जापान में तबाही से हुआ नए साल का आगाज, भूकंप के बाद सुनामी से मची हाहाकार
जापान एक बार फिर भीषण भूकंप से दहल गया है। हालात इतने खराब हो गए हैं कि भूकंप प्रभावित प्रांत में समुद्र का जलस्तर डेंजर लेवल पर पहुंच गया है और लोगों को घर तक खाली करने का आदेश जारी कर दिया गया।
जापान के इशिकावा प्रांत के नोटो में 7।5 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया। इसके बाद ही इशिकावा में सुनामी की चेतावनी भी जारी कर दी गई। भूकंप के झटके जापान की राजधानी टोक्यो और कांटो क्षेत्र में महसूस किए गए।

जापानी सार्वजनिक प्रसारक NHK ने सुनामी की चेतावनी के बाद 5 मीटर तक की लहरों की आशंका की वजह से लोगों से तटीय क्षेत्रों को छोड़ने और इमारतों के ऊपर या फिर ऊंची जगहों पर जाने का अनुरोध किया है। फिर इशिकावा में वाजिमा शहर के तट पर 1 मीटर से ज्यादा ऊंची लहरें टकराईं। सुनामी के यामागाटा प्रांतों पर भी पहुंचने की आशंका है। प्राकृतिक आपदाओं में सुनामी सबसे खतरनाक मानी जाती है।
अब सवाल ये उठता है कि सुनामी कैसे आती है। तो आपको बता दें, सुनामी की रफ्तार जेट से भी ज्यादा तेज होती है। सबसे पहले जानते हैं कि सुनामी का क्या मतलब है। दरअसल, सुनामी शब्द जापानी शब्द तुस यानि बंदरगाह या तट और नामी यानि लहर से मिलकर बना है। इसमें T अक्षर साइलेंट होता है। सुनामी आने की सबसे बड़ी वजह समुद्र के अंदर भूकंप आना, ज्वालामुखी फटना, धमाका होना या लैंडस्लाइड को माना जाता है। इससे समुद्र के तल पर भारी हलचल पैदा होती है।
समुद्री तल पर जब भूकंप, ज्वालामुखी के फटने, धमाका होने या भूस्खलन के कारण भारी हलचल होती है, तो पानी के कॉलम खिसकने लगते हैं। इसके बाद वाइब्रेशन से 500 किमी/घंटे की रफ्तार की लहरें पैदा होती हैं। जब ये लहरें तट की ओर बढ़ती हैं तो इनकी रफ्तार कम होती है, लेकिन ऊंचाई बहुत ज्यादा होती है। तो वहीं, पानी के सुनामी की रफ्तार 800 किमी/घंटे तक पहुंच जाती है। कभी कभार महज एक दिन के अंदर सुनामी पूरा महासागर पार कर लेती है। वहीं, जमीन या कम पानी में ये रफ्तार 23 से 45 किमी/घंटे तक रहती है।
केंद्र सरकार ने भारत में पूर्वी तट पर सुनामी की आशंका वाले क्षेत्रों की सूची तैयार की है। इसमें पुरी, काकीनाडा, मछलीपट्टनम, निजामपट्टनम-वेटापलेम, चेन्नई, कुड्डालोर-पुड्डुचेरी, रामेश्वरम, अलपुझा-चावरा और कोच्चि शामिल हैं। रिकॉर्ड बताते हैं कि भारत में सुनामी से प्रभावित इलाकों को हर बार बड़ा झटका लगा है। ये सुनामी हिंद महासागर में आई थीं। भारत में दर्ज की गई सबसे तेज सुनामी में लहरें 17।30 मीटर की ऊंचाई तक पहुंच गई थीं। 26 दिसंबर 2004 को आई इस सुनामी का सबसे ज्यादा असर चेन्नई में देखा गया था। तब सिर्फ भारत में ही 18 हजार से ज्यादा लोगों की जान चली गई थी। इसके अलावा इस सुनामी का असर केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, पुड्डुचेरी, ओडिशा में देखा गया था।
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