चंद्रयान-3 का दीवाना हुआ पाकिस्तानी मीडिया, मशहूर अखबार ने संपादकीय में सरकारों को दी नसीहत
Pakistani Media on Chandrayaan-3: भारतीय अंतरिक्षयान चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के करीब पहुंचकर इतिहास रच चुका है और पाकिस्तान की तरफ से इसको लेकर कई तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। पाकिस्तान की जो जनता पढ़ी-लिखी है, वो भारत की तारीफ करने के साथ साथ अपनी सरकारों और संस्थानों को कोस रही है, कि आखिर पाकिस्तान अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम का विस्तार क्यों नहीं कर पाया।
वहीं, पाकिस्तान के प्रसिद्ध अखबार डॉन न्यूज में चंद्रयान-3 मिशन की तारीफ करते हुए संपादकीय लिखी गई है, जिसमें पाकिस्तानी की सरकारों और संस्थानों को भारत से सीख लेने की सलाह दी गई है।

डॉन न्यूज ने लिखा संपादकीय
डॉन न्यूज ने अपनी संपादकीय में कहा है, कि "भारत का सफल चंद्रयान-3 मिशन वास्तव में ऐतिहासिक है, क्योंकि, यह यान चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास उतरने वाला पहला मिशन बन गया है। इसके अलावा, इस उपलब्धि के साथ, भारत अमेरिका, रूस और चीन सहित उन चुनिंदा देशों के क्लब में शामिल हो गया है, जिन्होंने चंद्रमा की सतह पर नियंत्रित लैंडिंग हासिल की है।"
डॉन न्यूज ने आगे लिखा है, कि "हालांकि, आधुनिक भारत में बहुत कुछ गलत है, खासकर हिंदू बहुसंख्यक सरकार की दमनकारी शासन चलाने पर जोर दे रही है, फिर भी यह विशेष उपलब्धि सराहना की पात्र है, क्योंकि हमारे पूर्वी पड़ोसी ने कम बजट में वही हासिल किया है, जो अमीर देशों ने बड़ी रकम खर्च करके हासिल किया है।"
संपादकीय में आगे लिखा गया है, कि "करीब एक दशक पहले, भारतीय ने मंगल ग्रह पर मंगलयान ऑब्जर्वेशन मिशन को भी सफलतापूर्वक लॉन्च किया था, जबकि 2019 में चंद्रयान-2 के विफल होने के बाद अब चंद्रमा मिशन में सफलता मिल गई है।"
डॉन ने आगे लिखा है, कि "शायद, भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की सफलता की कुंजी, सरकार का लगातार समर्थन, भारतीय इंजीनियरों और वैज्ञानिकों की क्वालिटी और समर्पण है, जिन्होंने इन कठिन मिशनों को संभव बनाने में मदद की है।"
पाकिस्तान को सीखना चाहिए सबक
डॉन ने लिखा है, कि "हालांकि, तुलना सही नहीं है, फिर भी पाकिस्तान के लिए भारत की अंतरिक्ष सफलता से सीखने के लिए बहुत कुछ हो सकता है। पाकिस्तान का अंतरिक्ष कार्यक्रम, भारत से पहले लॉन्च किया गया था और इसमें मामूली सफलता मिली, जैसे कि 1960 के दशक की शुरुआत में डॉ. अब्दुस सलाम जैसे दिग्गजों की निगरानी में रॉकेट लॉन्च किया गया।"
"1990 में, हम एक सैटेलाइट, बद्र-1, को अंतरिक्ष में भेजने में कामयाब रहे। ये मिशन अमेरिकी और बाद में चीनी मदद से पूरे किये गये। लेकिन, उसके बाद के दशकों में, हमारे राष्ट्रीय अंतरिक्ष निकाय, सुपारको को कोई बड़ी सफलता हासिल नहीं हुई है।"
"हमारे अंतरिक्ष कार्यक्रम के पृथ्वी तक ही सीमित रहने के कई कारण हैं। इनमें यह तथ्य शामिल है, कि विशेष रूप से हाल के दिनों में, पाकिस्तान की अंतरिक्ष एजेंसी का संचालन क्षेत्र के विशेषज्ञों के बजाय रिटायर्ड सैन्य अधिकारियों ने किया है।"
"इसके अलावा, हमारी शिक्षा प्रणाली पाकिस्तान को विज्ञान और प्रौद्योगिकी में गुणात्मक बढ़त दिलाने के लिए आवश्यक जनशक्ति का उत्पादन नहीं कर पा रही है।"
डॉन ने लिखा है, कि "दु:ख की बात है, कि हम विज्ञान और प्रौद्योगिकी के उपभोक्ता बन गए हैं, ज्ञान के उत्पादक नहीं। इसके अलावा, हम प्रतिभा पलायन के कारण अपना सर्वश्रेष्ठ दिमाग खो देते हैं, क्योंकि प्रतिभाशाली युवा दमघोंटू नौकरशाही और घर पर योग्यता और अवसरों की कमी के कारण देश से बाहर जाना सही समझते हैं।"
डॉन ने लिखा है, कि 'हो सकता है, कि भारत के चंद्रयान-3 मिशन से सबक लेकर पाकिस्तान भी अंतरिक्ष के क्षेत्र में आगे बढ़ने की कोशिश करे, ऐसा हम उम्मीद करते हैं।'
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