Pakistan public debt 2025: दिवालिया होने की कगार पर पाकिस्तान? हर नागरिक पर चढ़ा ₹3.33 लाख का कर्ज
Pakistan public debt 2025: पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय की ताज़ा 'राजकोषीय नीति रिपोर्ट' देश की चरमराती अर्थव्यवस्था की एक भयावह तस्वीर पेश की है। वित्त वर्ष 2024-25 में पाकिस्तान का कुल सार्वजनिक ऋण खतरनाक स्तर पर पहुंचकर जीडीपी का 70.7% हो गया है। रिपोर्ट के अनुसार, भारी ब्याज भुगतान और मुद्रा के अवमूल्यन ने कर्ज के जाल को और गहरा कर दिया है।
सरकार राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने में विफल रही है, जो कानूनी सीमा से 3.1 ट्रिलियन रुपये ऊपर निकल गया। यह स्थिति न केवल आर्थिक अस्थिरता को दर्शाती है, बल्कि सरकार के उन दावों की भी पोल खोलती है जिसमें उसने मितव्ययिता और खर्चों में कटौती की बात कही थी।

Pakistan economic crisis: बढ़ता कर्ज और आम नागरिक पर बोझ
पाकिस्तान का कुल सार्वजनिक ऋण जून 2024 के 71.2 ट्रिलियन रुपये से उछलकर जून 2025 तक 80.5 ट्रिलियन रुपये तक पहुंच गया है। इसका सीधा और दर्दनाक असर आम जनता पर पड़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक, अब हर पाकिस्तानी नागरिक पर कर्ज का बोझ 13% बढ़कर 3,33,000 रुपये हो गया है। मंत्रालय ने स्वीकार किया है कि उधार लेने की बढ़ती प्रवृत्ति और उस पर चुकाए जाने वाले भारी ब्याज ने ऋण प्रबंधन को देश के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना दिया है।
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विकास पर भारी पड़ा रक्षा बजट
रिपोर्ट सरकार की प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल उठाती है। जहां देश के विकास और बुनियादी ढांचे (Development Expenditure) के लिए आवंटित 1.7 ट्रिलियन रुपये में से केवल 84% ही खर्च हो सका, वहीं रक्षा बजट ने अपनी सीमाएं पार कर दीं। रक्षा क्षेत्र के लिए निर्धारित 2.1 ट्रिलियन रुपये के मुकाबले 103% (2.2 ट्रिलियन रुपये) खर्च किए गए। यह आंकड़ा स्पष्ट करता है कि आर्थिक तंगी के बावजूद सैन्य खर्चों में कोई कटौती नहीं की गई, जबकि जन कल्याणकारी योजनाओं के बजट में कटौती हुई।
अनुशासनहीनता और दिखावे की मितव्ययिता
शहबाज शरीफ सरकार ने सत्ता संभालते समय वित्तीय अनुशासन और सादगी का वादा किया था, लेकिन हकीकत इसके उलट है। सरकार ने संसद द्वारा तय 3.5% की राजकोषीय घाटा सीमा का उल्लंघन करते हुए 2.7% अतिरिक्त घाटा दर्ज किया। मितव्ययिता के दावों के बीच नए विभागों का गठन, कैबिनेट का विस्तार और विलासिता (नई कारों व फर्नीचर) पर खर्च जारी रहा। यह विरोधाभास दर्शाता है कि सरकारी खजाने की स्थिति सुधरने के बजाय प्रशासनिक फिजूलखर्ची बढ़ती जा रही है।
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ऋण प्रबंधन की भावी चुनौतियां
भविष्य की अनिश्चितता को देखते हुए वित्त मंत्रालय अब 'मध्यम अवधि की ऋण प्रबंधन रणनीति' की बात कर रहा है। सरकार का लक्ष्य अपनी तत्काल वित्तपोषण आवश्यकताओं को कम करना और कर्ज चुकाने की अवधि (Maturity) को बढ़ाना है। रणनीति के तहत विभिन्न वित्तीय साधनों का उपयोग कर जोखिमों को कम करने की योजना है। हालांकि, विनिमय दर में लगातार होने वाले बदलाव और उच्च वैश्विक ब्याज दरें सरकार की इन कोशिशों के सामने एक कठिन दीवार बनकर खड़ी हैं।
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