Pakistan airstrike Afghanistan: कितना खतरनाक है TTP और IS-K के आतंकी, पाकिस्तान के लिए क्यों बना गले की हड्डी?
Pakistan airstrike Afghanistan: पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सरहद पर बारूद की गंध एक बार फिर फैल गई है। पाकिस्तान ने शनिवार देर रात अफगानिस्तान के पक्तिका और नंगरहार प्रांतों में भीषण एयरस्ट्राइक की, जिसने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया। पाकिस्तान का दावा है कि उसने 'तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान' (TTP) और 'IS-K' के 7 ठिकानों को तबाह किया है, जिन्हें वह हालिया आत्मघाती हमलों का जिम्मेदार मानता है।
वहीं, अफगानिस्तान का आरोप है कि इस हमले में 17 बेगुनाह नागरिक मारे गए हैं। टीटीपी और आईएस-के जैसे संगठन पाकिस्तान के लिए ऐसे नासूर बन गए हैं, जिन्होंने देश के भीतर कत्लेआम मचा रखा है। इन दोनों गुटों के खौफनाक नेटवर्क और उनकी पाकिस्तान से पुरानी दुश्मनी ने ही इस्लामाबाद को सीमा पार इस सैन्य कार्रवाई के लिए मजबूर किया है।

TTP: घर का वो भेदी जिसने लंका ढहाई
तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) को 'पाकिस्तानी तालिबान' कहा जाता है। 2007 में बना यह संगठन पाकिस्तान सरकार का सबसे बड़ा दुश्मन है। इसका मुख्य मकसद पाकिस्तान के कबायली इलाकों (खैबर पख्तूनख्वा) से सरकारी नियंत्रण खत्म कर अपना कट्टर शरिया कानून लागू करना है। टीटीपी अल-कायदा से विचारधारा और ट्रेनिंग लेता है। पिछले एक दशक में इसने पाकिस्तान में हजारों बेगुनाहों और सुरक्षाकर्मियों का खून बहाया है। बेनजीर भुट्टो की हत्या से लेकर पेशावर स्कूल हमले तक, इस संगठन का हाथ पाकिस्तान के हर बड़े जख्म के पीछे रहा है।
IS-K: सरहद पार का सबसे घातक खतरा
इस्लामिक स्टेट-खोरासान (IS-K) दुनिया के सबसे क्रूर आतंकी संगठन ISIS की एक शाखा है। 2015 में बने इस गुट का सपना अफगानिस्तान, पाकिस्तान और मध्य एशिया के कुछ हिस्सों को मिलाकर एक 'खोरासान प्रांत' बनाना है। यह संगठन न केवल पाकिस्तान सरकार का दुश्मन है, बल्कि यह अफगान तालिबान को भी अपना प्रतिद्वंद्वी मानता है। IS-K अपनी क्रूरता के लिए कुख्यात है और यह अक्सर शिया समुदायों, अल्पसंख्यकों और सार्वजनिक जगहों पर आत्मघाती धमाके करके दहशत फैलाता है।
फितना अल खवारिज: नाम बदलने की सियासत
पाकिस्तानी सरकार ने अब टीटीपी को 'फितना अल खवारिज' कहना शुरू कर दिया है। 'खवारिज' शब्द का इस्तेमाल इस्लाम के शुरुआती दौर में उन लोगों के लिए किया जाता था जो धर्म के नाम पर गुमराह होकर विद्रोह करते थे। पाकिस्तान ऐसा इसलिए कर रहा है ताकि इन आतंकियों की धार्मिक साख को खत्म किया जा सके और जनता को बताया जा सके कि इनका इस्लाम से कोई लेना-देना नहीं है। पाकिस्तान का मानना है कि ये गुट धर्म की आड़ में सिर्फ अराजकता और खूनखराबा फैला रहे हैं।
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अभी पाकिस्तान ने क्यों किया एयरस्ट्राइक?
पाकिस्तान का दावा है कि हालिया एयरस्ट्राइक उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक 'मजबूरी' थी। इस्लामाबाद, बाजौर और बन्नू जैसे शहरों में हुए सिलसिलेवार आत्मघाती हमलों ने देश में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। पाकिस्तानी सेना का सीधा आरोप है कि 'फितना अल खवारिज' (TTP) के आतंकी अफगान तालिबान की सरपरस्ती में वहां की जमीन का इस्तेमाल हमलों की साजिश रचने के लिए कर रहे हैं। लगातार हो रहे खूनखराबे को रोकने और आतंकी नेटवर्क्स को ध्वस्त करने के लिए पाकिस्तान ने इस जवाबी सैन्य कार्रवाई को अंजाम दिया है।
अमेरिका के लिए भी ये संगठन बड़ा खतरा
TTP और IS-K सिर्फ पाकिस्तान ही नहीं, बल्कि अमेरिका के लिए भी बड़े खतरे रहे हैं। टीटीपी ने 2009 में खोस्त में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर हमला किया था और 2010 में न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर को उड़ाने की कोशिश भी की थी। इसी वजह से अमेरिका ने टीटीपी को एक विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित कर रखा है। वहीं, IS-K ने भी 2021 में काबुल एयरपोर्ट पर अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाया था। इन संगठनों पर अंतरराष्ट्रीय पाबंदियां लगी हुई हैं और इनकी संपत्तियां पूरी दुनिया में फ्रीज हैं।
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बढ़ता तनाव: क्या छिड़ेगी सीधी जंग?
इस ताजा एयरस्ट्राइक ने पाकिस्तान और अफगानिस्तान के रिश्तों को बेहद नाजुक मोड़ पर ला खड़ा किया है। एक तरफ पाकिस्तान अपनी सुरक्षा के लिए सीमा पार हमले को जायज बता रहा है, तो दूसरी तरफ अफगानिस्तान इसे अपनी संप्रभुता पर हमला मान रहा है। टीटीपी और आईएस-के के खात्मे के नाम पर शुरू हुई यह सैन्य कार्रवाई क्षेत्र में एक बड़े युद्ध की चिंगारी भी बन सकती है। अगर तालिबान ने जवाबी कार्रवाई की, तो आने वाले दिनों में सीमा पर हालात और भी भयावह हो सकते हैं।
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