Pak का खूनी कानून: 24 चर्च फूंकने वाली इस्लामिक भीड़ को छोड़ा, ईशनिंदा के आरोप में ईसाई युवक को मौत की सजा
Pakistan News: पाकिस्तान की एक अदालत ने सोशल मीडिया पर कथित "ईशनिंदात्मक पोस्ट" के लिए एक ईसाई युवक को मौत की सजा सुनाई है। उस शख्स पर आरोप है, कि उसके अपमानजनक पोस्ट की वजह से मुसलमान भड़क गये और उन्होंने पिछले साल अगस्त में पंजाब के फैसलाबाद में चर्चों पर हमला कर दिया।
कोर्ट ने कहा, कि ईसाई शख्स इस घटना के लिए जिम्मेदार है और उसके उकसावे की वजह से भीड़ ने 24 चर्चों के साथ दर्जनों ईसाई समुदाय के लोगों के घर को जलाया। वहीं, कोर्ट ने चर्च फूंकने वाले लोगों के खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है।

पाकिस्तानी कोर्ट का फैसला एक बार फिर इस बात को रेखांकित करता है, कि देश में ईशनिंदा कानूनों का इस्तेमाल अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने के लिए कैसे किया जाता है। ईसाई व्यक्ति पर मुसलमानों की भावनाओं का अपमान करने का आरोप लगाया गया था।
ईसाई शख्स को फांसी की सजा, क्या है पूरी कहानी
पिछले साल फैसलाबाद जिले की जरानवाला तहसील में एक उग्र भीड़ ने ईसाइयों के कम से कम 24 चर्चों और 80 से ज्यादा घरों को आग के हवाले कर दिया था। खबर थी, कि ईसाई समुदाय के दो लोगों ने कथित तौर पर कुरान का अपमान किया है। घटना के बाद 200 से ज्यादा मुसलमानों को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन अभी तक उनमें से किसी के खिलाफ भी एक्शन नहीं लिया गया है।
इसके बजाय, दोषी ठहराए गए 188 लोगों को या तो उनके खिलाफ सबूतों के अभाव में या जमानत पर अदालतों ने रिहा कर दिया है।
पाकिस्तानी अदालत ने ईशनिंदा वाले पोस्ट के आरोपी अहसान राजा मसीह को फांसी की सजा सुनाई है। इस सजा का ऐलान पाकिस्तान की आतंकवाद निरोधी अदालत के विशेष न्यायाधीश (साहिवाल) जियाउल्लाह खान ने शनिवार को किया है। मसीह को पाकिस्तान दंड संहिता (पीपीसी), आतंकवाद निरोधी अधिनियम (एटीए) और इलेक्ट्रॉनिक अपराध रोकथाम अधिनियम (पीईसीए) की विभिन्न धाराओं के तहत 22 साल की कैद और 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।
अल्पसंख्यकों के खिलाफ ईशनिंदा वाला हथियार
आरोप है, कि मसीह ने कथित तौर पर TikTok पर "ईशनिंदात्मक सामग्री" शेयर की थी और मुसलमानों की भावनाओं को ठेस पहुंचाई थी। यह फैसला, पाकिस्तान सरकार की तरफ से किए गए बड़े-बड़े दावों के बिल्कुल विपरीत है, जिसने कहा था, कि चर्चों और ईसाई घरों को जलाने में शामिल एक भी संदिग्ध को बख्शा नहीं जाएगा।
इस्लामाबाद पुलिस ने अल्पसंख्यक पूजा स्थलों और समुदायों की सुरक्षा के लिए 70 पुलिसकर्मियों वाली एक 'अल्पसंख्यक सुरक्षा इकाई' भी बनाई थी।
हाल के महीनों में कुछ घटनाओं के बाद पाकिस्तान को धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों, विशेष रूप से ईसाइयों और हिंदुओं की रक्षा करने में अपनी नाकामी के लिए फिर से आलोचना का सामना करना पड़ा है, जिन्हें अक्सर देश के सख्त ईशनिंदा कानून द्वारा निशाना बनाया जाता है।
