इमरान खान के साथ फिर खेला हो गया, जरदारी के गेम से शहबाज शरीफ के बेटे ने बचाई CM की कुर्सी
धानसभा उपचुनाव में 20 सीटों में से 15 सीटों पर जबरदस्त जीत हासिल करने के बाद ये तय माना जा रहा था, कि इमरान खान की पार्टी की ही सरकार पंजाब में बनेगी, लेकिन जरदारी ने गेम कर दिया।
इस्लामाबाद, जुलाई 23: पाकिस्तान के सबसे बड़े पंजाब प्रांत में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के साथ एक बार फिर से खेला कर दिया गया है। पिछले हफ्ते हुए उपचुनाव में बंपर जीत हासिल करने वाले इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ और पीएमलएल-क्यू को तगड़ा झटका लगा है और पूर्व राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी की गेम के बदौलत शहबाज शरीफ के बेटे हमजा शरीफ अपनी मुख्यमंत्री की कुर्सी बचाने में कामयाब हो गये हैं। हमजा शरीफ ने इमरान खान की पार्टी के उम्मीदवार परवेज इलाही को हरा दिया है, लेकिन ये मतदान काफी ज्यादा विवादित रहा है और इस मामले का सुप्रीम कोर्ट में जाना तय माना जा रहा है।

शहबाज के बेटे ने बचाई सीएम की कुर्सी
पाकिस्तान के पंजाब विधानसभा में शुक्रवार का दिन भारी नाटकीय रहा पीएमएल-एन के उम्मीदवार हमजा शाहबाज ने पंजाब विधानसभा के अध्यक्ष चौधरी परवेज इलाही को तीन वोटों से हराकर पंजाब के मुख्यमंत्री पद को बरकरार रखा है। लेकिन, ये मतगणना विवादित इसलिए हो गया और इमरान खान के साथ खेला इसलिए कर दिया गया है, क्योंकि पंजाब विधानसभा के उपाध्यक्ष दोस्त मजारी ने संविधान के अनुच्छेद 63 ए का हवाला देते हुए पीएमएल-क्यू के 10 सदस्यों के वोट को खारिज कर दिया, जो इमरान खान के उम्मीदवार को समर्थन दे रहे थे। नतीजतन, हमजा को 179 वोट मिले, जबकि इलाही, जिसे पीटीआई का समर्थन प्राप्त था, उन्हें सिर्फ 176 वोट मिले। मजारी ने जैसे ही परिणाम की घोषणा की, पीटीआई नेता राजा बशारत ने डिप्टी स्पीकर के साथ जमकर बहसबाजी की और कहा कि, चूंकि चौधरी साजिद पीएमएल-क्यू के संसदीय नेता थे, इसलिए इलाही के मामले में अनुच्छेद 63 (ए) लागू नहीं हुआ।

वोट को क्यों किया गया खारिज?
पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब पंजाब विधानसभा के अंदर वोटिंग की प्रक्रिया चल रही थी, उसी दौरान खबर आई, कि पीएमएल-क्यू के अध्यक्ष चौधरी शुजात हुसैन ने चौधरी परवेज इलाही को समर्थन करने से खुद को अलग कर लिया। जिसके बाद विधानसभा के उपाध्यक्ष दोस्त मजारी ने संविधान के अनुच्छेद 63 ए का हवाला देते हुए पीएमएल-क्यू के 10 सदस्यों के वोट को खारिज कर दिया और शहबाज शरीफ के बेटे को सिर्फ 3 वोट से जीत मिल गई। आपको बता दें कि, पीएमएल-क्यू के अध्यक्ष चौधरी शुजात हुसैन ने एक दिन पहले ही आसिफ अली जरदारी से मुलाकात की थी और पाकस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वहीं पर इमरान खान के साथ खेला हो गया।

इमरान खान के साथ खेला हो गया
ऐसी रिपोर्ट है, कि आसिफ अली जरदारी के कहने पर ही चौधरी शुजात हुसैन ने अपनी ही पार्टी के उम्मीदवार को समर्थन नहीं करने के लिए अपनी पार्टी के विधायकों को चिट्ठी लिख ही और उसी चिट्ठी को आधार बनकार पंजाब विधानसभा के उपाध्यक्ष ने 10 विधायकों के वोट को नहीं गिना। वहीं, विधानसभा के उपाध्यक्ष मजारी के पीएमएल-क्यू सदस्यों के 10 वोटों की गिनती नहीं करने के फैसले के बाद इमरान खान की पार्टी पीटीआई ने कहा है किस वह फैसले को चुनौती देने के लिए देश की शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाएगा। वहीं, पंजाब विधानसभा में हाई-वोल्टेज नाटक होने के बाद आसिफ अली जरदारी के बेटे बिलावल भुट्टो ने ट्वीट करते हुए कहा कि, 'एक जरदारी सबपर भारी'। वहीं, आपको बता दें कि, पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट मे मई महीने में फैसला सुनाते हुए कहा था, कि अगर किसी पार्टी के असंतुष्ट विधायक/सांसद पार्टी लाइन के खिलाफ जाकर वोट करते हैं, तो उन वोटों की गिनती नहीं की जा सकती है, लिहाजा आसिफ अली जरदारी का ये गेम कामयाब माना जा रहा है।
इमरान खान ने लगाए थे गंभीर आरोप
आपको बता दें कि, विधानसभा उपचुनाव में 20 सीटों में से 15 सीटों पर जबरदस्त जीत हासिल करने के बाद ये तय माना जा रहा था, कि इमरान खान की पार्टी की ही सरकार पंजाब में बनेगी, लेकिन ऐन वक्त पर इमरान खान के सपने को कुचल दिया गया। वहीं, इमरान खान ने वोटिंग से एक दिन पहले, यानि गुरुवार को आरोप लगाया था, कि उनकी पार्टी के विधायकों को विपक्ष के लोग खरीदने की कोशिश कर रहे हैं और एक एक विधायक को 50-50 करोड़ रुपये का ऑफर दिया जा रहा है और उन्होंने इस खरीद के पीछे सीधे तौर पर आसिफ अली जरदारी का नाम लिया था। वहीं, अब इमरान खान की पार्टी पंजाब विधानसभा में मिली हार के खिलाफ जमकर प्रदर्शन कर रही है और कराची की गलियों में विधानसभा उपाध्यक्ष और आसिफ अली जरदारी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, कराची में इमरान खान की पार्टी के हजारों समर्थक सड़कों पर उतर आए हैं और विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।












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