भारतीय विदेश मंत्री ने सुनाई थी खरी-खोटी, अब जर्मनी ने भी माना- सही थे जयशंकर
जयशंकर ने पिछले साल स्लोवाकिया में एक सवाल का जवाब देते हुए कहा था कि यूरोप को उस मानसिकता से बाहर निकालना होगा कि उसकी समस्याएं पूरी दुनिया की समस्याएं हैं लेकिन दुनिया की समस्या, यूरोप की समस्या नहीं है।

Image: Oneindia
जर्मनी के म्यूनिख शहर में सिक्योरिटी कांफ्रेंस को लेकर दुनिया भर के नेता जुटे हुए हैं। यूक्रेन-रूस जंग के एक साल पूरे होने से पहले इस तीन दिवसीय सम्मेलन के दौरान भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर का एक पुराना बयान चर्चा का विषय बना हुआ है। जर्मनी के चांसलर ओलाफ शोल्ज ने भी एस जयशंकर की चर्चित बयान 'यूरोपियन माइंडसेट' को बिल्कुल ठीक बताया है। उन्होंने कहा- जयंशकर की विचारधारा में बदलाव वाली बात में दम है।
जयशंकर के बयान का किया जिक्र
जर्मनी के चांसलर ओलाफ शोल्ज ने म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन के दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर की वायरल 'यूरोपीय माइंडसेट' वाली टिप्पणी को कोट किया है। दरअसल भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर जून 2022 को स्लोवाकिया पहुंचे थे। यहां उन्होंने कहा था- "यूरोप को इस मानसिकता से बाहर निकलना होगा कि यूरोप की समस्याएं दुनिया की समस्याएं हैं, लेकिन दुनिया की समस्याएं यूरोप की समस्याएं नहीं हैं।" म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन के दौरान, चांसलर शोल्ज ने जयशंकर की इसी टिप्पणी पर प्रकाश डाला और इसकी वैधता को स्वीकार किया।
जर्मन चालंसर बोले- दुनिया में और भी गम हैं
जर्मन चांसलर ने कहा- भारत के विदेश मंत्री जयशंकर के इस बयान को इस साल की म्यूनिख सिक्योरिटी काउंसिल की रिपोर्ट में शामिल किया गया है। हम इससे सहमत हैं कि अगर बड़ी ताकतें इंटरनेशल रिलेशन्स को अपने मुताबिक ढालना चाहती हैं, तो यह केवल यूरोप की समस्या नहीं है। शोल्ज ने एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका जैसे क्षेत्रों के साथ काम करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि इससे भुखमरी और गरीबी जैसी चुनौतियों का समाधान खोजा जा सकता है। इसके साथ ही कुछ चुनौतियां रूस-यूक्रेन जंग के साथ-साथ क्लाइमेट चेंज और कोवड-19 के कारण भी सामने आई हैं।
अमेरिका और यूरोप को लगाई थी लताड़
GLOBSEC ब्रातिस्लावा फोरम में हिस्सा लेने यूरोप के स्लोवाकिया पहुंचे एस जयशंकर की आलोचना इस बात पर हो रही थी कि भारत ने गेहूं निर्यात पर बैन लगा रखा है। इस सवाल पर जयशंकर ने 9 महीने पहले कहा था- 'भारत ने जून 2022 तक कुल 23 देशों को गेहूं का निर्यात किया है। मैं पूछता हूं अमेरिका और यूरोपीय देश ईरान के तेल को बाजार में क्यों नहीं आने दे रहे हैं? वे क्यों नहीं वेनेजुएला को बाजार में अपना तेल बेचने दे रहे हैं?" उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका और यूरोप ने हमारे पास तेल के जो भी स्रोत हैं, उसे निचोड़ लिया है। अब वे कह रहे हैं कि आप हमारे पास आइए हम सबसे अच्छी डील देंगे। मैं नहीं समझता हूं कि यह एक ठीक रवैया है।
'आधे दिन भी उतना तेल खरीद लेता है यूरोप'
आपको बता दें कि ये पहली बार नहीं था जब भारत के विदेश मंत्री ने अमेरिका और पश्चिमी देशों को घेरा था। इससे पहले, अमेरिका में 2+2 वार्ता के दौरान भी जयशंकर ने तेल खरीदने को लेकर पश्चिमी देशों को जमकर लताड़ लगाई थी। एस जयशंकर ने कहा था कि भारत रूस से जितना तेल महीने भर में नहीं खरीदता, उससे अधिक तेल यूरोप रूस से एक दोपहर में खरीद लेता है। उन्होंने इस दौरान कहा था- यदि आप रूस से भारत की ऊर्जा खरीद पर बात करना चाहते हैं तो मेरा सुझाव है कि आपको यूरोप पर ध्यान देना चाहिए।












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