विश्व में बर्बादी फैलाने की आहट, पेंटागन की रिपोर्ट में चीन की सेना को लेकर विनाशकारी चेतावनी
पेंटागन ने चीन की सेना, पीएलए, मिसाइल शक्ति और खतरनाक इराकों को लेकर खतरे की घंटी बजाई है और चेतावनी जारी की है।
हांगकांग, नवंबर 08: वैसे तो पेंटागन साल 2000 से हर साल चीन की पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी को लेकर रिपोर्ट जारी करता आ रहा था और उस रिपोर्ट में संयुक्त राज्य अमेरिका में चर्चा भी की जाती रही है, लेकिन इस बार पेंटागन ने 2 महीने की देरी से रिपोर्ट पेश किया है, लेकिन जब दो महीने के बाद आई इस रिपोर्ट को अमेरिका के सरकारी अधिकारियों ने देखा, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। इस रिपोर्ट में चीनी सेना के बारे में बातें विस्तार से लिखी गई हैं, उसने अमेरिका के लिए खतरे की घंटी बजा दिया है।

पेंटागन की रिपोर्ट से सनसनी
बीते हफ्ते 3 नवंबर को पेंटागन ने पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चायना को लेकर साल 2021 की रिपोर्ट प्रकाशित की है। ये रिपोर्ट चायना मिलिट्री पावर (सीएमपीआर) को लेकर 192 पन्नों का एक दस्तावेज है, जिसमें चीन की सेना को लेकर विस्तारपूर्वक बातें की गईं हैं। सीएमपीआर केवल 2020 के अंत तक के घटनाक्रम को कवर करता है और पिछले एक साल में चीन की सेना के विस्तार लेकर इसमें बातें कहीं गईं हैं। लिहाजा इसमें फ्रैक्शनल ऑर्बिटल बॉम्बार्डमेंट सिस्टम (एफओबीएस) के परीक्षण का उल्लेख नहीं किया है। आपको बता दें कि, एफओबीएस अधिक सामान्य इंटरकॉन्टिनेन्टल बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) की तुलना में जल्द परमाणु हथियार पहुंचाने का एक वैकल्पिक साधन है, जिसका परीक्षण करीब-करीब चीन के द्वारा कर लिया गया है।
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चीन की सेना को लेकर चेतावनी
पेंटागन की 192 पन्नों की इस रिपोर्ट में सीएमपीआर यावि चायना मिलिट्री पावर को लेकर सिर्फ चेतावनियां भरी पड़ी हैं और अमेरिका के लिए उन खतरों का अलार्म बजाया गया है, जिसकी वजह चीन बन चुका है। इस रिपोर्ट में चीन की सेना को अमेरिका के लिए 'मजबूत दुश्मन' कहा गया है। और इसमें चीन की सेना के युद्ध जीतने की क्षमता के बारे में बताया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि, चीन ने अपनी सैन्य क्षमता को इतना विकसित कर लिया है कि, वो अपने दुश्मन (अमेरिका) को हराने में सक्षम बन गया है। पेंटागन की रिपोर्ट में कहा गया है कि, ताइवान से विवाद के बीच चीन ने किसी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप की संभावना को देखते हुए अपनी सेना को वैश्विक स्तर पर विकसित कर लिया है।

कमजोरियों से पाया पार
यूएस नेवल वॉर कॉलेज में स्ट्रैटेजी प्रोफेसर एंड्रयू एरिकसन ने भारतीय समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कहा कि, "पिछले दो दशकों में पीएलए ने संगठन में चल रही कमजोरियों को दूर करने के लिए व्यापक सुधारों के साथ-साथ क्वांटिटी और क्वालिटी को तेजी से बढ़ाने का काम किया है और हथियारों की क्षमता को काफी ज्यादा बढ़ा लिया है। जिसमें चीन की सेना के अलग अलग हिस्सों के बीच समन्वय और प्रशिक्षण भी शामिल हैं। चीन के पास अब दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और रक्षा बजट है और अब चीन की थल सेना विश्व की सबसे बड़ी जमीनी ताकत बन चुकी है। चीन की नेवी विश्व की सबसे बड़ी नेवी बन चुकी है और अब चीन के पास विश्व में सबसे ज्यादा पानी में लड़ने वाले लड़ाकू जहाज हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि, चीन के पास इंडो-पैसिफिक की सबसे बड़ी वायु सेना, दुनिया की सबसे बड़ी उप-रणनीतिक मिसाइल बल है, और यकीनन दुनिया की सबसे बड़ी मिसाइल शक्ति भी चीन बन चुका है। इसके साथ ही जो सबसे चौंकाने वाली बात है, वो ये कि चीन का परमाणु मिसाइल शस्त्र भंडार पीएलए रॉकेट फोर्स (पीएलएआरएफ) के इर्द-गिर्द घूमता है।

