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पाकिस्तान में लागू हो सकता है मार्शल लॉ, सुप्रीम कोर्ट ने इमरान खान के पक्ष में सुनाया फैसला, शहबाज हारे

बिलावल भुट्टो साफ कर चुके हैं, कि उनकी सरकार तीन जजों के बेंच के फैसले को नहीं मानेगी और ऐसी स्थिति में देश में आपातकाल या मॉर्शल लॉ लागू हो सकता है।

Pakistan News

Pakistan News: पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को इमरान खान को बहुत बड़ी जीत और शहबाज शरीफ को सबसे बड़ा झटका दिया है। सुप्रीम कोर्ट ऑफ पाकिस्तान ने पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा चुनाव पर पाकिस्तान के चुनाव आयोग के फैसले को अमान्य घोषित कर दिया, जो शहबाज शरीफ के लिए दिन में तारे दिखाने वाला फैसला है। इमरान खान के लिए सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला बहुत बड़ी जीत के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि वो लगातार चुनाव की मांग कर रहे थे।

शहबाज शरीफ को बड़ा झटका

इस फैसले की घोषणा पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश उमर अता बांदियाल की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ और न्यायमूर्ति इजाज उल अहसन और न्यायमूर्ति मुनीब अख्तर ने की है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में 8 अक्टूबर को चुनाव कराने के पाकिस्तानी चुनाव आयोग के फैसले को "असंवैधानिक" घोषित कर दिया है और 14 मई को पंजाब में चुनाव कराने का आदेश दिया है। पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को 20 अप्रैल से 15 मई के बीच इन चुनावों को करवाने का आदेश दिया है, जिसके बाद सवाल उठ रहे हैं, कि क्या शहबाज शरीफ देश की सर्वोच्च अदालत का आदेश मानेंगे? शीर्ष अदालत ने कहा, "संविधान और कानून [ईसीपी] को चुनाव की तारीख को स्थगित करने का अधिकार नहीं देते हैं।" अदालत ने टिप्पणी की है, कि ईसीपी के आदेश ने 13 दिन बर्बाद कर दिए हैं और अदालत ने स्पष्ट आदेश सुनाते हुए कहा, कि इलेक्शन कमीशन ने मतदान की तारीख को 8 अक्टूबर तक ट्रांसफर करके एक असंवैधानिक फैसला लिया है।

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इमरान खान की बड़ी जीत

सुप्रीम कोर्ट के फैसले में कहा गया है, कि रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले के खिलाफ अपील दायर करने की आखिरी तारीख 10 अप्रैल है और चुनाव न्यायाधिकरण 17 अप्रैल को अपीलों पर फैसले की घोषणा करेगा। फैसले में ये भी कहा गया है, कि "पंजाब और केपी में चुनाव पारदर्शी, निष्पक्ष और कानून के मुताबिक होने चाहिए।" सुप्रीम कोर्ट ने शहबाज सरकार को आदेश दिया है, कि वो पाकिस्तान चुनाव आयोग को 10 अप्रैल तक 21 अरब रुपये जारी करे, ताकि वो चुनाव की तैयारी कर सके। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने 11 अप्रैल तक धनराशि जारी किए गये हैं या नहीं, इसपर शहबाज सरकार से स्टेटस रिपोर्ट भी मांगी है। फैसले में यह भी कहा गया है, कि फंड नहीं देने की स्थिति में सुप्रीम कोर्ट संबंधित अधिकारियों को निर्देश जारी करेगा। शीर्ष अदालत के फैसले में कहा गया है, कि "पंजाब सरकार को चुनाव आयोग को एक सुरक्षा योजना देनी चाहिए।" इसमें कहा गया है, कि पंजाब के अंतरिम कैबिनेट और मुख्य सचिव को 10 अप्रैल तक चुनावी कर्मचारियों के बारे में ईसीपी को रिपोर्ट करना चाहिए। शीर्ष अदालत ने संघीय सरकार को प्रांतों में चुनाव कराने के लिए रेंजर्स, एफसी कर्मियों और सशस्त्र बलों सहित संसाधन प्रदान करने और समर्थन देने का भी आदेश दिया है।

शहबाज शरीफ के लिए क्यों है झटका?

