मोहनजोदड़ो के अस्तित्व पर आया संकट, बाढ़ से बर्बाद हो रहे हैं कई हिस्से, पाकिस्तान ने खड़े किए हाथ
पाकिस्तान के सिंध प्रांत में पड़ने वाला मोहनजोदड़ो एक पुरातात्विक स्थल है। यहां से सिंधु घाटी सभ्यता से जुड़े अवशेष प्राप्त हुए हैं। ये दुनिया के प्राचीनतम शहरों में से एक है। मोहनजोदड़ो का मतलब 'मुर्दों का टीला' होता है
इस्लामाबाद, 6 सितंबर : पाकिस्तान इस वक्त विश्व इतिहास की सबसे बड़ी जलवायु त्रासदी से जूझ रहा है। देश में बेमौसम बरसात ने लोगों से उसके सुख-चैन सब कुछ छिन लिया है। भारी बारिश और बाढ़ के कारण पाकिस्तान के सिंध प्रांत के बड़े हिस्से को तबाह कर दिया है, जिससे मोहनजोदड़ो के पुरातात्विक स्थल पर भी भारी असर पड़ा है। सिंधु नदी के बढ़े जलस्तर से आई बाढ़ से इस इलाके के कई महत्वपूर्ण हिस्से डूब गए थे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ऐतिहासिक खंडहर के कई इलाके सीवरेज नाले बाढ़ के कारण बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं। सिंधु नदी पर बने ज्यादातर बांध अपनी क्षमता से ज्यादा भरे हुए हैं और उनके ऊपर से पानी बह कर आ रहा है। मोहनजोदड़ो में आई बाढ़ से गलियों का हिस्सा एक बार फिर मिट्टी से पट गया। कई दीवार भी क्षतिग्रस्त हो गई। अगर इसी तरह की बाढ़ का कहर जारी रहा तो कोई बड़ी बात नहीं है कि पुरातत्व का ये खजाना एक बार फिर से जमीन के नीचे समा जाए। वहीं, पाकिस्तान के पुरातत्व विभाग ने कहा है कि,अगर इस अमूल्य धरोहर के संरक्षण पर ध्यान नहीं दिया गया तो इसे विश्व विरासत सूची से हटाया जा सकता है।

मोहनजोदड़ो को विश्व विरासत सूची से हटाने की बात कर रहा पाकिस्तान
पाकिस्तान में सिंधु नदी का जलस्तर काफी बढ़ गया है और इस वजह से सिंध प्रांत में पड़ने वाला मोहनजोदड़ो, जो कि विश्व का अमूल्य धरोहर है फिर से विलुप्त होने की कगार पर जा पहुंचा है। पाकिस्तान के पुरातत्व विभाग ने कहा है कि, अगर इसके संरक्षण और बहाली पर तत्काल ध्यान नहीं दिया गया तो मोहनजोदड़ो को विश्व विरासत सूची से हटाया जा सकता है। इसके चलते प्रशासन ने यहां पर्यटकों के प्रवेश पर रोक लगा दी है।

क्या है मोहनजोदड़ो
पाकिस्तान के सिंध प्रांत में पड़ने वाला मोहनजोदड़ो एक पुरातात्विक स्थल है। यहां से सिंधु घाटी सभ्यता से जुड़े अवशेष प्राप्त हुए हैं। ये दुनिया के प्राचीनतम शहरों में से एक है। मोहनजोदड़ो का मतलब 'मुर्दों का टीला' होता है। इस शहर को प्राचीन काल में लोगों ने बहुत सोच-समझकर बसाया था। इसके आगे आज के अच्छे-अच्छे महानगर भी फेल हैं। 1921 में इसकी खुदाई शुरू हुई थी।

कहां है मोहनजोदड़ो
बता दें कि, मोहनजोदड़ो, टीले और खंडहरों का एक समूह, 5000 साल पुराना एक पुरातात्विक स्थल है जो सुक्कुर शहर से लगभग 80 किमी दूर स्थित है। इसमें प्राचीन सिंधु घाटी सभ्यता के दो मुख्य केंद्रों में से एक के अवशेष शामिल हैं, दूसरा हड़प्पा है, जो पंजाब प्रांत में 640 किमी उत्तर पश्चिम में स्थित है।

मोहनजोदड़ो की खासियत जानें
मोहनजोदड़ो आज खंडहर बन चुका है। कभी ये शहर आबाद था। मोहनजोदड़ों को लगभग 5000 साल पुराना शहर माना जाता है। इतने साल गुजर गए लेकिन यहां की दीवारें आज भी पूरी तरह से सुरक्षित हैं। इसे प्राचीन सभ्यता के एक मॉडल नियोजित शहर के तौर पर जाना जाता है। यहां के घरों में स्नानघर, शौचालय और जल निकासी की व्यवस्था थी। इस शहर को बनाने के लिए बड़ी प्लानिंग की गई थी। इस शहर में लोगों के लिए वो सारी सुख सुविधाएं मौजूद थीं, जो आज के मॉर्डन युग में लोगों के पास शायद होंगी। यहां के घर पक्के ईंटों से बने थे। कहा जाता है कि यहां अपने समय का दुनिया का बेहतरीन ड्रेनेज सिस्टम था। समय की मार ने इस पुराने शहर को खंडहर में तब्दिल अवश्य कर दिया है लेकिन खंडहर में, गलियों में दीवारें और ईंट के फुटपाथ अभी भी संरक्षित स्थिति में हैं।

1921 में खुदाई शुरू हुई थी
शहर के खंडहर लगभग 3,700 वर्षों तक बिना दस्तावेज के बने रहे। 1920 में पुरातत्वविद् आरडी बनर्जी ने इस स्थल का दौरा किया था। जिसके बाद इसकी खुदाई 1921 में शुरू हुई और 1964-65 तक चरणों में जारी रही। विभाजन के दौरान यह साइट पाकिस्तान के पास चली गई थी। अब फिर से बाढ़ के कारण इस पौराणिक शहर के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है और पाकिस्तान के पुरातत्व विभाग कह रहा है कि, इसके संरक्षण और जीर्णोद्धार पर तत्काल ध्यान नहीं दिया गया तो मोहनजोदड़ो को विश्व विरासत सूची से हटाया जा सकता है। वहीं, पाकिस्तान में भीषण बाढ़ की वजह से भारी तबाही हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक बाढ़ के कहर से अब तक 1,300 से अधिक लोगों की मौत हो गई है और लाखों लोग बेघर बताए जा रहे हैं।












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