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धरती के 'अनसुलझे राज' से हटेगा पर्दा! 470 करोड़ का Satellite तैयार, NASA और ISRO ने कर ली प्लानिंग

इसरो और नासा ने मिलकर एक सैटेलाइट तैयार किया है, जो पृथ्वी की महत्वपूर्ण डेटा एकत्र करेगा। जिसके आधार पर पिछले दशकों की तुलना में जलवायु परिवर्तन के कारण होने वाले बदलाव को ट्रैक किया जा सकेगा।

NISAR Satellite

NISAR Satellite: नासा के साथ भारतीय स्पेस एजेंसी इसरो के साइंटिस्ट्स की संयुक्त टीम द्वारा विकसित उपग्रह निसार (NISAR) एक अहम उपग्रह है। जिसे ऊर्जा के प्राकृतिक स्रोतों, ग्लेशियर्स के पिघलने से बढ़ते समुद्र के जलस्तर, जंगल, बायोमास ईंधन समेत कई क्षेत्रों में अध्ययन के लिए अहम डेटा एकत्र के करन के लिए बनाया गया है। फरवरी 2023 में बनाए गए इस सेटेलाइट में अब तक 469.40 करोड़ रुपए का खर्च आया। इसको लेकर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने भी सदन में एक एक सवाल के जवाब मे अहम जानकारी दी। इसके अलावा ये उपग्रह भूगर्भ और पृथ्वी की सतह पर मौजूद कई अहम अनसुलझे राज से पर्दा उठाएगा।

क्या है NISAR सैटेलाइट
हाल ही में केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने संसद में कहा कि नासा और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने संयुक्त रूप से NISAR नामक एक पृथ्वी विज्ञान उपग्रह (Earth Science Satellite) का निर्माण किया है। राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में, उन्होंने कहा कि उपग्रह के मिशन के उद्देश्य शोध को लेकर अहम डेटा उपलब्ध कराना है। इसे ड्यूएल फ्रीक्वेंसी रडार इमेजिंग सैटेलाइट के तहत डिजाइन किया गया है। जो खासकर पृथ्वी की सतह में परिवर्तन, बायोमास स्ट्रक्चर, प्राकृतिक संसाधन मानचित्रण, निगरानी और बर्फ की चादरों, ग्लेशियरों, जंगलों, तेल की परत आदि की गतिशीलता से संबंधित डेटा उपलब्ध कराएगा।

12 दिन का मिशन
निसार मिशन के तहत अंतरिक्ष यान 12 दिनों तक अंतरिक्ष में रहेगा। इस दौरान ये 98.4 डिग्री के पृथ्वी की ओर झुका रहेगा। कुल मिलाकर ये सैटेलाइट 747 किलोमीटर की सूर्य के सापेक्ष कक्षा की परिक्रमा करेगी। बता दें कि निसार उपग्रह में एल-बैंड एसएआर पेलोड, हाई जीपीएस और 12 मीटर अनफर्लेबल एंटीना नासा ने लगाया है। तो वहीं इसरो ने एस-बैंड एसएआर पेलोड और लॉन्च सुविधा वाला अंतरिक्ष यान उपलब्ध करा रहा है। अब तक इस उपग्रह को बनाने में र 469.40 करोड़ रुपये की लागत आई है। इसमें लॉन्च की लागत जोड़ी जाएगी को राशि काफी बढ़ जाएगी।

9 साल पहले हुई कल्पना
साल 2014 में नासा ने इस तरह के उपग्रह के निर्माण की कल्पना की थी। इसे अब जनवरी 2024 में सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से निकट-ध्रुवीय कक्षा में लॉन्च किए जाने की उम्मीद है। उपग्रह करीब तीन साल तक काम करेगा। यह एक निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO) वेधशाला है। निसार 12 दिन में पूरी दुनिया का नक्शा तैयार कर लेगा।

जलवायु परिवर्तन की मिलेगी जानकारी
NISAR पृथ्वी की सतह में परिवर्तन, प्राकृतिक खतरों और पारिस्थितिक तंत्र की गड़बड़ी के बारे में डेटा उपलब्ध कराएगा। इसे पृथ्वी और जलवायु परिवर्तन को लेकर अहम जानकारी मिलेगी। इसके अलावा NISAR डेटा का उपयोग फसल की वृद्धि, मिट्टी की नमी और भूमि उपयोग में बदलाव के बारे में जानकारी प्रदान करके कृषि प्रबंधन और खाद्य सुरक्षा में सुधार के लिए किया जा सकेगा। इके अलावा मिशन बुनियादी ढांचे की निगरानी और तेल रिसाव, शहरीकरण और वनों की कटाई की निगरानी के प्रबंधन को लेकर डेटा उपलब्ध कराएगा।

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