पाकिस्तान में पिछले एक साल से चुनाव को लेकर राजनीति तेज है और इमरान खान बार बार चुनाव कराने की मांग कर रहे हैं। इमरान खान ने चुनाव कराने की मांग को लेकर खैबर पख्तूनख्वा और पंजाब में विधानसभा को भंग कर दिया, जहां उनकी सरकार थी, लेकिन शहबाज शरीफ चुनाव कराने के लिए तैयार नहीं हो रहे हैं। हालांकि, चुनाव आयोग ने नियमों के तहत विधानसभा भंग होने के बाद 30 अप्रैल को पंजाब में चुनाव की तारीख निर्धारित की थी, लेकिन बाद में इसे 8 अक्टूबर तक स्थगित कर दिया गया। इमरान खान ने आरोप लगाया, कि चुनाव आयोग ने चुनाव की तारीख बढ़ाने का फैसला शहबाज शरीफ के कहने पर लिया, लिहाजा इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) चुनाव आयोग के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई। शीर्ष अदालत, जिसने 27 मार्च को पीटीआई की याचिका पर कार्यवाही शुरू की थी, उसने एक दिन पहले यह कहते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया था, कि वह अगले दिन, 4 अप्रैल को इसकी घोषणा करेगी।

सुप्रीम कोर्ट पर सरकार का हमला

प्रारंभ में, सुप्रीम कोर्ट की तरफ से इस मामले पर सुनवाई के लिए पांच सदस्यीय पीठ का गठन किया गया था, जिसमें पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश उमर अता बंदियाल, न्यायमूर्ति अमीन-उद-दीन खान, न्यायमूर्ति जमाल खान मंडोखैल, न्यायमूर्ति मुनीब अख्तर और न्यायमूर्ति इजाजुल अहसान शामिल थे, लेकिन 30 मार्च को न्यायमूर्ति अमीन ने संविधान के अनुच्छेद 184(3) के तहत कार्यवाही को रोकने वाली तीन सदस्यीय पीठ के एक फैसले का हवाला देते हुए खुद को कार्यवाही से अलग कर लिया। फिर, बेंच को चार सदस्यों - सीजेपी बांदियाल, जस्टिस मंडोखैल, जस्टिस अख्तर और जस्टिस अहसान तक सीमित कर दिया गया, लेकिन इसके ठीक एक दिन बाद, 31 मार्च को जस्टिस मंडोखिल ने भी खुद को इस मामले से अलग कर लिया और कहा, कि चूंकि पीठ के गठन से पहले उनसे सलाह नहीं ली गई थी, इसलिए वह खुद को अलग कर रहे हैं। लिहाजा, अब तीन सदस्यीय पीठ ने इस मुद्दे पर फैसला सुनाया है। वहीं, शहबाज शरीफ का आरोप है, की चीफ जस्टिस, इमरान खान के पक्ष में हैं और उनकी सरकार ने अपने ही देश के सुप्रीम कोर्ट पर अविश्वास जता दिया है, लिहाजा फिलहाल कुछ नहीं कहा जा सकता है, कि शहबाज शरीफ चुनाव करवाने के लिए फैसे जारी करेंगे या नहीं?

मॉर्शल लॉ की क्यों है आशंका?

पाकिस्तान में एक बार फिर से सैन्य शासन लगने की आशंका बिलावल भुट्टो ने जताई है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी ने पूर्ण अदालत का गठन नहीं होने पर देश में आपातकाल या "मार्शल लॉ" की आशंका व्यक्त की है और यदि ऐसा होता है, तो यह पाकिस्तान को आर्थिक संकट में और भी ज्याद धकेल देगा। बिलावल भुट्टो ने कहा है, कि उनकी पार्टी खैबर पख्तूनख्वा और पंजाब चुनावों पर तीन न्यायाधीशों के किसी भी फैसले को स्वीकार नहीं करेगी। और सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों के बैंच ने ही ये फैसला सुनाया है, लिहाजा ये टकराव सीधे तौर पर सुप्रीम कोर्ट और सरकार के बीच है, लिहाजा पाकिस्तान बहुत मुश्किल स्थिति में फंसने वाला है। बिलावल भुट्टो ने कहा, कि संवैधानिक संकट के कारण देश को "आपात जैसी स्थिति" या "मार्शल लॉ" का सामना करना पड़ सकता है, जो यह तब हो सकता है, जब सुप्रीम कोर्ट पाकिस्तान के चुनाव आयोग (ईसीपी) के खिलाफ पीटीआई की याचिका पर सुनवाई के लिए एक बड़ी बेंच का गठन नहीं करता है। ) और पंजाब विधानसभा के चुनाव स्थगित करने का फैसला नहीं करता है।

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