दो हफ्ते में दिवालिया हो जाएगा पाकिस्तान! सऊदी-चीन का और कर्ज देने से इनकार, IMF ने भी डराया

भारत से आजाद होने के बाद से ही पाकिस्तान गलत आर्थिक नीतियों की तरफ बढ़ चला और धीरे धीरे पाकिस्तान को अमेरिकी खैरात पर जिंदा रहने की आदत हो गई।

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Pakistan News: पाकिस्तान का आर्थिक संकट बद से बदतर हो गया है और जिन्ना का देश अगले दो हफ्तों में दिवालिया होने के कगार पर पहुंच गया है। स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (एसबीपी) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा है, कि पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार अब न्यूनतम स्तर तक पहुंच गया है और पाकिस्तान के पास अब सिर्फ दो हफ्तों तक ही देश चलाने के लिए पैसा बचा है। स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान की रिपोर्ट उस वक्त आई है, जब देश में जरूरी और गैर-जरूरी सामानों के आयात पर पहले ही प्रतिबंध लग चुके हैं।

देश चलाने के लिए दो हफ्ते का पैसा बचा

देश चलाने के लिए दो हफ्ते का पैसा बचा

पाकिस्तानी स्टेट बैंक ने अपनी ताजा रिपोर्ट में सरकार को कहा है, कि देश के विदेशी मुद्रा भंडार में अब सिर्फ 4.34 अरब डॉलर ही बचे हैं, जिससे देश के पास अधिकतम सिर्फ 2 हफ्ते तक ही सामान खरीदने का पैसा बचा है, जबकि पाकिस्तान को अपनी अरबों डॉलर की कर्ज अदायगी भी करनी है। फाइनेंशियल पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, यह सिर्फ राजनीतिक वर्ग की अयोग्यता और निर्णय लेने में सेना की अत्यधिक भागीदारी के कारण हुआ है। फाइनेंशियल पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार 4 अरब डॉलर से कुछ ही ज्यादा उस वक्त है, जब पिछले हफ्ते ही संयुक्त अरब अमीरात के दो बैंकों को पाकिस्तान ने एक अरब डॉलर के कर्ज का पुनर्भुगतान किया है। यानि, पाकिस्तान अब विकराल स्थिति में फंस चुका है और उसके पास इस भंवर से निकलने का कोई रास्ता नहीं दिख रहा है।

कितना गंभीर हो चुका है संकट?

कितना गंभीर हो चुका है संकट?

फाइनेंशियल पोस्ट की रिपोर्ट में कहा गया है, कि विदेशों से पाकिस्तान को भेजी जाने वाली रकम 15.8 अरब डॉलर से घटकर 14.1 अरब डॉलर रह गई है। जबकि, पाकिस्तानी बैंक ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार 4.343 अरब डॉलर के निम्नतम स्तर को छू गया, जो केवल दो सप्ताह के लिए पर्याप्त है। फाइनेंशियल पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, विदेशी मुद्रा भंडार में भारी कमी की वजह से देश में गंभीर खाद्य महंगाई हो चुकी है, जिसके कारण लोग आवश्यक भोजन और ऊर्जा संसाधनों के बिना जीवित रहने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। पाकिस्तान में पिछले साल आई भीषण बाढ़ की वजह से गेहूं की फसल बर्बाद हो गई है, जिसकी वजह से आटा खत्म हो गया है। वहीं, दाल के लिए भी देश में हाहाकार मच गया है।

IMF ही आखिरी सहारा...मगर

IMF ही आखिरी सहारा...मगर

पाकिस्तान को सऊदी अरब और चीन ने नया कर्ज देने के नाम पर गहरा झटका दिया है, लिहाजा अब पाकिस्तान के पास आईएमएफ ही आखिरी विकल्प बचा है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पिछले हफ्ते ही एक ट्वीट में कहा था, कि आईएमएफ के अधिकारी एक दिन बाद ही पाकिस्तान आ रहे हैं, लेकिन आईएमएफ के अधिकारी पाकिस्तान नहीं पहुंचे। वहीं, डॉन अखबार ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, कि आईएमएफ ने पाकिस्तान को साफ तौर पर कहा है, कि पहले वो आईएमएफ की शर्तों को लागू करे, उसके बाद ही अधिकारी कर्ज की अगली किश्त पर बात करने के लिए पाकिस्तान जाएंगे।

