फिर से अशांत होगा पाकिस्तान? तहरीक-ए-तालिबान के साथ नजर आए अफगान तालिबान के नेता, डरे इमरान
पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक अफगानिस्तान पर कब्जा करने के बाद तालिबान ने 2300 से ज्यादा तहरीक-ए-तालिबान के लड़ाकों को रिहा कर दिया है।
इस्लामाबाद, अगस्त 21: काबुल पर कब्जे के बाद तालिबान के हौसले बुलंद हैं और अब पाकिस्तान तालिबान, जिसे तहरीक-ए-तालिबान कहा जाता है, वो एक बार फिर से एक्टिवेट हो चुका है। जिसके बाद दहशत में आए इमरान खान सरकार ने काबुल में बनने वाली नई सरकार से मांग की है कि वो जल्द से जल्द तहरीक-ए-तालिबान पर बैन लगाए। पाकिस्तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान सरकार ने शुक्रवार को कहा कि वह अफगानिस्तान में आने वाली सरकार से प्रतिबंधित तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के खिलाफ कार्रवाई करने को कहेगा। पाकिस्तानी अखबार के मुताबिक, पाकिस्तान तालिबान के दर्जनों आतंकी अफगान तालिबान के साथ देखे गये हैं, जिसके बाद पाकिस्तान में आने वाले वक्त में भीषण आतंकी घटनाओं की संभावना जताई जा रही है।

तहरीक-ए-तालिबान से डरा पाकिस्तान
दरअसल, जिस तरह से अफगान तालिबान अफगानिस्तान के अंदर इस्लामिक अमीरात की स्थापना करना चाहता है, ठीक उसी तरह से तहरीक-ए-तालिबान भी पाकिस्तान के अंदर शरिया कानून से चलने वाले इस्लामिक अमीरात की स्थापना करना चाहता है। दोनों संगठनों की मांग और मांग मंगवाने का तरीका एक ही है। लेकिन, तहरीक-ए-तालिबान को पाकिस्तान आतंकी संगठन बताता है, जबकि अफगान तालिबान का खुला समर्थन करता है। लेकिन, पाकिस्तान के विशेषज्ञों का कहना है कि इन दोनों संगठनों में जो भेद करते हैं, वो मुर्खता करते हैं, क्योंकि दोनों संगठन एक ही हैं। वहीं, पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता जाहिद हफीज चौधरी ने कहा है कि वो अफगानिस्तान में बनने वाली नई सरकार से मांग करेंगे कि तहरीक-ए-तालिबान के खिलाफ एक्शन ले।

पाकिस्तान को किस बात का डर
दरअसल, तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा करने के बाद अफगानिस्तान के अलग अलग जेलों में बंद तहरीक-ए-तालिबान के कुख्यात 2300 आतंकवादियों को रिहा कर दिया है। इन आतंकियों में तहरीक-ए-तालिबान का कुख्यात रहा फकीर मोहम्मद भी शामिल है, जिसके ऊपर पाकिस्तान में दर्जनों बम ब्लास्ट को अंजाम देने का आरोप है। फकीर मोहम्मद अब तक काबुल जेल में बंद था, लेकिन तालिबान ने उसे रिहा कर दिया है। पाकिस्तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, तालिबान ने जिन-जिन आतंकियों को रिहा किया है, वो सभी आतंकी अफगान तालिबान के साथ देखे गये हैं, जिसके बाद अब इमरान सरकार को पाकिस्तान के अंदर हिंसा का डर सता रहा है।

