भारत के विरोध को नंजरअंदाज किया! चीन के साथ मिलकर CPEC का विस्तार करेगा 'धूर्त' पाकिस्तान

प्रधानमंत्री बनने के बाद शहबाज शरीफ का यह पहला चीन दौरा था। इस दौरे से इस्लामाबाद को काफी उम्मीदे हैं। हम यह बात इसलिए कह रहे हैं कि इस वक्त पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति चरमराई हुई है।

पाकिस्तान (Pakistan) के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (Shehbaz Sharif) चीन (China) के दौरे के क्रम में राष्ट्रपति शी जिनपिंग (XI Jinping) से मुलाकात की। इस बैठक में चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) पर चर्चा हुई। चीन और पाकिस्तान ने भारत के विरोध के बावजूद इस प्रोजेक्ट के तहत आने वाले चीन पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर को अब अफगानिस्तान तक ले जाना चाहते हैं। बैठक में चीन के प्रधानमंत्री ली केकियांग और दूसरे वरिष्ठ नेता मौजूद थे। पीएम शरीफ की मुलाकात के बाद दोनों देशों की तरफ से एक साझा बयान जारी किया गया। इस साझा बयान में चीन और पाक आर्थिक कॉरिडोर को अफगानिस्तान तक ले जाने पर सहमती जताई।

सीपीईसी चीन की महत्वकांक्षी परियोजना

सीपीईसी चीन की महत्वकांक्षी परियोजना

बता दें की सीपीईसी चीन की सबसे महत्वकांक्षी परियोजना बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसका उद्देश्य प्राचीन व्यापार मार्गों को नवीनीकृत करना है। बता दें कि, भारत ने लगातार 60 बिलियन अमरीकी डालर की इस परियोजना का विरोध किया है, जो बलूचिस्तान में पाकिस्तान के दक्षिणी ग्वादर बंदरगाह को चीन के पश्चिमी शिनजियांग से जोड़ता है और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से होकर गुजरता है।

शहबाज शरीफ का चीन दौरा

शहबाज शरीफ का चीन दौरा

वहीं दूसरी तरफ प्रधानमंत्री बनने के बाद शहबाज शरीफ का यह पहला चीन दौरा था। इस दौरे से इस्लामाबाद को काफी उम्मीदे हैं। हम यह बात इसलिए कह रहे हैं कि इस वक्त पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति चरमराई हुई है। बाढ़ और बारिश देश की कमरतोड़ कर रख दी है। महंगाई चरम पर है। पाकिस्तान को उम्मीद है कि शहबाज के चीन दौरे से उसकी आर्थिक स्थिति में सुधार आ सकता है। साथ ही पाकिस्तान सरकार को सीपीईसी के लिए चीन से मदद भी मिल सकती है।

60 अरब डॉलर का सीपीईसी प्रोजेक्ट

60 अरब डॉलर का सीपीईसी प्रोजेक्ट

सीपीईसी करीब 60 अरब डॉलर वाला प्रोजेक्ट है जिसके जरिए पाकिस्तान में इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर डेवलपमेंट पर काम चल रहा है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पीएम शहबाज ने शी चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से 6.3 अरब डॉलर के चीनी कर्ज पर भी चर्चा की। हालांकि इस विषय पर कोई भी अपडेट प्राप्त नहीं हुआ है। वहीं मीटिंग के दौरान चीन और पाकिस्तान ने सीपीईसी के इस प्रोजेक्ट को जल्द पूरा करने पर सहमती जताई है।

आर्थिक कॉरिडोर को अफगानिस्तान तक ले जाने पर चर्चा

आर्थिक कॉरिडोर को अफगानिस्तान तक ले जाने पर चर्चा

पाकिस्तान के प्रधान मंत्री कार्यालय (पीएमओ) के अनुसार, बीजिंग में पीपुल्स ग्रेट हॉल में शहबाज शरीफ के साथ बैठक के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री ली केकियांग ने सीपीईसी के इस प्रोजेक्ट को जल्द पूरा करने की प्रतिबद्धता जताई। चीनी विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, चीन और पाकिस्तान ने अफगानिस्तान की विदेशी वित्तीय संपत्तियों को मुक्त करने सहित अफगानिस्तान को निरंतर सहायता और सहायता प्रदान करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की आवश्यकता को रेखांकित किया। दोनों पक्ष अफगान लोगों के लिए अपनी मानवीय और आर्थिक सहायता जारी रखने और अफगानिस्तान में विकास सहयोग बढ़ाने पर सहमत हुए।

भारत को इस प्रोजेक्ट पर है आपत्ति

भारत को इस प्रोजेक्ट पर है आपत्ति

बता दें कि, जुलाई में CPEC के विस्तार की रिपोर्ट सामने आने के बाद, भारत ने किसी तीसरे देश में CPEC परियोजनाओं के विस्तार पर कड़ी आपत्ति जताई और इसकी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के बारे में चिंता व्यक्त की थी। वहीं, विदेश मंत्रालय (एमईए) के आधिकारिक प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा, 'हमने तथाकथित सीपीईसी परियोजनाओं में तीसरे देशों की प्रस्तावित भागीदारी को आगे बढ़ाए जाने वाली रिपोर्ट देखी है। उन्होंने कहा कि किसी भी देश द्वारा इस तरह की कोई भी कार्रवाई सीधे भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन करती है।

सीपीईसी प्रोजेक्ट क्या है?

सीपीईसी प्रोजेक्ट क्या है?

सीपीईसी प्रोजेक्ट तीन हजार किलोमीटर तक फैला हुआ है। यह पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह से शिनजियांग को कवर करता है। चीन और पाकिस्तान का मानना है कि अगर इससे संपर्क जुड़ता है तो क्षेत्रीय संपर्क मजबूत होंगे। बता दें कि ,इसी साल जुलाई में चीन के विदेश मंत्री वांग वाई ने सीपीईसी को अफगानिस्तान तक ले जाने की इच्छा जताई थी। यह प्रोजेक्ट साल 2013 में शुरू किया गया था। यह प्रोजेक्ट ग्वादर बंदरगाह को अरब सागर और शिनजियांग के काशगर से जोड़ता है। वहीं, भारत सीपीईसी के तहत बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव (बीआरआई) का लगातार विरोध करता आ रहा है। वह इसलिए क्योंकि यह पाक अधिकृत कश्मीर से होकर गुजरता है। सीपीआईसी और बीआरआई दोनों भारत की संप्रभुता के खिलाफ है।

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