पाकिस्तानी अदालत का बेशर्म इंसाफ, रिश्तेदार से रेप, बच्चा हुआ तो मिली उम्रकैद, शादी करने पर किया रिहा
एक रिपोर्ट के अनुसार 2021 में, पाकिस्तान में 5,200 से अधिक महिलाओं के साथ बलात्कार होने की सूचना दी गई, लेकिन कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह संख्या बहुत अधिक हो सकती है क्योंकि अपराध अक्सर डर के मारे रिपोर्ट नहीं किए जाते

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पाकिस्तान की एक अदालत ने एक चौंकाने वाले फैसले में एक बलात्कारी को रिहा कर दिया है जिसकी आलोचना देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी हो रही है। दोषी ने एक मूक-बधिर महिला के साथ बलात्कार किया था। जिसके बाद लड़की गर्भवती हो गई थी। इसके बाद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया था। अदालत ने उसे बलात्कार के जुर्म में उम्रकैद की सजा दी थी। इस बीच बच्चा होने के बाद दोषी ने पीड़िता से शादी करने का वादा किया। इसके बाद कोर्ट ने दोषी की सजा खत्म कर दी और उसे रिहा कर दिया।

अदालत ने दी थी उम्रकैद की सजा
यह घटना पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के बुनेर जिले की है। दौलत खान ने एक मूक-बधिर महिला के साथ बलात्कार किया था। वह महिला दौलत खान की नजदीकी रिश्तेदार थी। दौलत खान को 2020 में बलात्कार करने का दोषी ठहराया गया था। अदालत ने उसे उम्रकैद की सजा और 1 लाख पाकिस्तानी रुपये का जुर्माना लगाया था। बाद में महिला ने एक बच्चे को जन्म दिया। इसके बाद पितृत्व जांच में दौलत खान को उस बच्चे का पिता पाया गया। इस मामले में स्थानीय लोगों की एक परिषद ने दोनों परिवार के बीच समझौता कराया।

जिरगा ने कराया समझौता
बलात्कारी दौलत खान के वकील अमजद अली ने कहा कि मुवक्किल और पीड़िता एक ही बड़े परिवार के सदस्य हैं। लोकल जिरगा की मदद से दोनों के घर के लोग समझौता करने के लिए तैयार हुए। ‘जिरगा' बुजुर्ग पुरुषों की एक परिषद है जो शरिया कानून के आधार पर निर्णय लेती है। समझौते के अनुसार दोषी को पीड़िता से शादी करनी थी। कानूनी रूप से शादी करने के बाद दोनों परिवार ने कोर्ट को समझौते की जानकारी दी। इसके बाद कोर्ट ने दौलत खान को सोमवार को जेल से रिहा कर दिया।

पाकिस्तान में यौन हिंसा पर बहस शुरू
लेकिन दूसरी तरफ इस फैसले ने मानव अधिकार कार्यकर्ताओं को नाराज कर दिया है, जो कहते हैं कि यह एक ऐसे देश में महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा को वैध बनाता है जहां अधिकांश बलात्कार की रिपोर्ट नहीं की जाती है। कोर्ट के इस फैसले के बाद पाकिस्तान में महिलाओं के साथ हिंसा और बलात्कार के मामले पर बहस शुरू हो गई है। फैसले की आलोचना कर रहे लोगों का कहना है कि इससे यौन हिंसा को वैधता मिल रही है। यह पाकिस्तान जैसे देश के लिए और गंभीर है जहां रेप के अधिकतर मामले दर्ज नहीं होते हैं।

3 फीसदी महिला को ही मिल पाता है न्याय
कई रिपोर्टों के मुताबिक पाकिस्तान में बलात्कार के खिलाफ मुकदमा चलाना बेहद मुश्किल है। पाकिस्तान में ब्लात्कार की शिकार लड़िकयों को जीवन भर बुरी नजर से देखा जाता है। कानूनी सहायता प्रकोष्ठ की कार्यकर्ता असमा जहांगीर के अनुसार पाकिस्तान में महज 3 फीसदी ऐसे मामले हैं जिसमें बलात्कार की शिकार लड़की को न्याय मिल पाता है। मानवाधिकार कार्यकर्ता और वकील इमान जैनब मजारी-हाजिर ने कहा कि यह फैसला, न्याय के बुनियादी सिद्धांतों और देश के कानून के खिलाफ है। अदालत का ऐसा फैसला बलात्कार और बलात्कारियों की सुविधा प्रदान करता ही है साथ ही बलात्कार की मानसिकता को मंजूरी देता है।
मानवाधिकार आयोग ने भी जताई हैरानी
इसी बीच पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग ने भी अदालत के इस फैसले पर हैरानी जताई है। मानवाधिकार आयोग ने कहा कि वह इस फैसले से "हैरान" है। मानवाधिकार आयोग समूह ने ट्वीट किया, "एचआरसीपी यह जानकर चकित है कि पेशावर उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने एक मुखर और बधिर महिला के साथ बलात्कार करने के लिए दोषी ठहराए गए और आजीवन कारावास की सजा पाए एक व्यक्ति को बरी कर दिया है। बलात्कार एक गैर-समाधानीय अपराध है जिसे एक कमजोर 'समझौता' विवाह के माध्यम से हल नहीं किया जा सकता है। ग्रामीण पाकिस्तान में, जिरगा या पंचायत के रूप में जानी जाने वाली ग्राम परिषदें स्थानीय बुजुर्गों से बनती हैं, जो न्याय प्रणाली को दरकिनार करते हैं, हालांकि उनके फैसलों का कोई कानूनी मूल्य नहीं है।












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