अफगानिस्तान संकट पर 'पीड़ित' बनने की कोशिश में पाकिस्तान, इमरान खान की रणनीति का खुलासा
अफगानिस्तान संकट पर पाकिस्तान 'पीड़ित कार्ड' खेलने की कोशिश करेगा और दुनिया से पैसे उगाहेगा। खुफिया रिपोर्ट में इमरान सरकार की रणनीति का खुलासा हुआ है।
नई दिल्ली, जुलाई 12: अफगानिस्तान में संकट दिनों दिन गहराता जा रहा है और माना जा रहा है कि अफगानिस्तान के एक बड़े हिस्से पर तालिबान बहुत जल्द अपना नियंत्रण स्थापित कर लेगा। इसके साथ ही अफगानिस्तान में गृहयुद्ध के हालात बनने लगे हैं और बहुत बड़े शरणार्थी संकट की तरफ दुनिया बढ़ रही है। वहीं, रिपोर्ट है कि पाकिस्तान पूरी ताकत के साथ तालिबान की मदद कर रहा है और पाकिस्तान में मौजूद आतंकी संकठन तालिबान के साथ मिलकर अफगान सरकार के खिलाफ लड़ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान खुद को पीड़ित दिखाने की कोशिश में है और पाकिस्तान विक्टिम कार्ड खेलने की पूरी प्लानिंग कर रहा है।

पाकिस्तान का विक्टिम कार्ड
ऐसे में जब अफगानिस्तान पर तालिबान के आतंकी हावी हो रहे हैं, तो भविष्य में पाकिस्तान की रणनीति खुद को पीड़ित घोषित करने और दुनिया के सामने यह दिखाने में है, कि अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद अफगानिस्तान हिंसा की आग में जल रहा है। सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान सरकार की रणनीति इस मुद्दे पर वैश्विक समुदाय से सहानुभूति लेने की कोशिश करना है। दरअसल पाकिस्तान पर एफएटीएफ की तलवार लटकी हुई है और पाकिस्तान एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट से बाहर निकलने के लिए बेताब है। यही कारण है कि पाकिस्तान खुद को एक सभ्य राष्ट्र के रूप में दुनिया के सामने पेश करना चाहता है, जो दुनिया का भला चाहता है। सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान इस धोखे से आर्थिक मदद लेने की कोशिश करेगा और एफएटीएफ से बाहर निकलने की वकालत करेगा।

दुनिया को धोखा देने की कोशिश
सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान का यह छलावा आने वाले दिनों में मीडिया में खूब देखने को मिलेगा। तालिबान के साथ अपने संबंधों को बढ़ाने के लिए पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने बकायदा कार्ययोजना तैयार कर रखी है और तालिबान को कैसे अफगानिस्तान में और मजबूत किया जाए, और अपने प्लान को कैसे लागू किया जाए, ताकि दुनिया के सामने खुद पीड़ित साबित करते हुए तालिबान की मदद हो जाए। तालिबान की सफलताओं और अच्छे कामों का श्रेय पाकिस्तान लेगा। यह कमियों के लिए वैश्विक समुदाय से सहानुभूति हासिल करने का भी प्रयास करेगा

''अफगानिस्तान की स्थिति नियंत्रण से बाहर''
पाकिस्तान की सरकार पूरी ताकत के साथ इस रणनीति के मुताबिक काम कर रही है और इसी रणनीति के तहत पाकिस्तान के एनएसए मोईद युसूफ ने शुक्रवार को अफगानिस्तान के बिगड़ते हालात पर चिंता जताया और अफगानिस्तान की मौजूदा स्थिति को पाकिस्तान के नियंत्रण से बाहर करार दिया। मोईद युसूफ का कहना है कि पाकिस्तान अमेरिका के हटने के बाद बदलते हालात को लेकर काफी चिंतित है। मोईगद युसूफ ने यह दिखाने की कोशिश की, कि अगर अफगानिस्तान गृहयुद्ध की आग में जलता है, तो उससे सबसे ज्यादा प्रभावित पाकिस्तान ही होगा। उन्होंने यह भी कहा कि अफ़ग़ान सरकार को शांति के लिए पाकिस्तान के साथ संबंध सुधारने होंगे।

पाकिस्तान के आस्तीन में सांप
पाकिस्तान हर वक्त वैश्विक समुदाय के सामने खुद को पीड़ित बताकर पैसे उगाहने की फिराक में रहता है और अफगानिस्तान संकट को पाकिस्तान एक मौके की तरफ देख रहा है। पाकिस्तान के एनएसए मोईद युसूफ ने कहा है कि अफगानिस्तान के हालात पाकिस्तान के काबू से बाहर हैं और पाकिस्तान सरकार की इस रणनीति के तहत विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने हाल ही में कहा था कि, अफगानिस्तान में गृहयुद्ध जैसे हालात बनने जा रहे हैं। ऐसे में पाकिस्तान शरणार्थी संकट को संभाल नहीं पाएगा। पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने इसके लिए पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति का हवाला दिया, जिसका साफ मतलब था कि पाकिस्तान को पैसे चाहिए। पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने यह भी कहा था कि अफगानिस्तान में हालात बिगड़ रहे हैं जिसके लिए पाकिस्तान जिम्मेदार नहीं है।












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