बाढ़ के लिए मदद मिली... लेकिन

बाढ़ के लिए मदद मिली... लेकिन

पाकिस्तान ने पिछले साल जून से अक्टूबर तक देश में आई भीषण बाढ़ के लिए 10 जनवरी को जिनेवा में एक दाता सम्मेलन में 10 अरब डॉलर जुटाए थे। लेकिन, यहां यह ध्यान दिया जाना जरूरी है, कि पाकिस्तान ने वास्तव में बाढ़ से उबरने के लिए सहायता के रूप में 16 अरब डॉलर की मदद देने की अपील की थी। लेकिन, दिलचस्प बात यह है, कि इन वित्तीय मदद का जो वादा किया गया है, उसका 8.7 अरब डॉलर, यानि 90 प्रतिशत हिस्सा अलग अलग परियोजनाओं के लिए कर्ज के तौर पर होगा, जो अगले तीन सालों में शुरू किया जाएगा। फाइनेंशियल पोस्ट की रिपोर्ट में दावा किया गया है, कि हालांकि इन ऋणों की शर्तें अभी तक सामने नहीं आई हैं, जो दी गई समय सीमा पर इसके पुनर्भुगतान को लेकर चिंता पैदा करती हैं।

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    सऊदी और चीन से कैसे मिला झटका

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    आर्थिक मदद हासिल करने के लिए प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इसी महीने सऊदी अरब की यात्रा की थी, जहां सऊदी अरब ने अपने अधिकारियों को पाकिस्तान के स्टेट बैंक में 2 अरब डॉलर जमा करने के लिए 'अध्ययन' करने के लिए कहा है। लेकिन, पिछले हफ्ते सऊदी अरब के वित्तमंत्री ने दावोस शिखर सम्मेलन में यह कहकर पाकिस्तान को बड़ा झटका दिया है, कि सऊदी अरब अब शर्तों के साथ कर्ज देगा, क्योंकि ये पैसा सऊदी अरब के टैक्स पेयर्स का है। यानि, सऊदी अरब पाकिस्तान में निवेश के लिए कर्ज देगा, ना की मदद के लिए। वहीं, चीन से भी पाकिस्तान ने आर्थिक संकट के समय मदद मांगी है, लेकिन चीन की तरफ से अभी तक कोई जवाब नहीं आया है। पिछले साल चीन ने पाकिस्तान को कर्ज देने से मना कर दिया था। वहीं, विडंबना ये है, कि अगर सऊदी अरब और चीन से पाकिस्तान को मदद मिलती है, तो वो वित्तीय सहायता नहीं, बल्कि आर्थिक कर्ज होगा, जो पाकिस्तान के लोन को और बढ़ाएगा।

    पाकिस्तान में संकट क्यों है?

    पाकिस्तान में संकट क्यों है?

    फाइनेंशियल पोस्ट ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, कि पाकिस्तान में खराब आर्थिक संकट की वजह रेकरिंग इकोनॉमिक संकट की वजह से है, जो मुख्य तौर पर राजकोषीय घाटे की वजह से होता है। यानि, पाकिस्तान की सरकार आवश्यकता से काफी ज्यादा खर्च करती है, घरेलू संसाधनों को बर्बाद किया जाता है और आर्थिक व्यवस्था को मैनेज करने में सरकारें बुरी तरह से नाकाम रही हैं। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने 14 जनवरी को पाकिस्तान प्रशासन सेवा (पीएएस) के एक कार्यक्रम समारोह को संबोधित करते हुए कहा था, कि "एक हाथ में परमाणु हथियार और दूसरे हाथ में भीख का कटोरा रखना शर्मनाक है।" यानि, पाकिस्तान की गंभीर स्थिति को समझा जा सकता है। वहीं, अगर किसी भी तरह से इस बार पाकिस्तान डिफॉल्ट होने से बच भी जाता है, तो भी पाकिस्तान चैन से नहीं रह पाएगे, क्योंकि अगले दो सालों में पाकिस्तान को 40 अरब डॉलर का कर्ज चुकाना है, जिसे चुकाना असंभव जैसा होगा।

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