहे हैं। हालांकि, दोनों देशों के बीच यूक्रेन युद्ध के बाद कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं और यहां तक की भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन की पिछले दो महीने में दो बार वर्चुअल बैठकें भी हो चुकी हैं, बावजूद इसके अमेरिकी धमकियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं और एक बार फिर से पेंटागन ने भारत को नसीहत देने की कोशिश की है।

पेंटागन की भारत को चेतावनी!
पेंटागन ने कहा है किस अमेरिका भारत को अपनी रक्षा जरूरतों के लिए रूस पर भरोसा करने के लिए हतोत्साहित करता है। अमेरिका ने साफ साफ कहा है, कि अमेरिका को मंजूर नहीं है, कि भारत अपनी रक्षा जरूरतों के लिए रूस पर निर्भर रहे। भारत ने साल 2018 में तत्कालीन डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की चेतावनियों को नजर अंदाज करते हुए रूस के साथ 5 अरब डॉलर में एस-400 मिसाइल सिस्टम को लेकर समझौता किया था और रूस ने पिछले साल दिसंबर महीने में एस-400 मिसाइल सिस्टम्स की डिलीवरी भी भारत को दे दी थी, जिसको लेकर अमेरिका में भारत पर प्रतिबंध लगाने की मांग की जा रही है, हालांकि अमेरिका ने अब तक प्रतिबंध पर विचार नहीं किया है।

तुर्की पर लगा चुका है प्रतिबंध
आपको बता दें कि, रूस से एस-400 मिसाइल रक्षा प्रणालियों के एक बैच की खरीद के लिए अमेरिका पहले ही काउंटरिंग अमेरिकाज एडवर्सरीज थ्रू सेंक्शंस एक्ट (सीएएटीएसए) के तहत तुर्की पर प्रतिबंध लगा चुका है। पेंटागन के प्रेस सचिव जॉन किर्बी ने कहा, "हम भारत के साथ-साथ अन्य देशों के साथ बहुत स्पष्ट हैं, कि हम उन्हें रक्षा जरूरतों के लिए रूस पर निर्भर नहीं देखना चाहते हैं। हम इसके बारे में ईमानदार हैं और रूस के साथ रक्षा समझौते को हतोत्साहित करते हैं।" हालांकि, पेंटागन के प्रवक्ता ने यह भी कहा कि, 'उसी समय हम भारत के साथ रक्षा साझेदारी को भी महत्व देते हैं। और जैसा कि एक सप्ताह पहले इसे प्रमाणित किया गया है (2+2 बैठक), हम आगे बढ़ने के तरीकों को देख रहे हैं औऱ भारत के साथ हमारी रणनीति बातचीत जारी रहेगी, क्योंकि भारत हमारे लिए मायने रखता है और काफी महत्वपूर्ण भी है'। पेंटागन प्रवक्ता ने आगे कहा कि, "भारत इस क्षेत्र में सुरक्षा प्रदाता है और हम इसे महत्व देते हैं।"

अमेरिका की बार बार चेतावनी
अमेरिकी विदेश विभाग के काउंसलर डेरेक चॉलेट ने गुरुवार को कहा कि बिडेन प्रशासन भारत के साथ काम करने के लिए बहुत उत्सुक है क्योंकि यह अपनी रक्षा क्षमताओं और रक्षा आपूर्तिकर्ताओं में विविधता लाता है। आपको बता दें कि, पेंटागन के इस बयान से पहले अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन के एक शीर्ष सलाहकार ने दो दिन पहले कहा था, कि, 'वाशिंगटन पूरी तरह से नई दिल्ली के मास्को के साथ लंबे समय से संबंधों को पूरी तरह से समझता है'।

भारत को समर्थन देने की बात
गुरुवार को एएनआई के साथ एक विशेष इंटरव्यू में एंटनी ब्लिंकन के शीर्ष सलाहकार डेरेक चॉलेट ने कहा कि, अमेरिका भारत का समर्थन करने के लिए तैयार है और अमेरिका और भारत के बीच साझेदारी में जबरदस्त संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि, 'हम समझते हैं कि भारत के रूस के साथ कई वर्षों से लंबे समय से रक्षा संबंध रहे हैं और इसकी प्रमुख वजहों में एक वजह ये भी था, क्योंकि संयुक्त राज्य अमेरिका एक समय भारत का भागीदार बनने के लिए उपलब्ध नहीं था।

अमेरिकी रक्षा मंत्री ने क्या कहा?
आपको बता दें कि, इसी महीने 6 अप्रैल को अमेरिकी रक्षा सचिव लॉयड ऑस्टिन ने ने भी कहा था कि, हन्हें उम्मीद है कि भारत आगे चलकर रूसी सैन्य उपकरणों पर अपनी निर्भरता को कम करेगा। ऑस्टिन ने यूएस कांग्रेस की सशस्त्र सेवा समिति के सदस्यों से कहा था कि, "हम यह सुनिश्चित करने के लिए उनके (भारत) के साथ काम करना जारी रखे हुए हैं, कि यह उनके (हमारा मानना है कि) रूसी उपकरणों में निवेश जारी रखना उनके हित में नहीं है।" वार्षिक रक्षा बजट पर कांग्रेस की सुनवाई के दौरान अमेरिकी रक्षा मंत्री ने भारत को लेकर ये अहम बयान दिया था। अमेरिकी रक्षा मंत्री ने आगे कहा कि, 'और हमारी जरूरत आगे बढ़ रही है कि, वे (भारत) उन उपकरणों के प्रकारों को कम कर दें, जिसमें वो निवेश कर रहे हैं, या फिर निवेश करना चाहते हैं, ताकि हम विश्वसनीय रह सकें'।












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