Pakistan: जिस होटल में ईरान-US की कराई मीटिंग, उसी का पैसा डकार गए शहबाज शरीफ! खाते में लिखवाकर 9-2-11
दुनिया के सामने खुद को बड़ा कूटनीतिक खिलाड़ी दिखाने की कोशिश में लगा पाकिस्तान एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन वजह कोई बड़ी उपलब्धि नहीं, बल्कि एक ऐसी घटना है जिसने उसकी किरकिरी करा दी। अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की मेजबानी कर पाकिस्तान दुनिया को अपनी अहमियत दिखाना चाहता था, लेकिन समिट खत्म होते-होते मामला होटल के बकाया बिल तक पहुंच गया।
दरअसल, 10 से 12 अप्रैल 2026 के बीच इस्लामाबाद में हुई अमेरिका और ईरान (US-Iran Talks in Islamabad 2026) की बातचीत को पाकिस्तान ने बड़े कूटनीतिक मौके के रूप में पेश किया था। लेकिन समिट के बाद ध्यान किसी समझौते या प्रगति पर नहीं, बल्कि उस विवाद पर चला गया जो होटल के बकाया बिल को लेकर सामने आया।

रिपोर्ट के मुताबिक इस कार्यक्रम की मेजबानी इस्लामाबाद के प्रतिष्ठित सेरेना होटल इस्लामाबाद (Serena Hotel Islamabad) में की गई थी। मगर आरोप है कि कार्यक्रम के बाद होटल का भुगतान समय पर नहीं किया गया।
होटल मालिक को करना पड़ा दखल
खुफिया सूत्रों ने News18 को बताया कि, मामला इतना बढ़ गया कि होटल के मालिक, जो आगा खान डेवलपमेंट नेटवर्क (Aga Khan Development Network) से जुड़े हैं, उन्हें खुद हस्तक्षेप कर बकाया रकम का भुगतान करवाना पड़ा। जिस कार्यक्रम को पाकिस्तान अपनी कूटनीतिक ताकत दिखाने का मंच बना रहा था, वही घटना अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी प्रशासनिक क्षमता पर सवाल खड़े कर रही है।
कूटनीतिक महत्वाकांक्षा और हकीकत का टकराव
इस्लामाबाद समिट को पाकिस्तान ने वॉशिंगटन और तेहरान के बीच मध्यस्थ के रूप में अपनी भूमिका दिखाने का मौका बताया था। प्रतिष्ठित होटल में बातचीत आयोजित कर यह संदेश देने की कोशिश थी कि देश स्थिर और सक्षम है, लेकिन साधारण ऑपरेशनल भुगतान तक न संभाल पाने की खबरों ने इस छवि पर सवाल खड़े कर दिए। खुफिया सूत्रों ने न्यूज18 से कहा कि किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन के दौरान ऐसी बुनियादी चूक प्रशासनिक क्षमता पर गंभीर सवाल उठाती है।
आर्थिक दबाव भी बना बड़ी वजह
यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पहले से दबाव में है और देश अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (International Monetary Fund) की निगरानी में आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है। महंगाई दर भी करीब 7-9 प्रतिशत के बीच बनी हुई है। ऐसे माहौल में होटल के बकाया बिल का विवाद एक प्रतीक बन गया है- जहां आर्थिक दबाव और कूटनीतिक महत्वाकांक्षा के बीच का अंतर साफ दिखाई दे रहा है।











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