पाकिस्तान विदेश मंत्रालय का बयान
पाकिस्तान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि '' पाकिस्तान, पिछली अफगान सरकार के साथ पाकिस्तान के अंदर आतंकवादी गतिविधियों के लिए टीटीपी द्वारा अफगान धरती के उपयोग के मुद्दे को उठाता रहा है और यह सुनिश्चित करने के लिए काबुल में आने वाली सरकार के साथ भी इस मुद्दे को उठाता रहेगा कि टीटीपी को कहीं से भी संरक्षण ना मिले। अफगानिस्तान में पाकिस्तान के खिलाफ काम करने के लिए''। पाकिस्तान सबसे ज्यादा मौलवी फकीर मोहम्मद की रिहाई से डरा हुआ है। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि ''हमें फकीर मोहम्मद की रिहाई की खबर मिली है, हमने पाकिस्तान के अंदर आतंकी गतिविधियों में लगे किसी भी व्यक्ति या समूह का हमेशा विरोध किया है और हम आगे भी विरोध करेंगे''। पाकिस्तान ने अपने बयान में कहा है कि ''हमें उम्मीद है कि एक बार पाकिस्तान में सरकार बनने के बाद अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल पाकिस्तान के खिलाफ नहीं होने दिया जाएगा।''

तालिबान ने छोड़े कई खतरनाक आतंकी
पाकिस्तानी न्यूज चैनल समा टीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, तालिबान अब तक पाकिस्तान में सक्रिय रहे कई आतंकी कमांडरों, जिनमें प्रमुख कमांडर बैतुल्लाह महसूद के ड्राइवर कमांडर जाली, कमांडर वकास महसूद, हमजा महसूद, जरकावी महसूद, जैतुल्ला महसूद, कारी हमीदुल्ला महसूद, डॉ हमीद महसूद और मजहर महसूद शामिल हैं। ये सभी तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान से संबंध रखते हैं। इससे पहले पत्रकार अनीस-उर-रहमान ने एक ट्वीट में दावा किया था, कि अफगान तालिबान ने अब तक वजीरिस्तान, सरगोधा, स्वात और बाजौर से लगभग 2,300 प्रमुख टीटीपी कमांडरों और नेताओं को रिहा किया है।

पाकिस्तान में शरिया कानून की मांग
आपको बता दें कि पाकिस्तान की सरकार दूसरे मुस्लिम देशों में शरिया कानून का तो समर्थन करती है लेकिन अभी तक पाकिस्तान के अंदर शरिया कानून लागू नहीं किया गया है। जबकि, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान, पाकिस्तान में शरीयत कानून लागू करना चाहता है। इसी संगठन ने मलाला यूसुफजई पर जानलेवा हमला किया था और ये संगठन कितना खतरनाक है, इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि ये बच्चों के ऊपर हमला करता है। स्कूलों को निशाना बनाता है। इसकी स्थापना दिसम्बर 2007 में की गई थी। 16 दिसंबर 2014 को पाकिस्तान के पेशावर में पाकिस्तान तालिबान ने ही एक सैनिक स्कूल पर इसी संगठन ने हमला किया था, जिसमें तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के 6 आतंकवादियों ने स्कूल के अंदर 126 बच्चों की निर्मम हत्या कर दी थी।

तालिबान की जीत से उत्साहित
अफगान तालिबान की जीत के बाद पाकिस्तान तालिबान काफी उत्साहित हो चुका है और पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक, एक बार फिर से टीटीपी के आतंकी एकजुट आने शुरू हो गये हैं। माना जा रहा है कि ये आतंकी संगठन आने वाले वक्त में पाकिस्तान को काफी ज्यादा अशांत कर सकता है। चूंकी अब अफगानिस्तान में इसी पार्टी की सत्ता है, लिहाजा इसके लिए पाकिस्तान को निशाना बनाना काफी आसान हो जाएगा। पिछले हफ्ते जब इमरान खान ने अफगान तालिबान का समर्थन कर दिया था, तब पाकिस्तानी मीडिया ने इमरान खान की जमकर आलोचना की थी और सवाल उठाया था कि अगर अफगान तालिबान सही है, तो फिर पाकिस्तान तालिबान कैसे गलत हो गया और अगर इमरान खान अफगानिस्तान के इस्लामिक अमीरात बनने का समर्थन करते हैं तो फिर इमरान खान को पाकिस्तान को भी इस्लामिक अमीरात घोषित करना चाहिए।
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