पापुआ न्यू गिनी ने प्रधानमंत्री मोदी को बताया ग्लोबल लीडर, सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजा, जानिए मायने
प्रशांत द्वीप समूह के देशों के सामने आने वाली समस्याओं पर प्रकाश डालते हुए, प्रधानमंत्री जेम्स मारापे ने कहा, कि "हम वैश्विक पावरप्ले के शिकार हैं, आप (पीएम मोदी) ग्लोबल साउथ के नेता हैं...

Papua New Guinea PM Modi Highest Civilian Honour: प्रशांत क्षेत्र में स्थिति द्वीप देश पापुआ न्यू गिनी में भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का दिल खोलकर स्वागत किया गया है।
कल जब पापुआ न्यू गिनी की राजधानी में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का विमान उतरा और पीएम मोदी इस प्रशांत देश की जमीन पर उतरे, तो वहां के प्रधानमंत्री जेम्स मारापे ने पैर छूकर उनका स्वागत किया।
वहीं, अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फिजी और पापुआ न्यू गिनी ने अपने सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित किया है।
तीसरे भारत-प्रशांत द्वीप समूह सहयोग (FIPIC) शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए पापुआ न्यू गिनी की यात्रा के दौरान पीएम मोदी को द्वीप देशों के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से सम्मानित किया गया है, जो प्रशांत क्षेत्र में भारत के बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है।
पीएम मोदी को उनके वैश्विक नेतृत्व के लिए उनके फिजियन समकक्ष सीतवेनी राबुका द्वारा "द कम्पेनियन ऑफ द ऑर्डर ऑफ फिजी" से सम्मानित किया गया, जो एक गैर-फिजीयन के लिए एक दुर्लभ सम्मान है।
पापुआ न्यू गिनी ने सर्वोच्च सम्मान से नवाजा
पापुआ न्यू गिनी ने अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान, ग्रैंड कम्पेनियन ऑफ द ऑर्डर ऑफ लोगहू (जीसीएल) को पीएम मोदी को प्रशांत द्वीप देशों की एकता के कारण और ग्लोबल साउथ के कारणों की अगुवाई करने के लिए सम्मानित किया। द्वीप राष्ट्र के बहुत कम अनिवासियों को यह पुरस्कार मिला है।
पीएम मोदी को अभी तक कई देशों ने सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजा है। ये सम्मान पीएम मोदी के नेतृत्व और उनके विजन को दर्शाती हैं, जिसने वैश्विक मंच पर भारत के उदय को मजबूत किया है। यह दुनिया भर के देशों के साथ भारत के बढ़ते संबंधों को भी दर्शाता है।
वहीं, बात अगर भारत और पापुआ न्यू गिनी के संबंधों की करें, तो भारत के पापुआ न्यू गिनी के साथ अच्छे रिश्ते रहे हैं, हालांकि ये पहली बार है, जब किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने पापुआ न्यू गिनी का दौरा किया है।
An honour emblematic of depth of 🇮🇳-🇵🇬 relationship.
Governor-General Sir Bob Dadae of Papua New Guinea conferred PM @narendramodi with countrys highest civilian award, Grand Companion of the Order of Logohu (GCL). pic.twitter.com/CZGnfcd44e
— Arindam Bagchi (@MEAIndia) May 22, 2023
भारत-पापुआ न्यू गिनी के कैसे हैं रिश्ते
आपको बता दें, कि भारत ने पापुआ न्यू गिनी में साल 1996 में दूतावास खोला था, जबकि पापुआ न्यू गिनी ने दिल्ली में अपना दूतावास साल 2006 में खोला था। वहीं, भारत के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी पहले ऐसे भारतीय राष्ट्रपति थे, जिन्होंने पापुआ न्यू गिनी का 2016 में दौरा किया था।
इसके अलावा, भारत और पापुआ न्यू गिनी के बीच महत्वपूर्ण व्यापारिक रिश्ते भी रहे हैं, हालांकि हाल के कुछ सालों में ये व्यापार कम हुआ है, जिसकी सबसे बड़ी वजह दोनों देशों के बीच की दूरी है।
पापुआ न्यू गिनी में भारत टेक्सटाइल पदार्थ, मशीनरी, खाद्य पदार्थ, दवा, सर्जिकल आइटम्स, साबुन जैसे सामानों की सप्लाई करता है, जबकि भारत पापुआ न्यू गिनी से कॉफी, टिंबर, समुद्री सामान, कोकोआ, सोना, कांसा का आयात करता है।
वहीं, कोविड संकट के दौरान भारत ने 1 लाख 31 हजार कोविड वैक्सीन की खुराक पापुआ न्यू गिनी को भेजी थी, जिससे दोनों देशों के संबंध मधुर हुए हैं। वहीं, अब भारत ने आईटी सेंटर बनाने का भी ऐलान किया है।
हालांकि, पिछले कुछ सालों में दोनों देशों के बीच का व्यापार कम हुआ है और बीबीसी के मुताबिक, साल 2014-15 में भारत, पापुआ न्यू गिनी को 5.219 करोड़ डॉलर के सामानों का निर्यात करता था, जो अब घटकर 2019-20 में ये घटकर 3.857 करोड़ डॉलर तक पहुंच गया है।
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वहीं, अब पापुआ न्यू गिनी के प्रधानमंत्री जेम्स मारापे ने पीएम मोदी से बड़े अंतर्राष्ट्रीय मंचों से प्रशांत क्षेत्र के देशों की आवाज बनने की अपील की है। उन्होंने पीएम मोदी से जी20 और जी7 जैसे वैश्विक मंचों पर छोटे द्वीप राष्ट्रों के लिए एक सक्रिय आवाज बनने का आग्रह करते हुए, जेम्स मारापे ने कहा, कि "आप वह आवाज हैं जो हमारे मुद्दों को उच्चतम स्तर पर पेश कर सकते हैं, क्योंकि बड़ी अर्थव्यवस्थाएं, जियो-पॉलिटिक्स के आधार पर इकोनॉमी और कॉमर्श जैसे मामलों पर चर्चा करती हैं।"
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, भारतीय प्रधानमंत्री का ये दौरा काफी कामयाब रहा है और प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को काउंटर करने के लिए भारत को इससे बड़ा मौका नहीं मिल सकता है।












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