'इस्लाम के नाम पर बना, बचाने की जिम्मेदारी अल्लाह की', पाकिस्तानी वित्तमंत्री ने देश को खुदा के सहारे छोड़ा
पाकिस्तान के इस साल मई महीने तक डिफॉल्ट होने की आशंका जताई गई है, वहीं पाकिस्तान के पास जितना विदेशी मुद्रा भंडार है, उससे वो ज्यादा से ज्यादा 15-20 दिनों तक ही सामान खरीद सकता है।

Pakistan News: आर्थिक संकट में फंसे पाकिस्तान को लगता है शहबाज शरीफ की सरकार ने बेबस हालात पर छोड़ दिया है और पाकिस्तान के वित्त मंत्री ने देश को अल्लाह की मर्जी के सहारे छोड़ दिया है। पाकिस्तान के वित्तमंत्री का ये बयान काफी हास्यास्पद है और उनके बयान की पाकिस्तान में भी काफी आलोचना हो रही है। पाकिस्तान के वित्त मंत्री इशाक डार ने कहा है, कि इस्लाम के नाम पर बनाए गये पाकिस्तान की समृद्धि और विकास के लिए अल्लाह जिम्मेदार है।

वित्तमंत्री का हास्यास्पद बयान
इस्लामाबाद में ग्रीन लाइन ट्रेन सेवा के उद्घाटन समारोह में बोलते हुए इशाक डार ने कहा है, कि उन्हें पाकिस्तान की प्रगति पर पूरा भरोसा है, क्योंकि यह इस्लाम के नाम पर बनने वाला एकमात्र देश है। उन्होंने कहा, कि "मेरे विश्वास का कारण यह है, कि पाकिस्तान इस्लाम के नाम पर बना था। अगर अल्लाह पाकिस्तान बना सकता है, तो वह इसकी प्रगति और विकास सुनिश्चित करने के साथ-साथ इसे समृद्ध भी बना सकता है"। वित्त मंत्री ने कहा है, कि शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली सरकार पाकिस्तान में स्थिति सुधारने की पूरी कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा, कि 'हमारी टीम चुनाव से पहले स्थिति को सुधारने की कोशिश कर रही है।' उन्होंने पाकिस्तान की मौजूदा दुर्दशा के लिए पांच साल पहले शुरू हुए 'नाटक' को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि पाकिस्तान के पूर्व पीएम इमरान खान की नीतियों के कारण देश की जनता आज भी भुगत रही है।

नवाज शरीफ के शासन की तारीफ
पाकिस्तान के वित्तमंत्री ने कहा है, कि "इमरान खान के 'नाटक' से पहले 2013-17 के दौरान नवाज शरीफ के कार्यकाल में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था अच्छी स्थिति में थी। नवाज शरीफ के शासन में पाकिस्तान प्रगति के पथ पर था, लेकिन वह पटरी से उतर गया। लोग देख सकते हैं कि पिछले पांच सालों में देश ने कितनी तबाही मचाई है"। आपको बता दें, कि पाकिस्तान का आर्थिक संकट और गहराता जा रहा है और अगर जल्द से जल्द पाकिस्तान को मदद नहीं भेजी गई, तो जिन्ना का देश डिफॉल्ट कर जाएगा। पाकिस्तान के स्टेट बैंक ने कहा है, कि देश का मुद्रा भंडार अब घटकर सिर्फ 3.7 अरब डॉलर ही रह गया है और वो (अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष) आईएमएफ से बातचीत करने के प्रयास कर रहा है, ताकि बेलऑउट पैकेज हासिल कर डिफॉल्ट होने से बच सके।

पाकिस्तान का डिफॉल्ट होना तय!
पाकिस्तान का संकट इसलिए भी अब खतरनाक स्तर तक पहुंच चुका है, क्योंकि सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात इस महीने की शुरूआत में ही उसकी मदद कर चुके हैं और पाकिस्तानी बैंक में अपने जमा पैसे नहीं निकालने पर सहमत हो गये थे, लिहाजा अब पाकिस्तान के पास कुछ ऑप्शन बचे नहीं हैं। जियो न्यूज ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है, कि मित्र देशों के आश्वासन के बाद भी पाकिस्तान में डॉलर की आमद रूक गई है, और जो ऋणदाता हैं, वो पाकिस्तान को आईएमएफ से लोन मिले मिला, नया कर्ज देने के मूड में नहीं हैं। यानि, आईएमएफ अगर पाकिस्तान को बेलऑउट पैकेज देने के लिए तैयार हो जाता है, उसके बाद ही ऋणदाता देश, जिसमें चीन भी शामिल है, उससे पाकिस्तान को कर्ज मिलेगा।












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