देश के ईशनिंदा कानूनों के तहत, इस्लाम या इस्लामी धार्मिक हस्तियों का अपमान करने का दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को मौत की सजा दी जा सकती है। देश में ईशनिंदा के ज्यादात मामले मुख्य रूप से शिकायतकर्ता और आरोपी पक्षों के बीच दुश्मनी को निपटाने के लिए दर्ज किए जाते हैं।
देखा गया है, कि अल्पसंख्यक समुदाय की जमीन और मकान को हड़पने के लिए उसके खिलाफ ईशनिंदा का आरोप लगा दिया जाता है, जिसके बाद ज्यादातर मामलों में परिवार मॉब लिंचिंग के डर से घर छोड़कर भाग जाते हैं, जो नहीं भागते, भीड़ उनकी हत्या कर देती है और अगर भीड़ से बच गये, तो कोर्ट में फांसी की सजा मिलना तय होता है।
ऑल माइनॉरिटीज अलायंस के चेयरमैन अकमल भट्टी ने कहा, कि "दर्जनों चर्चों और ईसाइयों के घरों को जलाने के आरोपी मुसलमानों के खिलाफ अब तक एक भी सजा नहीं हुई है।" उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा, "मुश्किल से 12 मुस्लिम आरोपी इस समय मुकदमे का सामना कर रहे हैं, जबकि बाकी को या तो मामले से बरी कर दिया गया है या जमानत पर रिहा कर दिया गया है।"

ईशनिंदा बना सबसे खतरनाक हथियार
पिछले महीने के अंत में एक चौंकाने वाली घटना में, पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में एक नाबालिग लड़के ने पैगंबर मुहम्मद के साथियों के खिलाफ कथित तौर पर बोलने के लिए 55 साल के एक शख्स की चाकू मारकर हत्या कर दी थी।
पुलिस के मुताबिक, चार दिनों में यह दूसरी और एक महीने के भीतर तीसरी ऐसी घटना है। यह घटना उस वक्त हुई, जब खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के खूबसूरत पाकिस्तानी शहर स्वात में 2 दिन पहले ही उग्र भीड़ ने एक पर्यटक को ईशनिंदा के ही आरोप में पहले सड़क पर घसीट घसीटकर पीटा और फिर उसे चौराहे पर फांसी लगाकर टांग दिया।
पिछले महीने ही पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में कट्टरपंथी इस्लामवादियों के नेतृत्व में भीड़ ने कुरान के कथित अपमान के आरोप में ईसाइयों पर हमला कर दिया और दो लोगों को बुरी तरह से घायल कर दिया, जिनमें से एक की मौत हो गई।
इन घटनाओं की वजह से पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने देश की संसद में माना, देश अपने अल्पसंख्यकों की रक्षा करने में नाकाम रहा है और उन्हें धर्म के नाम पर लक्षित हिंसा का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने पिछले महीने कहा, कि "अल्पसंख्यकों की प्रतिदिन हत्या की जा रही है... पाकिस्तान में कोई भी धार्मिक अल्पसंख्यक सुरक्षित नहीं है। मुसलमानों के छोटे-छोटे संप्रदाय भी सुरक्षित नहीं हैं।" मंत्री ने आगे कहा, कि व्यक्तिगत प्रतिशोध के कारण कई पीड़ितों को ईशनिंदा के आरोपों का निशाना बनाया गया है।
हालांकि, इसके बाद भी पाकिस्तान की कोई भी सरकार ईशनिंदा को खत्म नहीं कर पा रही है। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की सरकार ने ईशनिंदा कानून को खत्म करने की कोशिश करते हुए बिल का ड्राफ्ट तैयार किया था, लेकिन मौलानाओं के भारी विरोध के बाद बिल को संसद में पेश नहीं किया गया।
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