सर पर छत नहीं, मुंह में निवाला नहीं... तालिबान राज में लाखों अफगान नर्क की जिंदगी कैसे जी रहे?
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार समूह की प्रमुख मिशेल बाचेलेट ने अफगानिस्तान की स्थिति पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि, अफगान नागरिक अब तक के सबसे बुरे दौर से गुजर रहे हैं।
काबुल, जुलाई 02: अफगानिस्तान पर तालिबान को कब्जा जमाए 11 महीने का वक्त हो चुका है और इन 11 महीनों से अफगानिस्तान के लाखों लोग नर्क भरी जिंदगी गुजारने को मजबूर हैं और नॉर्वेजियन रिफ्यूजी काउंसिल (NRC) ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि, तालिबान राज स्थापित होने के बाद अफगानिस्तान में 500,000 परिवार बेघर होने के कगार पर हैं।

एनआरसी की चिंताजनक रिपोर्ट
अफगानिस्तान में एनआरसी के कंट्री डायरेक्टर नील टर्नर ने एक बयान में कहा कि, 'लगभग 4,000 लोगों को काबुल और उसके आसपास के घरों से बेदखल कर दिया गया है'। खामा प्रेस ने बताया कि अफगानिस्तान में विस्थापितों की एक और बड़ी लहर उठने वाली है और मानवीय संगठनों के पास उसे रोकने और उनतक साधारण सुविधाएं भी पहुंचाने का कोई विकल्प नहीं होगा। दशकों के युद्ध, राजनीतिक अस्थिरता और उसके बाद के आर्थिक मंदी के कारण अफगानों को अफगान धरती से ही विस्थापित कर दिया गया है। वहीं, देश की सत्ता पर नियंत्रण स्थापित करने वाले तालिबान के अंदर ही भारी कलह जारी है और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों ने तमाम मदद बंद कर रखे हैं, लिहाजा स्थिति और खराब होती जा रही है। जिसकी वजह से हजारों लोग बड़े शहरों के आसपास तंबुओं में रहकर जिंदगी गुजार रहे हैं और उनकी स्थिति दयनीय है।

तालिबान से की बड़ी अपील
एनआरसी ने एक बयान जारी करते हए तालिबान से लाखों विस्थापितों की समस्या का शीघ्र और दीर्घकालिक समाधान खोजने की मांग की है और अपील करते हुए कहा है, कि जिन लोगों को राजनीतिक बंदी बनाए गये हैं, उन्हें भी रिहा किया जाए। खामा प्रेस ने सूत्रों का हवाला देते हुए कहा कि इसके अलावा, लोगों पर काबुल, मजार-ए-शरीफ और प्रांतों, जैसे कि तालिबान द्वारा दाइकुंडी के बाहरी इलाके से भगाने का आरोप है। नॉर्वेजियन रिफ्यूजी काउंसिल (NRC) के अनुसार, आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों को उनके मूल क्षेत्रों में वापस भेजने के लिए सरकार के बढ़ते दबाव के परिणामस्वरूप, अफगानिस्तान में 500,000 परिवार जल्द ही बेघर हो सकते हैं।

पिछले एक साल में काफी बिगड़ी स्थिति
पिछले साल अगस्त के मध्य में तालिबान के सत्ता में आने के बाद से अफगानिस्तान ने न केवल बड़े पैमाने पर पलायन देखा है, बल्कि निमरोज प्रांत और तुर्की के माध्यम से ईरान जैसे पड़ोसी देशों में अफगानों का अवैध क्रॉसिंग भी देखा है। शरणार्थी और प्रत्यावर्तन मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2021 से मुख्य रूप से पड़ोसी देशों से 653,000 से अधिक अफगान शरणार्थी वापस आ गए हैं या उन्हें वापस अफगानिस्तान भेज दिया गया है। हालांकि, देश में लड़ाई समाप्त हो गई है, लेकिन अफगानिस्तान की स्थिति बिगड़ती जा रही है क्योंकि गंभीर मानवाधिकारों का उल्लंघन बेरोकटोक जारी है। इससे पहले, यूएनएचसीआर ने यूरोपीय संघ से पांच वर्षों में 42,500 अफगानों को स्वीकार करने के लिए कहा था, लेकिन अनुरोध का देशों ने विरोध किया था।

यूएन रिपोर्ट में भी जताई गई है चिंता
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार समूह की प्रमुख मिशेल बाचेलेट ने अफगानिस्तान की स्थिति पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि, अफगान नागरिक अब तक के सबसे बुरे दौर से गुजर रहे हैं। बाचेलेट ने बुधवार को मानवाधिकार परिषद में एक सत्र के दौरान अफगान मसले पर अपनी चिंता जाहिर की। उच्चायुक्त मिशेल बाचेलेट ने चिंता जाहिर करते हुए आगे कहा कि, पिछले साल अगस्त में तालिबान ने अफगानिस्तान की सत्ता पर कब्जा कर लिया था, इसके बाद से देश गहरे आर्थिक, सामाजिक, मानवीय और मानवाधिकार संकट में डूब गया है। संयुक्त राष्ट्र ने अफगानिस्तान में महिलाओं की स्थिति पर चर्चा करते हुए आगे कहा कि, तालिबान के दमनकारी नीतियों के खिलाफ वहां की महिलाओं ने सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया और अपने अधिकारों की मांग की। उन्होंने अफगान महिलाओं की साहस की प्रशंसा की।












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