सबसे बड़ी चुनौती है परमाणु हथियार
पेंटागन की 2020 की रिपोर्ट में चीन के परमाणु शस्त्रागार को दोगुना करने की चेतावनी दी गई थी, लेकिन इस साल के निष्कर्ष कहीं अधिक चौंकाने वाले हैं। नये रिपोर्ट में दावा किया गया है कि, चीन 2030 तक अपने परमाणु भंडार को 1000 परमाणु हथियारों तक पहुंचा देगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि, चीन के पास इस वक्त 200 से कम परमाणु हथियार हैं, जिसे चीन 2027 तक बढ़ाकर 700 की संख्या तक पहुंचाने वाला है और साल 2030 तक चीन के पास परमाणु हथियारों की संख्या बढ़कर एक हजार हो जाएगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि, चीन के इस नेतृत्व ने आश्चर्यजनक तरीके से परमाणु हथियारों की नीति में बदलाव किया है, जो काफी गंभीर है। रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा गया है कि, अब चीन न्यूनतम प्रतिरोध की नीतचुका है और अब 'सीमित' प्रतिरोध की दिशा में आगे बढ़ चुका है।

जल-थल-वायु, हर जगह शक्तिशाली
रिपोर्ट में कहा गया है कि, चीन के पास अब जमीन, समुद्र और हवा से परमाणु हथियार लॉन्च करने का साधन है। जबकि 2020 की रिपोर्ट में कहा गया था कि चीन जल-थल और आकाश में परमाणु क्षमता विकसित करने की कोशिश कर रहा है। रिपोर्ट में चिंता जाहिर करते हुए कहा गया है कि, पिछले साल चीन मुख्य रूप से CH-AS-X-13 एयर-लॉन्च बैलिस्टिक मिसाइल का लिकास कर रहा था, जो अब विकसित हो चुका है, जिसे अब H-6N बॉम्बर एयरक्राफ्ट पर "ऑपरेशनली फील्ड" किया जा रहा है। इसके साथ ही 2021 में पीएलए की वायु सेना, जिसे पीएलएएएफ कहा जाता है, वो इस मिसाइल के उपयोग के लिए "रणनीति और प्रक्रियाओं का विकास" कर रही है। हालांकि, अमेरिका की इस रिपोर्ट पर चीन ने सख्त प्रतिक्रिया दी है और इस रिपोर्ट को पूर्वाग्रह से ग्रस्त बताया है। चीनी रक्षा मंत्रालय, यानि एमएनडी के प्रवक्ता कर्नल वू कियान ने पांच नवंबर को कहा था कि, अमेरिका के द्वारा चीन की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति और सैन्य रणनीति पर गलत टिप्पणी की गई है।

विनाशकारी हथियारों का निर्माण
चीन ने पेंटागन की रिपोर्ट पर भले ही सख्त प्रतिक्रिया दी है, लेकिन चीन इस असलियत से इनकार नहीं कर सकता है कि, वो भारी तादाद में विध्वंसक हथियारों का अभी भी निर्माण कर रहा है। पेंटाहन की रिपोर्ट में कहा गया है कि, चीन में डीएफ-26 और डीएफ-17 हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल का निर्माण पिछले साल से किया जा रहा है। इसके साथ ही चीन में मीडियम रेंज की बैलिस्टिक मिसाइलों का भी तेजी से निर्माण किया जा रहा है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ची, 150 से 200 की संख्या में मिसाइल लॉन्चर, 150 से 600 की संख्या में मिसाइल और 200 से 300 की संख्या में इंटरमीडिएट रेंज बैलिस्टिक मिसाइल का निर्माण कर रहा है। यूएस रिपोर्ट में कहा गया है कि, चीन का डीएफ-17 मिसाइल अब करीब करीब तैयार हो चुका है और ये परमाणु बम को ले जाने में सक्षम है।

चीन का हथियार कार्यक्रम
पेंटागन की रिपोर्ट में चीन के मिसाइल प्रोग्राम पर चिंता जताते हुए कहा गया है कि, साल 2020 में चीन ने 250 से ज्यादा मिसाइलों को लॉंच किया है, जो दुनिया के सभी देशों को मिला देने से भी ज्यादा है। खासकर साउथ चायना सी में चीन ने सबसे ज्यादा मिसाइल परीक्षण किए हैं। पेंटागन की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन की नौ-सेना के पास अब 355 लड़ाकू जहाज हैं, जो पिछले साल की तुलना में पांच ज्यादा है। इसके अलावा 85 गश्ती लड़ाकू जहाज हैं। सबसे खास बात ये है कि पिछले एक साल में चीन ने सतह पर मार करने वाले लड़ाकू जहाजों की संख्या 15 से बढ़ाकर 145 कर ली है। और रिपोर्ट में कहा गया है कि, 2030 तक चीन की नौसेना के पास 460 प्रमुख जहाज हो सकते हैं। पहली बार अमेरिकी रिपोर्ट में कहा गया है कि, चीन के पास अब चीन में समुद्र के अंदर परमाणु हथियारों को रोकने की क्षमता आ गई है। वहीं, चीन के पास छह प्रकार की 094 परमाणु-संचालित बैलिस्टिक-मिसाइल पनडुब्बियों (SSBN) के रूप में है। प्रत्येक बैलिस्टिक मिसाइल 12 JL-2 पनडुब्बी से लॉच होने वाली है।












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